राजनीतिक पार्टियों के समर्थन या विरोध के पहले अपनी व्यस्त ज़िन्दगी से कुछ समय निकालिए और एक एक दिन सरकारी अस्पताल , कचहरी , थाना और सरकारी स्कूल में बिताइए .. आपको राजनीति क्या लोकतंत्र तक से नफरत हो जाएगी !!
दुनिया के सफल लोग इन्हीं 10 नियमों पर चलते हैं। स्मार्ट बनो, मेहनती नही।
1. 80/20 नियम - 20% सही काम, 80% परिणाम देते हैं।
2. मर्फी नियम - जो गलत हो सकता है, वह कभी न कभी गलत होगा; इसलिए हमेशा तैयारी रखो।
3. किडलिन नियम - समस्या को लिख दो, आधी समस्या वहीं हल हो जाती है।
4. पार्किन्सन नियम - काम उतना ही फैलता है, जितना समय उसे दिया जाता है।
5. आइज़नहावर नियम - जरूरी और महत्वपूर्ण काम में अंतर समझो।
6. विल्सन नियम - ज्ञान पर ध्यान दो, पैसा उसका परिणाम बनकर आएगा।
7. फॉकलैंड नियम - जब निर्णय लेना जरूरी न हो, तब निर्णय मत लो।
8. ऑकहम का नियम - सबसे सरल समाधान अक्सर सबसे सही होता है।
9. डनिंग-क्रूगर नियम - कम ज्ञान वाले अक्सर खुद को सबसे अधिक योग्य समझते हैं; सीखते रहो।
10. ज़ाइगार्निक नियम - अधूरे काम दिमाग में सबसे ज़्यादा जगह घेरते हैं; शुरू किए काम पूरे करो।
नैतिक व्यवस्था वह नहीं जिसमें हर व्यक्ति ईमानदार हो; बल्कि वह है जिसमें बेईमान व्यक्ति के लिए बेईमानी करना कठिन हो।
मछली पानी पी रही है या नहीं, यह पकड़ना कठिन है। समस्या मछली की प्यास से अधिक उस व्यवस्था की है जिसने उसे बिना निगरानी पानी पीने की शक्ति दे दी।
भ्रष्टाचार रोकने के लिए कौटिल्य के अर्थशास्त्र और आधुनिक प्रशासनिक नैतिकता से लिये हुए कुछ उपाय:
1. पारदर्शिता
2. पैसों की निगरानी
3. स्वतंत्र जाँच
4. भ्रष्टाचार की निश्चित पहचान
5. त्वरित सज़ा
6. शिकायतकर्ता की सुरक्षा
7. हितों का टकराव रोकना
8. अधिकारियों का समय-समय पर स्थानांतरण
9. नियमों को सरल बनाना
10. नैतिक शिक्षा और सही प्रोत्साहन
मिलिए बाड़मेर निवासी परसा राम जी से..
जिन्होंने दुनिया को बताया कि अगर हौसले बुलंद हों, तो शरीर की कमजोरी भी कोई मायने नहीं रखती।
वह अपने दोनों हाथ न होने के बावजूद शानदार तरीके से वॉलीबॉल खेलते हैं।
यह वीडियो हम सभी के लिए एक बड़ी #प्रेरणा है। ❤️🫡
यह कोई साधारण घटना नहीं है। इतिहास को शर्मसार करने वाला लम्हा है।
यह वह क्षण है जब इतिहास ने अपनी आँखें फेर लीं और अंतरराष्ट्रीय क़ानून ने ज़मीन पर गिरकर चुप्पी ओढ़ ली। यह गिरफ्तारी नहीं है। यह एक औपनिवेशिक छापा है, जो रात के सन्नाटे में नहीं, दिन-दहाड़े, कैमरों और सुर्ख़ियों के उजाले में अंजाम दिया गया।
एक संप्रभु देश का राष्ट्रपति अपने ही घर में, अपने ही बेडरूम में—पत्नी के साथ खींचकर बाहर निकाला जाता है। यह दृश्य किसी लोकतांत्रिक न्यायालय का नहीं, किसी साम्राज्यवादी विजय-उत्सव का है। जैसे सत्ता ने कहा हो: तुम्हारा चुनाव, तुम्हारी जनता, तुम्हारी ज़मीन—सब तभी तक मान्य हैं, जब तक वे हमें पसंद हैं।
संयुक्त राष्ट्र का चार्टर कहीं दूर किसी अलमारी में पड़ा रह जाता है। उसका अनुच्छेद संप्रभु समानता की बात करता है, मगर यहाँ समानता नहीं, केवल ताक़त बोल रही है। क़ानून नहीं चलता, टैंक चलते हैं; न्याय नहीं चलता, हवाई जहाज़ चलते हैं। न्यूयॉर्क की ओर उड़ान भरता यह अपमान केवल एक व्यक्ति को नहीं, एक पूरी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बंधक बनाकर ले जाता है।
यह ‘कानून का राज’ नहीं है। यह शक्ति का राज है। वह शक्ति जो तय करती है कि कौन लोकतांत्रिक है और कौन तानाशाह; कौन मित्र है और कौन अपराधी। वही शक्ति जो कुछ देशों में राजशाही को स्थिरता कहती है और कुछ देशों में चुनी हुई सरकारों को अपराध। लोकतंत्र यहाँ एक शब्द नहीं, एक बहाना है, जिसे भू-राजनीति की ज़रूरत के हिसाब से मोड़ा जाता है।
आज वेनेज़ुएला है। कल कोई और होगा। जब किसी एक देश को यह अधिकार दे दिया जाए कि वह दूसरे देश के राष्ट्रपति को उठा ले तो दुनिया राष्ट्रों का समाज नहीं रहती। वह गिरोहों का मैदान बन जाती है। तब संयुक्त राष्ट्र केवल एक इमारत होता है, क़ानून केवल एक किताब और न्याय केवल भाषणों की सजावट।
सबसे शर्मनाक यह नहीं कि यह हुआ। सबसे शर्मनाक यह है कि यह खुलेआम हुआ। बिना झिझक, बिना शर्म, बिना किसी अंतरराष्ट्रीय सहमति के। जैसे इतिहास से कहा गया हो: देखो, हम कर सकते हैं।
और इतिहास देख रहा है चुपचाप, भारी मन से। यह दर्ज़ करते हुए कि इस दिन क़ानून चुप था, लोकतंत्र झुका हुआ था, और साम्राज्यवाद मुस्कुरा रहा था।
यदि यही न्याय है तो अराजकता को स्वीकार कर लेना ज़्यादा ईमानदार होगा। क्योंकि न्याय वही होता है, जो सब पर लागू हो—
वरना वह न्याय नहीं, सिर्फ़ ताक़त की कविता है, जिसे बंदूक की स्याही से लिखा गया है। गुंडों के भी कुछ उसूल होते हैं; लेकिन यहाँ तो वह भी नहीं है।
#Venezuela #venezuelalibre #venezuelainvasion
हम सोचते हैं कि हम जीवन को नियंत्रित कर सकते हैं।लेकिन चाहे हम कितनी भी कोशिश कर लें, चीज़ें अक्सर हमारी योजना के अनुसार नहीं चलतीं।
नियंत्रण एक भ्रम है। जीवन की अनिश्चितता से लड़ना केवल तनाव पैदा करता है। जितना अधिक हम पकड़ने की कोशिश करते हैं, उतना ही अधिक हम दुखी होते हैं।
जब हम हर चीज़ को नियंत्रित करने की कोशिश छोड़ देते हैं,तो हम स्वयं को मुक्त कर लेते हैं। फिर हमारा ध्यान उन चीज़ों पर जाता है जिन्हें हम बदल सकते हैं अपने कर्म, अपनी सोच और अपनी प्रतिक्रियाएँ। जीवन को नियंत्रित करने की ज़रूरत नहीं है।जीवन पर भरोसा करने की ज़रूरत है।
जितना कम आप नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं,उतना ही अधिक आप प्रवाह में आते हैं। जीवन को आपको मार्गदर्शन करने दीजिए।
बस अपना कर्म करते रहिए वाकी सब गॉड्स प्लान पर छोड़ दीजिए। चिंता करोगे तो दिल की बीमारी बढ़ेगी और जल्दी इस दुनिया से प्रस्थान हो जाओगे इसीलिए जब तक यहां हो खुशी और आनंद के साथ जीयो।
त्याग का अभ्यास कर लो..
मोह का असर ख़त्म हो जाएगा !
जीवन यात्रा... 🚶♂️