क़रीब एक महीने पहले की बात है। मेरी एक रिश्तेदार बोरसी तापने के दौरान जल गई थीं। बेहतर इलाज के लिए उन्हें रांची के देवकमल अस्पताल में भर्ती किया गया। लेकिन कुछ राहत नहीं म��ली। वे लगभग 70 प्रतिशत जल चुकी थीं। फ़ैसला हुआ कि एम्स दिल्ली लेकर जाया जायेगा। सवाल उठा कि कैसे? तब एयर एंबुलेंस की बात सामने आई। मैंने बताया कि झारखंड सरकार 50% सब्सिडी में एयर एंबुलेंस देती है क्यों नहीं उसके लिए प्रयास किया जाए। टॉल फ्री नंबर पर बात करने पर बताया गया कि बर्न केस में 30% प्रतिशत से अधिक जल जाने पर हमलोग एयर लिफ्ट नहीं करते। फिर प्राइवेट एयरलाइंस से बात हुई और वे 7.5 लाख में ले जाने को तैयार हुए। पैसा क़रीब तीन बजे ही जमा लिया गया और शाम क़रीब सात बजे मरीज़ को एयरलिफ़्ट करके एयर एंबुलेंस से दिल्ली ले जाया गया।
अब आते हैं मरीज़ संजय कुमार के केस में। जिस विमान का हादसा हुआ वह रेडबर्ड एयर लाइंस का ही था। और झारखंड सरकार जो एयर एंबुलेंस की सुविधा 50 फ़ीसदी सब्सिडी के साथ देती है उसका संचालन भी एयर बर्ड एयर लाइंस ही करता है। परिवार वालों ने जैसी जानकारी दी उसके अनुसार कर्ज लेकर 7.5 लाख जुटाया और एयर एंबुलेंस के लिए दिया। तो यहां सवाल उठता है कि आख़िर मरीज़ संजय को सरकार की सब्सिडी वाला एयर एंबुलेंस क्यों नहीं मिला ? जैसी जानकारी है उसके अनुसार ��ंजय भी 65% प्रतिशत जल चुके थे। तो सवाल है कि जो रेड बर्ड कंपनी प्रतिशत का आंकड़ा दिखाकर सरकारी व्यवस्था के तहत मरीज़ को ले जाने से मना कर देती है वही कंपनी वही जगह से पूरा पैसा लेकर उसी विमान से कैसे लेकर जाती है? क्या इसमें कोई बड़ा खेल है? जानकारी तो यह भी मिली है कि रेड बर्ड कंपनी के जिस Beechcraft King Air BE9L का हादसा हुआ वह क़रीब 39 साल पुराना विमान था। पूरे मामले की कठोर जांच की ज़रूरत है।
13–20 फरवरी तक आयोजित राजकीय जनजातीय हिजला मेला महोत्सव-2026 का उल्लास जुलूस, पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ भव्य शुभारंभ हुआ। यह मेला परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम है। मेले में सुरक्षा, स्वच्छता, पेयजल, यातायात सहित सभी आवश्यक सुविधाएँ सुनिश्चित की गई है।
@HemantSorenJMM
स्विट्जरलैंड क�� दावोस में World Economic Forum के मंच से फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मौजूदा वैश्विक व्यवस्था पर गहरी चिंता व्यक्त की। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने अमेरिका पर निशाना साधा।
“देखिए हम किस हालात में खड़े हैं। लोकतंत्र से हटकर दुनिया एक तरह से निरंकुशता की ओर बढ़ रही है। हिंसा बढ़ रही है। 2024 में 60 से ज़्यादा युद्ध हुए-जो एक रिकॉर्ड है, भले ही मैं मानता हूँ कि उनमें से कुछ सुलझ भी गए।
संघर्ष अब सामान्य स्थिति बनता जा रहा है। हाइब्रिड टकराव नए-नए क्षेत्रों में फैल रहा है-अंतरिक्ष, डिजिटल, सूचना, साइबर, व्यापार और दूसरे कई मोर्चों पर।
हम ऐसे दौर की ओर बढ़ रहे हैं जहाँ नियमों पर आधारित व्यवस्था कमजोर पड़ रही है। अंतरराष्ट्रीय कानून को पैरों तले रौंदा जा रहा है, और ऐसा लगता है कि अब सिर्फ़ ताकतवर का कानून ही मायने रखता है। साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षाएँ फिर से उभर रही हैं।
लगता है राष्ट्रपति ट्रंप को नोबेल पुरस्कार नहीं मिलने से जो इगो हर्ट हुआ है, वह शांत होने का नाम नहीं ले रहा है-यहाँ तक कि एक सेकंड हैंड नोबेल मिलने के बाद भी नहीं।
ट्रंप ने नॉर्वे के प्रधान��ंत्री को एक पत्र लिखकर कहा कि चूंकि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिया गया, इसलिए अब वह खुद को सिर्फ़ शांति के बारे में सोचने की बाध्यता से मुक्त मानते हैं और आगे अपनी प्राथमिकता अमेरिकी हितों को देंगे।
मतलब, उनके कहने का आशय यह है कि चूंकि उन्हें नोबेल पीस प्राइज़ नहीं मिला, इसलिए अब वह दुनिया में पीस नहीं रहने देंगे।
पुलिस अधीक्षक, दुमका के निर्देशानुसार दुमका जिले के मुफ्फसिल थाना अंतर्गत गांदो हाई स्कूल मैदान में दुमका पुलिस द्वारा जागरूकता कैंप का आ��ोजन किया गया।
थाना प्रभारी मुफस्सिल प्रशिक्षु आईपीएस डॉ मोहमद सैयद मुस्तफा हाशमी के नेतृत्व में आयोजित......(1/2)