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🚨 IMPORTANT
We have consulted Mr. Kapil Sibal. If Ashu and Saurav are not released by tomorrow, we will pursue legal action against all those who deliberately ensured that they continue to be in illegal custody especially when they have not committed nor charged with any offence.
The deliberate use of delaying tactics to keep them behind bars cannot go unchallenged. Those responsible will be held accountable.
The standard banner of Mission Save Constitution for the Nation wide campaign to ban #evm and #BringBackBallot
Any person or organization who would like to join may get it printed.
"मायूस मत होना ज़िंदगी से कभी भी,
किसी भी वक़्त तेरा नाम बन सकता है!
अगर दिल में हो आग और हौसले हों बुलंद,
तो अखबार बेचने वाला भी 'कलाम' बन सकता है!!
#15/10/1931 रामेश्वरम (तमिलनाडु)
95Th, Anniversary
क्या CJI सूर्यकांत को संविधान की जानकारी नहीं हैं ??
बार-बार CJI के बयानों को सुनकर सवाल उठता है कि देश के इतने महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से ऐसी टिप्पणियों की उम्मीद कैसे की जा सकती है? इतने बड़े पद की गरिमा केवल कुर्सी से नहीं, बल्कि शब्दों की मर्यादा और फैसलों की जिम्मेदारी से तय होती है।
युवाओं को ‘कॉकरोच’ कहने जैसी टिप्पणी का समाज पर क्या असर पड़ता है, यह धर्मेंद्र प्रधान से पूछ लीजिए। देश के युवाओं को अपमानित करने के बजाय उनकी बेरोजगारी, उनके भविष्य और उनकी समस्याओं पर बात होनी चाहिए।
और जहां तक सरकार के इकबाल की बात है, अमित शाह तक रोज देश का फीडबैक पहुंचता होगा। जनता का भरोसा किसी प्रचार से नहीं, बल्कि न्याय, रोजगार, महंगाई और जवाबदेही से कायम रहता है। सत्ता का रुतबा स्थायी नहीं होता, जनता का सवाल स्थायी होता है।
अब आते हैं नागरिक पत्रकारिता पर।
CJI साहब, एक सवाल है—जिन्हें आप पत्रकार मानते हैं, वे पत्रकारिता कहां कर रहे हैं? शाम सात बजे के बाद टीवी खोलकर देखिए। कितने चैनल जनता के सवाल उठा रहे हैं और कितने सत्ता के सवालों से बच रहे हैं?
आज जिस खबर को मुख्यधारा का मीडिया नजरअंदाज करता है, जिस अन्याय को कैमरे नहीं दिखाते, जिस आवाज को स्टूडियो में जगह नहीं मिलती, वही आवाज सोशल मीडिया पर वीडियो, पोस्ट और लाइव प्रसारण के जरिए लाखों लोगों तक पहुंचती है।
भारत में करोड़ों लोग स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं। हर हाथ में मौजूद मोबाइल अब केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि सवाल पूछने और सच्चाई सामने लाने का माध्यम भी है।
पत्रकारिता सिर्फ न्यूज़रूम की चारदीवारी में कैद नहीं है। कोई नागरिक घटनास्थल पर मौजूद होकर वीडियो बनाता है, किसी पीड़ित की आवाज उठाता है, किसी अधिकारी से सवाल करता है या किसी दबाई गई खबर को जनता तक पहुंचाता है—तो वह नागरिक पत्रकारिता में योगदान दे रहा है।
हाँ, हर मोबाइलधारक पेशेवर पत्रकार नहीं होता। खबर की पुष्टि, तथ्यों की जांच और जिम्मेदारी हर व्यक्ति के लिए जरूरी है। लेकिन किसी नागरिक को सिर्फ इसलिए चुप नहीं कराया जा सकता कि उसके पास प्रेस कार्ड नहीं है।
लोकतंत्र में बोलने का अधिकार किसी मीडिया हाउस की संपत्ति नहीं है। संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) हर नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, जो कानून के तहत उचित प्रतिबंधों के अधीन है।
CJI साहब, पत्रकारिता की पहचान केवल प्रेस कार्ड से नहीं, जनता के प्रति उसकी जवाबदेही से भी होती है।
जो सवाल सत्ता से पूछे जाने चाहिए, उन्हें पूछना अपराध नहीं है। जो खबरें छूट जाती हैं, उन्हें सामने लाना लोकतंत्र के लिए जरूरी है। और जो आवाजें दबाई जाती हैं, उन्हें सुनाना नागरिक का अधिकार है।
याद रखिए—लोकतंत्र में जनता सिर्फ खबर देखने वाली भीड़ नहीं, सवाल पूछने वाली ताकत है।
आपके पास संवैधानिक पद है, हमारे पास संविधान का अधिकार। आपके पास मंच है, हमारे पास मोबाइल। और जब जनता सवाल पूछने लगे, तो उसकी आवाज को नजरअंदाज करना आसान नहीं होता।
🔥 हम जनता के पत्रकार हैं—न किसी संपादक की अनुमति चाहिए, न सत्ता की मंजूरी। सच के प्रति ईमानदारी, तथ्यों की पुष्टि और हाथ में इंटरनेट चाहिए।
🚨ज्ञानेश के बाद अब CJI के इस्तीफे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मचा बवाल, वकीलों ने कर दिया ये बड़ा ऐलान!
सुप्रीम कोर्ट में CJI के इस्तीफे को लेकर उठे सवालों के बीच वकीलों का बड़ा ऐलान!
ज्ञानेश कुमार के मामले के बाद अब न्यायपालिका से जुड़े मुद्दों पर बहस तेज हो गई है।
आखिर CJI के इस्तीफे की मांग क्यों उठ रही है? वकीलों ने क्या ऐलान किया है और आगे आंदोलन की क्या रणनीति होगी?
🎥 GM News Network की पूरी रिपोर्ट देखिए और अपनी राय बताइए!
#SupremeCourt #CJI #GyaneshKumar #LawyersProtest #IndianJudiciary #GMNewsNetwork
.@abhijeet_dipke has been kidnapped by @DelhiPolice
It has been more than 10 hours since he was picked up but until now, neither his parents, nor his lawyers & not the CJP team have been given any updates about his location
We’re all asking only one question: #AbhijeetKahanHai
दिल्ली: AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने कहा, "कानून-व्यवस्था की हर तरह से धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आम नागरिकों के साथ ऐसा बर्ताव किया जाता है जैसे वे कोई बहुत बड़े अपराधी हों - यह चलन इस देश में लंबे समय से चला आ रहा है। मौजूदा आंदोलन ने साफ कर दिया है कि लोगों को कैसे हिरासत में लिया जा रहा है- चाहे दिन हो या शाम, उन्हें पूरी रात हिरासत में रखा जाता है और अगले दिन सुबह या शाम को ही छोड़ा जाता है। किस अधिकार के तहत इसे सही ठहराया जा सकता है? किस कानून या आदेश के तहत लोगों को पूरी रात हिरासत में रखना जायज है? कानूनी तौर पर, लोगों को - खासकर महिलाओं को - सूर्यास्त के बाद छोड़ दिया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। इसके अलावा, एक नया नैरेटिव (कथा) फैलाया जा रहा है - अराजकता और अव्यवस्था का। कैसी अराजकता और अव्यवस्था? वही जो आपने सेंट्रल दिल्ली में फैलाई है? दिल्ली के लोग चैन की सांस भी नहीं ले पा रहे हैं, वे काम पर जाने के लिए जो भी रास्ता चुनते हैं, वह बंद मिलता है। आप पूरे देश में अराजकता और अव्यवस्था फैला रहे हैं। कृपया, भारत के लोगों को बख्श दें। ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग चलाएं और SIR को रोकें, ताकि इस देश के आम नागरिक चैन की सांस ले सकें, सुकून से रह सकें और उनके वोट देने के अधिकार सुरक्षित रहें।"
#DelhiPolice #NehaBora #Protest #ZeeNews
वोट चोरी करना देशद्रोह है और सबसे बड़ा दोषी अगर कोई है तो वो ज्ञानेश कुमार है ।
इसको तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे देना चाहिए।
वरना दोबारा प्रोटेस्ट शुरू होगा जंतर मंतर पे,
देश से बड़ा कोई नहीं है और देश का लोकतांत्रिक व्यवस्था सुनिश्चित करना हम नागरिकों का प्रमुख कर्तव्य है।