जिस शख्स ने टीवी मीडिया को बर्बाद कर दिया, दिन रात चीख चीख कर दूसरे ऐंकर और रिपोर्टर को भी चीखने की आदत लगवाई, दुनिया भर का पैसा होने के बाद केवल सरकार की चाटुकारिता की, जब प्रवासी मजदूर सड़कों पर चल रहे थे, तब सुशांत सिंह राजपूत की मौत का इस्तेमाल बिहार चुनाव और कोरोना से ध्यान भटकाने के लिए किया, उस आदमी के दिवालिया होने से पहले सरकार के खिलाफ दो कड़े शब्द के वजह से अगर आप उसके दोबारा से फैन बन रहे हो, तो समझ आता है कि हम कितने बेवकूफ हैं... यह तो ठीक वैसा ही है कि जबतक अजित पवार विपक्ष में हैं, तबतक भ्रष्टाचारी, जब बीजेपी के साथ, तब देशभक्त और ज़मीन से जुड़ा नेता!
कठमुल्ला
बात सलीके से भी रखी जा सकती है मगर वही बात है की जब दिल और दिमाग में एक समुदाय के लिए नफरत हो तो शब्द खुद इंसान के चेहरे से नकाब उतार देता है।