#WATCH | Bhuj, Gujarat: Members of the Ahir community gathered in large numbers wearing vibrant traditional attire to celebrate the annual Garbi festival during Navratri. (15.10)
यही होता है, हमेशा होता है अहीर एक डरपोक क़ौम है, लड़ने की क्षमता नहीं इनमें, केवल जब एडवांटेज इनके साथ होगा तभी लड़ेंगे।
हमारे यहां सिंगरौर के यहां ये भैंस को चारा डालने आते हैं, इनकी आर्य बहिन हम बहुत पसंद करते हैं।
@Mughalputkabaap@abhiranshh
@Ray_cxe@Mughalputkabaap@abhiranshh हा बहिनचोद, मराठा और कुनबी भी अलग हैं? राजस्थान के राजपूत और यूपी के ठाकुर भी अलग हैं?
तुम सब एक हो और नीच हो, कम से कम कुर्मी से तो नीच ही हो।
विदेशी नस्ल की अहीरिन कुर्मियों के खेत में गाय चराने बहुत आती हैं, उनकी गुलाबी चू वही मार ली जाती है।
@singhp002 Bhai hm to khetihar the, mante v hain ki the, ladai hamara kaam nhi tha, tum the tum batao kaahe itihaas me jhaat kabar liye
@abhiranshh lado is mc se
@Mughalputkabaap ग्लोरीफाई? तेरी हिस्ट्री? अंग्रेज जब आए तो भारतीय नस्ल के बहादुर लोगों की औरतें चखने पे और मर्द फौज में होते थे।
ये है हिस्ट्री मादरचोद!!
कुछ ग्लोरीफाई करने जैसा नहीं है, कायर हो तुम सब जो घर में सेफ हो इसलिए बकैती के रहे, यही बॉर्डर पे छोड़ दिया जाय तो हग दोगे।
भारतीय नस्ल इतनी कामिनी नस्ल है कि इसकी कोई हद नहीं!!
बेगैरत और गद्दार कौमों से भरी है ये नस्ल।
अहीर, ठाकुर, पंडित सब अपने को सुरमा बोलते नहीं थकते, दूसर जात को गाली देते हैं।
अंततः ये बहादुर कौमें कंपनी बहादुर की तनखइया सिपाही रहे, सारी मर्दानगी अम्मा के भोसड़े में घुस गई थी।