इंसाफ दो, वरना जान से मार दो
चिता आंदोलन मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिलों में आदिवासी समुदायों द्वारा केन-बेतवा लिंक परियोजना का विरोध प्रदर्शन है।
लोग अपनी जान जोखिम में डालकर लेटकर या बैठकर प्रदर्शन कर रहे हैं। लोगों की ज़मीन, घर, संस्कृति और आजीविका का डूबना उनके लिए मौत से बदतर है।
केन-बेतवा परियोजना के तहत दौधन बांध बनने से लगभग 22 गांव प्रभावित, 7,000+ परिवारों का गांव डूब जाएगा
NDA सरकार ने आख़िरी बार कौन-सा स्कूल, कॉलेज या यूनिवर्सिटी बनाई थी, कुछ याद है?
एक लाख स्कूल ज़रूर बंद कर दिए! अब बच्चों का भविष्य बर्बाद करने के बाद युवाओं की बारी है?
आज़म ख़ान की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर अब बुलडोज़र चलाएँगे क्योंकि नाम “मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी” है?
प्रशासन कह रहा है कि यूनिवर्सिटी में कुल 40 भवन हैं, जिनमें से 38 का नक्शा पास नहीं हुआ था। इसलिए 38 भवनों पर अगले 15 दिनों में बुलडोज़र चलाएँगे!
ईमानदारी से बताइए कितने मंत्री, विधायक और सांसद हैं, जिनके घरों के नक्शे पास होंगे? उनका घर ढाने की हिम्मत है?
शिक्षा व्यवस्था तबाह कर ही दी है, जो बना-बनाया है, उसे भी बर्बाद कर रहे हैं?
शर्म करिए। दिल कैसे नहीं पसीजता?
मध्यप्रदेश सिवनी के #ITI छात्र सोहेल खान के साथ 10-15 लोगों द्वारा लिंचिंग की गई है।
ये घटना कुछ दिनों पूर्व की बताई जा रही है।
@MPPoliceDeptt से अनुरोध है मामले की जाँच एवं त्वरित कार्यवाही करें।
@ShayarImran@MOMAIndia संज्ञान लें वीडियो सोशलमीडिया पर वायरल है।
मॉब लिंचिंग के खिलाफ सख्त कानून की अब आवश्यकता है।।
कश्मीर की सड़कों पर हिजाब पहनी बच्चियों के सामने "हर हर महादेव" के नारे लगाने से ज़्यादा वाहियात और क्या हरक़त हो सकती है?
अमरनाथ यात्रा करना हमारा धार्मिक अधिकार है। लेकिन जिस धरती पर हम यात्रा करने जाते हैं, वहाँ के लोगों की भावनाओं और स्थानीय संवेदनशीलता का सम्मान करना भी उतना ही बड़ा धर्म है। यही महादेव का मार्ग है।
सच तो यह है कि हम दिन-रात धर्म की बात करते हैं, लेकिन धर्म के सिद्धांत सबसे पहले भूल जाते हैं।
शायद इसी को कलियुग कहते हैं।
Heartbreaking Incident 💔😭
कहते हैं ना 'सावधानी हटी, दुर्घटना घटी'
ये सिर्फ कहने की बात नहीं है 13 जुलाई को एक ऐसी ही दर्दनाक घटना चिकबल्लापुर, कर्नाटक के एक कपड़े के स्टोर पर देखने को मिली।
वीडियो में देख सकते हैं एक छोटी सी बच्ची रेलिंग के पास आती है और थोड़े ही देर में बैलेंस बिगड़ने की वजह से वो नीचे गिर जाती है।
साथियों अक्सर ऐसी गलतियां हम सभी से होती हैं, हम समान लेने के चक्कर में बच्चों को अकेला छोड़ देते हैं।
याद रखें वो एक पल की लापरवाही हमारे जीवन भर का पछतावा बन सकती है!
इसलिए सभी पैरेंट्स से मेरी अपील है जब भी कभी अपने बच्चों को शॉपिंग पर ले जाएं उन्हें अकेला ना छोड़ें।
एक युवक दुकान से कुछ लेकर आ रहा था,
तभी सड़क पर एक लड़की अचानक छत से गिरी, पहले तो डर गया
जब उसने देखा बच्ची है, उसे उठा कर तुरंत हॉस्पिटल भागा ,अपना सामानभी नहीं उठाया,
वह जानता था लड़की को अगर समय पर इलाज मिल जाए तो उसकी जिंदगी बच सकती है।
युवक की मानवता को सलाम।
111 दिन तक प्रधानमंत्री को प्रोफेसर अग्रवाल से जीते जी बात करने की सुध नहीं आई थी और मर जाने के बाद 26 शब्दों का मर्सिया लिख दिया!
वाह! क्या गज़ब की संवेदनशीलता है।
जब तक सांसें थीं, जब तक वह बुजुर्ग वैज्ञानिक और संत मां गंगा के लिए 111 दिनों तक तिल तिल गलता रहा, तब तक सत्ता उनके खाक हो जाने का इंतज़ार करती रही!
मांगें तो छोड़िए, उन्हें 111 दिनों में एक बार भी सुध लेने की फुर्सत नहीं मिली जो सीधे 'मां गंगा' के बुलावे पर आए थे।
लेकिन जैसे ही आख़िरी सांस थमी, सिस्टम की उंगलियां कीबोर्ड पर तड़तड़ाने लगीं। जो काम ज़िंदा रहते मुलाकात या एक मजबूत फ़ैसले से हो सकता था, उसे मृत्यु के बाद सिर्फ़ 26 शब्दों में समेट दिया गया।
काश! प्रधानमंत्री जी ने ऐसे ही कोई 26 शब्द, जीडी अग्रवाल के पत्र के जवाब में लिख दिए होते तो शायद आज गंगापुत्र हमारे बीच होते!
#SonamWangchuk
@Wangchuk66
मध्यप्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा विनाशकारी परियोजना के खिलाफ आदिवासियों का कई महीनों से बड़ा आंदोलन चल रहा है लेकिन अभी तक सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही हैं !