नेताओ को कम॔चारी की माग को सरकार के सामने रखना चाहिए, जब विश्वास घात होगा तो कम॔चारी करेक्ट काय॔कृम तो करेगा
मिश्राजी खुद पुराणी पेन्शन लेते है ,कम॔चारी को युपीएस पेन्शन कैसे मान्य करते है आक्रोश तो होगा
एक मिशन पुरानी पेंशन यानी #OPS के अभियान #नेशनलमिशनफॉरओल्डपेंशनस्कीम (भारत) की आवाज को माननीय प्रधानमंत्री जी तक पहुंचाने के लिए एक बार फिर #AINPSEF और #IRMOPS कल सुबह 7.00 बजे से फेसबुक और ट्विटर (X) पर सेल्फी वार कैंपेन #wewantOPS चलाएंगे। देशभर के सभी #NPS कर्मचारियों से अपील
रेलवे के हजारों लाखों कर्मचारियों का NPS/UPS के विरोध में मशाल जुलूस निकाला प्रधानमंत्री जी के संसदीय क्षेत्र में ATEWA और रेलवे के साथियों का संयुक्त प्रदर्शन ।
#NoNPS_NoUPS_OnlyOPS@vijaykbandhu@ImranSyedDanis1
OPS: पुरानी पेंशन बहाली की मांग पर हल्लाबोल, 26 तारीख को देशभर में NPS/UPS के खिलाफ गजरेंगे सरकारी कर्मचारी
#ops#nps#ups#modigovt
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एक मिशन पुरानी पेंशन यानी #OPS के अभियान #नेशनलमिशनफॉरओल्डपेंशनस्कीम (भारत) की आवाज को माननीय प्रधानमंत्री जी तक पहुंचाने के लिए एक बार फिर #AINPSEF और #IRMOPS कल सुबह 7.00 बजे से फेसबुक और ट्विटर (X) पर सेल्फी वार कैंपेन #wewantOPS चलाएंगे। देशभर के सभी #NPS कर्मचारियों से अपील है कि कल सुबह एक बार फिर से अपनी आवाज को सशक्त करें और मुहिम को सफल बनाएं। #ManjeetSinghPatel
#Haryana में विधानसभा चुनाव से एक महीना पहले #OPS_पुरानी_पेंशन की माँग को लेकर सरकारी कर्मियों का यह जोश कुछ इशारा कर रहा है। रविवार को #Hisar में सरकारी कर्मचारियों का सैलाब, केंद्र और प्रदेश सरकार के लिए साफ संदेश है। मतलब, #OPS_बहाल_करो का मुद्दा, चुनाव में असर दिखा सकता है।
दिन में 3 बार कपड़े बदलने वाले, ₹9 लाख का सूट पहनने वाले और ₹1.5 लाख की कलम से लिखने वाले मोदी जी के लिए OBC का मतलब है - ‘Only Business Class’
ये वंचितों के साथ न्याय कभी नहीं कर सकते।
कागज़ी और चुनावी OBC अपने दिन गिनें, जातिगत गिनती हम कराएंगे।
प्रधानमंत्री इस बीच अक्सर कह रहे थे देश में सिर्फ दो जातियां हैं - अमीर और गरीब, मगर आज संसद में उन्होंने खुद को ‘सबसे बड़ा OBC’ बताया।
किसी को छोटा और किसी को बड़ा समझने की इस मानसिकता को बदलना ज़रूरी है।
OBC हों, दलित हों या आदिवासी, बिना गिनती के उन्हें आर्थिक और सामाजिक न्याय नहीं दिलाया जा सकता।
मोदी जी इधर उधर की इतनी बातें करते हैं, तो गिनती से क्यों डरते हैं?