नासमझ, अनाड़ी, कानून विरोधी बिहार के मुख्यमंत्री ख़ुद पॉक्सो एक्ट की धज्जियाँ उड़ा रहे है। जमुई कांड की नाबालिग पीड़िता की परिजनों संग अपने सोशल मीडिया हैंडल से तस्वीर जारी कर पीड़िता की पहचान उजागर कर रहे है।
पॉक्सो एक्ट (POCSO Act, 2012) के तहत पीड़ित बच्चे या नाबालिग की पहचान को गुप्त रखना कानूनन अनिवार्य है और इसे सार्वजनिक करना गंभीर अपराध है।
(पॉक्सो अधिनियम-2012 की धारा 23 के अनुसार, किसी भी मीडिया (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या सोशल मीडिया) या अन्य माध्यम से पीड़ित बच्चे की पहचान उजागर नहीं की जा सकती। इसमें बच्चे का नाम, पता, फोटो, स्कूल या परिवार से जुड़ी कोई भी जानकारी शामिल है जिससे उसकी पहचान का खुलासा हो सके। पहचान उजागर करने पर 6 महीने से 1 साल तक की जेल या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं)
बिहार के मुख्यमंत्री को इस जुर्म के लिए कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए अन्यथा फिर पॉक्सो एक्ट को मानेगा कौन?
सातवीं फेल सात हत्याओं का आरोपी मुख्यमंत्री बनाने पर ऐसे ही कानून का उल्लंघन होते रहेगा। ऐसे लोग कानून के रक्षक नहीं भक्षक है।
कल दिल्ली में छात्रों के साथ जो हुआ, उसके लिए केवल सरकार ही नहीं, बल्कि वे सभी लोग भी नैतिक रूप से जिम्मेदार हैं जिन्होंने सरकार की नाकामियों का बचाव किया और आज भी कर रहे हैं।
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जो लोग आज भी हर हाल में BJP का बचाव कर रहे हैं, उनमें से कुछ शायद डर की वजह से ऐसा कर रहे हैं और कुछ बीजेपी की IT सेल द्वारा फैलाए गए गलत जानकारी के प्रभाव में आ चुके हैं। जब किसी सही बात को बार-2 गलत और किसी गलत बात को सही बताया जाता है,तो धीरे-2 लोग उसी झूठ को सच मानने लगते है