शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन आज नए चरण में प्रवेश कर गया है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने रविवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने का ऐलान किया है।
बताया जा रहा है कि उनके साथ ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के कई छात्र नेता भी अनशन पर बैठेंगे। वहीं, देशभर के 650 से अधिक किसान संगठनों ने भी आंदोलन को समर्थन देते हुए दिल्ली में बड़ी खाप पंचायत बुलाने की घोषणा की है। ऐसे में छात्र, किसान और सामाजिक संगठनों के एक मंच पर आने से आंदोलन के और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
पहले NEET का पेपर लीक, फिर CBSE के मार्किंग सिस्टम में गड़बड़ी और अब महाराष्ट्र TET का पेपर लीक होना दर्शाता है कि भाजपा सरकार देश की शिक्षा व्यवस्था को सम्भालने में नाकाम साबित हो रही है।
भाजपा सरकार में अब तक 90 से ज़्यादा पेपर लीक हो चुके हैं, मगर कार्रवाई के नाम पर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। केंद्र सरकार को छात्रों की गूँज को हल्के में नहीं लेना चाहिए। आज देश का हर युवा इस पेपर लीक वाली व्यवस्था से त्रस्त है और सड़कों पर उतरा हुआ है। सरकार को निर्णायक फ़ैसला लेना ही पड़ेगा, वरना युवाओं का आक्रोश सरकार सहन नहीं कर पाएगी…
@kharge@RahulGandhi@priyankagandhi@INCIndia
युवाओं, जागो!!! जब तक अपनी आवाज़ बुलंद नहीं करोगे, तब तक तुम्हारे भविष्य के साथ यही आतंक चलता रहेगा। एक बार फिर से तुम्हारे साथ धोखा हुआ है। महाराष्ट्र में TET का पेपर लीक हो गया और परीक्षा टल गई।
NEET, CBSE, SSC, CUET और अब TET... यह सिलसिला बंद तभी होगा जब आंदोलन खड़ा करके अपनी ताक़त दिखाओगे। जब तक ऐसा नहीं होगा, तब तक भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री जी की तुम्हारे प्रति कोई जवाबदेही नहीं बनेगी। न वे परीक्षाओं में भ्रष्टाचार पर लगाम लगायेंगे, न तुम्हारे भविष्य की ज़िम्मेदारी लेंगे।
कुछ ज़ख्म शरीर पर नहीं, भविष्य पर लगते हैं।
कुछ दर्द शब्दों में नहीं समाते, बस आँखों से बह निकलते हैं।
please listen- लाखों सपनों की चीख है, टूटते हुए सपनों की गवाही है,एक पीढ़ी की पीड़ा है।
सत्ता के अहंकार में डूबी मोदी सरकार अब इस मुकाम पर पहुँच गई है कि अपने अधिकारों, निष्पक्ष परीक्षाओं और सुरक्षित भविष्य की मांग करने वाले छात्रों को ही शिक्षा मंत्री “आतंकवादी” कह रहे हैं।
ज़रा सोचिए - जिसकी नाकामी से इतने पेपर लीक हुए, जिसके राज में 20 बच्चों ने जान दे दी, जिसने करोड़ों युवाओं का भविष्य अंधेरे में धकेल दिया - वो आज पीड़ित बच्चों और उनकी आवाज़ उठाने वालों को “दहशतगर्द” बता रहा है।
पर यह कोई नई बात नहीं: अन्नदाता किसानों को "आंदोलनजीवी और परजीवी" कहा। सवाल पूछने वाले को “Anti-National” कहा। और अब युवाओं को “दहशतगर्द।”
जो भी सरकार से सवाल पूछे - उसे देशद्रोही बता दो, यही इनकी पूरी राजनीति है।
धर्मेंद्र प्रधान जी, देश के करोड़ों युवाओं से तुरंत माफ़ी माँगिए और अपनी नाकामियों के लिए इस्तीफ़ा दीजिए।
और रही मेरी बात - आप मुझ पर जितने चाहें हमले कर लीजिए। मैंने कोटा में कहा था, और फिर कहता हूँ: यह शिक्षा व्यवस्था आज सिर्फ़ एक वसूली तंत्र बन गई है। मैं इसे ऐसे ही नहीं रहने दूँगा।
हर बच्चे को सस्ती, अच्छी शिक्षा और निष्पक्ष परीक्षा मिले - इस आवाज़ को उठाना मैं कभी बंद नहीं करूँगा।
#ChhatronKiGoonj
#ChhatraJodo
90 पेपर लीक हुए हैं, करोड़ों छात्रों का भविष्य बरबाद हुआ है, 20 बच्चों ने NEET Paper Leak की वजह से अपनी जान ले ली, परिवार तबाह हो गए…
पर मोदी सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान कुर्सी पर चिपककर, इंटरव्यू देते हुए “छात्रों की गूँज” को “दहशतगर्द” (Terrorists) बता रहे हैं।
देश ये भूला नहीं है कि खुद प्रधानमंत्री मोदी जी ने भरी संसद में अन्नदाता किसानों को “आंदोलनजीवी” और “परजीवी” (Parasites) की अपमानजनक संज्ञा दी थी। जो इस सरकार से सवाल पूछता है, उसको देशद्रोही (Anti-National) बोलते हैं।
#ChhatronKiGoonj पूरे देश में बुलंद होगी,
मोदी मंत्री प्रधान को इस्तीफ़ा देना ही पड़ेगा !!
अगर आपने पेपर लीक, परीक्षा में धांधली, या महँगी fees का दर्द झेला है
अगर इस व्यवस्था ने आपके सपने तोड़े हैं
अगर आपके परिवार ने आपकी पढ़ाई के लिए जीवनभर की कमाई लगा दी है
तो सुनिए: ‘छात्रों की गूंज’ आपकी आवाज़ है।
यह सिर्फ़ एक अभियान नहीं, यह आपकी मांग को सरकार तक पहुँचाने का ज़रिया है। सस्ती शिक्षा। निष्पक्ष परीक्षा। सम्मानजनक रोज़गार।
और इसमें जुड़ना सिर्फ़ 30 सेकंड का काम है:
1️⃣ नीचे दिए लिंक पर जाइए
2️⃣ अपना नाम भरिए, अपने सुझाव दीजिए
3️⃣ पिटिशन sign कीजिए - बस।
आपका एक हस्ताक्षर इस लड़ाई को ताक़त देगा। जितने ज़्यादा नाम, उतनी बुलंद गूंज।
👉 अभी sign कीजिए: https://t.co/g6mbw7X5XC
#ChhatronKiGoonj
पता है, भारत की सिर्फ़ 5 परीक्षाओं - NEET, JEE, SSC, UPSC और RRB की तैयारी पर छात्र और उनके परिवार हर साल कितना ख़र्च करते हैं?
₹3.5 लाख करोड़।
यानी भारत सरकार के पूरे शिक्षा बजट का लगभग तीन गुना। शिक्षा, स्वास्थ्य, श्रम, विज्ञान और महिला-बाल विकास - इन पाँच मंत्रालयों के कुल बजट के बराबर।
और बदले में करोड़ों युवाओं को क्या मिलता है? तनाव, अनिश्चितता, बेरोज़गारी, और टूटते सपने।
जो ख़र्च सरकार की ज़िम्मेदारी है, उसका बोझ आज परिवार उठा रहे हैं।
#ChhatronKiGoonj
'Telegram Ban’ - मोदी सरकार का पेपर लीक रोकने का नया नुस्खा।
यानी चोर को पकड़ने के बजाय, पीड़ित के घर पर ताला लटका दो।
लाखों छात्र सालों से Telegram पर पढ़ते हैं - नोट्स, टेस्ट सीरीज़, डिस्कशन, तैयारी। वो सुविधा छीन लेना पेपर लीक का समाधान कैसे हुआ?
और यह फूलप्रूफ भी नहीं है - यह देश का हर छात्र जानता है, और पेपर लीक माफ़िया भी। फिर अगला ban किसपर लगाएंगे? WhatsApp?
परीक्षा के दिन छात्रों की तलाशी होगी। जेबें कैंची से काटी जाएँगी। प्रश्नपत्र वायुसेना से भेजे जाएँगे। दिखावे की कोई कमी नहीं होगी।
पर बीमारी की जड़ पर एक वार भी नहीं - क्योंकि पेपर लीक माफ़िया इसी सरकार की देख-रेख में फल-फूल रहा है, और युवाओं को खून के आँसू रुला रहा है।
मोदी जी - दिखावा छोड़िए। माफ़िया पर वार कीजिए, छात्र पर नहीं।
‘छात्रों की गूंज’ सुन लीजिए - वरना देश का युवा अपना हक़ लेना जानता है।
#ChhatronKiGoonj
इतिहास मे पहली बार हुआ है जो काले अध्याय मे लिखा जायेगा कि बंगाल मे 27 लाख वोट कट गए वो वोट नही दे पाए और #सुप्रीम_कोर्ट कह रहा है कोई बात नही अगली बार वोट दे देंगे जो संविधान के अंदर हमारा मूलभूत अधिकार है उसकी धज्जियां उडा दी तो आप सोच सकते हो देश किस दिशा मे जा रहा है
- अशोक गहलोत (पूर्व मुख्यमंत्री राजस्थान)
अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की हत्या के चंद दिन बाद - न अफ़सोस, न माफ़ी। उल्टा, अमेरिका ने आदेश देना जारी रखा है।
उनके शब्द पढ़िए: “अमेरिकी सेना के आदेश तुरंत मानें।” कोई उल्लंघन “बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
एक आज़ाद देश इस तरह की भाषा कभी नहीं सहेगा। लेकिन हमारे Compromised PM? चुप। एक आज्ञाकारी नौकर की तरह सुनते हैं, और आदेश मान लेते हैं।
Compromised PM देश के सम्मान की रक्षा नहीं करेगा - क्योंकि जो देश का अपमान करते हैं, वो उन्हीं के वश में हैं।
अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की हत्या के बाद मोदी सरकार का मौन शर्मनाक है। अमेरिका इन हत्याओं पर अफसोस जताने और माफी मांगने की जगह धमकी और आदेश की भाषा इस्तेमाल कर रहा है।
अमेरिका को सख्ती से यह बताने की जरूरत है कि भारत एक संप्रभु और स्वतंत्र देश है जो अपनी संप्रभुता की रक्षा करना जानता है। लेकिन हमारे Compromised प्रधानमंत्री न देशवासियों की सुरक्षा कर पा रहे हैं, न ही देश की संप्रभुता की।
अन्तर्राष्ट्रीय जल में तीन दिन में तीन जहाज़ों पर अमेरिकी हमलों में तीन भारतीयों की मृत्यु हो गई। और हमारे Compromised PM? एक शब्द तक नहीं।
जब कोई विदेशी ताकत किसी भारतीय की हत्या करे, तो प्रधानमंत्री को बोलना पड़ता है। लेकिन मजाल है जो ये एक शब्द बोल जाएं।
अगले हफ्ते G7 में, हमारे नाविकों की हत्या के बस चंद दिनों बाद, मोदी जी मुस्कुराएंगे, गले मिलेंगे और समझौते करेंगे - मगर, उन तीन भारतीयों के लिए उनके पास एक शब्द भी नहीं होगा।
Compromised PM भारत माता के बेटों की रक्षा नहीं कर सकते, क्योंकि जिन्होंने उन बेटों की जान ली उन्हें नाराज़ करने की इनमें न हिम्मत है, न ताकत।
नेहरू के समय PR नहीं था, लोगों का mind hijack नहीं होता था, freebies का लालच नहीं था|
freebies का स्वरूप अलग था।आज की तरह सीधे खाते में पैसे, मुफ्त बिजली या गैस जैसी योजनाएं कम थीं|
नेहरू के दौर में सोशल मीडिया, 24×7 न्यूज़ चैनल और डिजिटल प्रचार नहीं था|
नेहरू के सामने क्या था? (1947–1964)
देश अभी-अभी आज़ाद हुआ था।
साक्षरता लगभग 18% थी।
औसत आयु करीब 32 वर्ष।
उद्योग नगण्य, विदेशी मुद्रा कम।
विभाजन, शरणार्थी संकट, रियासतों का एकीकरण।
सड़क, बिजली, विश्वविद्यालय, वैज्ञानिक संस्थान लगभग शून्य से बनाने थे।
इसलिए नेहरू ने:
IIT, AIIMS, बड़े बांध, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग, वैज्ञानिक संस्थानों पर ज़ोर दिया।
एक औद्योगिक आधार खड़ा करने की कोशिश की।
मोदी के सामने क्या था? (2014–वर्तमान)
दुनिया की सबसे तेज़ इंटरनेट क्रांतियों में से एक।
बड़ा घरेलू बाज़ार।
मजबूत निजी क्षेत्र।
वैश्विक निवेश आकर्षित करने की क्षमता।
युवा आबादी (Demographic Dividend)।
पहले से स्थापित संस्थान और बुनियादी ढांचा।
इसलिए सवाल यह नहीं कि मोदी ने नेहरू से बेहतर किया या नहीं।
सवाल यह है कि 2025-26 में भारत को और क्या करना चाहिए था या कर सकता है?
नेहरू ने भारत की नींव रखी।
आज की सरकारों का काम उस नींव पर दुनिया की सबसे मजबूत इमारत खड़ी करना था।
2026 में बहस यह नहीं होनी चाहिए कि नेहरू बनाम मोदी कौन बेहतर था।
बहस यह होनी चाहिए कि भारत शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, न्याय और शोध में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ देशों के बराबर क्यों नहीं पहुंच पाया।
हम विकसित भारत का सपना देख रहे हैं- किसी भी विकसित राष्ट्र की नींव दो स्तंभों पर खड़ी होती है - शिक्षा और स्वास्थ्य।
यदि शिक्षा की मौजूदा स्थिति आप सब देख रहे हैं, CBSE से लेकर NEET leak तक- इससे देश का भविष्य खोखला हो ही रहा है।
स्वास्थ्य व्यवस्था अपने बदतर हालात में है- वहाँ भी इलाज नहीं, उद्योग चल रहा है।
अगर स्वास्थ्य व्यवस्था में दवाओं, उपकरणों और मरीजों के नाम पर ऐसे घोटालों के आरोप सामने आते रहेंगे, तो विकसित भारत का सपना कैसे पूरा होगा?
विकसित बनाने का रास्ता अस्पतालों और स्कूलों से होकर जाता है।
हमारा यही सब कमजोर होता जा रहा है... कैसा खोखला समाज बना रहे हैं?
हम आने वाली पीढ़ियों के लिए कैसा भारत छोड़कर जा रहे हैं?
शिक्षा कमजोर, स्वास्थ्य बदहाल... विकास की दौड़ में हम समाज की आत्मा हीं खो दे रहे?
डॉलर के मुकाबले भारत का रुपया एशिया में सबसे तेजी से गिर रहा है। पिछले 5 महीने में 6% से ज्यादा टूटा। जबकि इसी दौरान पाकिस्तानी रुपया 0.5% और चीनी युआन तो 3% मजबूत हो गया।
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