🚨 Faculty Recruitment Opportunity at IIT (ISM) Dhanbad 🚨
The Indian Institute of Technology (Indian School of Mines), Dhanbad has announced a major recruitment drive for Associate Professor and Professor positions across 17 academic departments, inviting applications from distinguished academicians and researchers in India and abroad.
📌 Key Highlights: 🔹 60 faculty positions available across diverse disciplines.
🔹 Open to Indian Nationals, PIOs, OCIs, and Foreign Nationals.
🔹 Opportunities in Engineering, Sciences, Management, Mathematics, Computer Science, and Humanities & Social Sciences, among others.
🗓️ Application Deadline: 30 September 2026.
IIT (ISM) Dhanbad continues to strengthen its commitment to excellence in teaching, research, innovation, and interdisciplinary collaboration. If you are passionate about advancing knowledge and mentoring the next generation of scholars, this is an excellent opportunity to become part of one of India's premier institutions.
Please share this opportunity with colleagues, mentors, researchers, and academic networks who may be interested.
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Link : notice_6a43ea6bc5ec11782835819.pdf https://t.co/Q0FELHIzIR
के अंतर्गत है जिसके समस्या के समाधान के लिए माननीय सांसदों द्वारा आवाज भी नहीं उठाया जाता, वैसे भी NDA के डबल इंजन सरकार में गैर जिम्मेदार, आत्ममुग्धता के शिकार बिहार के सांसद और केंद्रीय मंत्री को जनता से कोई सरोकार रह नहीं गया। @ajeetbharti@AnupamNawada@manojkumarmukul
माननीय रेल अधिकारियों,
क्या आप लोगों में यात्रियों के प्रति कर्तव्यबोध और संवेदनशीलतबचा बचा है? @GM_ECRly@drmdnr@RailMinIndia
पटना–रांची वंदे भारत एक्सप्रेस के संचालन शुरू होने के बाद से पटना–गया पैसेंजर ट्रेन (63241) नियमित रूप से विलंबित चल रही है। पटना से गया तक की यात्रा,
वैसे भी पटना गया रेल खंड में ट्रेनों का परिचालन एवं समयावधि की समस्या लंबे से बनीं हुई हैं। यह रेल खंड चार लोकसभा क्षेत्र 4 लोकसभा क्षेत्र क्रमशः पटना साहिब @rsprasad, पाटलिपुत्र @misabharti , जहानाबाद डॉ सुरेंद्र यादव(rjd)
और गया @jitanrmanjhi
Think India Club organized an interactive session on Indian Knowledge Tradition for research scholars, highlighting the role of Bharatiya Knowledge Systems in academic and interdisciplinary research. The session was graced by Mr. Dayanidhi Urmaliya at IIT(ISM).
@idayanidhi
बंगाल में जीत के पीछे एक गुमनाम चेहरे की भी बात हो जाए….
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि पूर्व राष्ट्रपति स्व. प्रणब दा को 2018 में आरएसएस के नागपुर कार्यक्रम में जाने के लिए राज़ी करने के पीछे संघ के एक गुमनाम मगर धुरंधर प्रचारक हैं। नाम है- रामचंद्र पांडेय। बंगाल से आने वाले कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरे प्रणव दा के नागपुर जाने की घटना ने बंगाली भद्रलोक में संघ और भाजपा के प्रति भरोसा भर दिया। बंगाल में बीजेपी की जीत के यूँ तो बहुत से सूत्रधार हैं। फ़्रंट पर कार्य करने वालों को दुनिया जानती है, किंतु पांडेय जी का नाम पहले भी गुमनाम था, आज भी गुमनाम है। मौजूदा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को मिर्जापुर में आरएसएस का जिला कार्यवाह बनाकर पहली बार संगठन सिस्टम में सक्रिय करने वाले रामचंद्र जी हैं। अब बात बंगाल में उनके योगदान की।
2016 विधानसभा चुनाव के बाद आरएसएस ने अपने इस धुरंधर प्रचारक का केंद्र कोलकाता बनाकर उन्हें पूरे राज्य में संगठन को चुस्त-दुरुस्त रखने की कमान सौंपी। यह रामचंद्र पांडेय थे, जिन्होंने सिलिगुड़ी से लेकर बर्दवान, आसनसोल तक, कोलकाता के गली-कूचों से लेकर मुर्शिदाबाद, मालदा तक आम लोगों में छिपे बीजेपी और संघ कार्यकर्ताओं की कड़ियों को जोड़ना शुरु किया। कांग्रेस, टीएमसी और लेफ्ट के उन लोगों से संपर्क साधा जो बंगाल की दुर्दशा से अपने संगठनों में अंसतुष्ट थे। टीएमसी में सबसे मुखर सुवेंदु अधिकारी से लेकर प्रणब दा के संपर्क-सूत्र मनोज कुमार तक रामचंद्र पांडेय ने अपनी तीक्ष्ण बुद्धि का इस्तेमाल किया, और यहां तक कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब दा को आरएसएस के नागपुर कार्यक्रम तक पहुंचा कर बंगाली भद्रलोक और कांग्रेस के काडर में आरएसएस और बीजेपी के प्रति हर तरह के भरोसे और आश्वस्ति से भर दिया। उसी समय भविष्य के बंगाल की इबारत वस्तुतः रामचंद्र पांडेय के संपर्कों ने रच दी थी।
यह सारा कार्य रामचंद्र पांडेय के संपर्क सूत्रों से आरएसएस के नागपुर केंद्र ने साकार कर दिखाया।
रामचंद्र पांडेय कोई साधारण नाम नहीं है। 1967 में जब मोदीजी ने प्रचारक जीवन शुरु किया, उसी समय रामचंद्र पांडेय ने उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के अपने गांव को अलविदा कह दिया। वह प्रो. राजेंद्र सिंह के संपर्क में आए और फिर आरएसएस के होकर रह गए। 1967 से 2000 तक रामचंद्र पांडेय ने 33 साल अपनी जवानी पूर्वी यूपी से लेकर अवध, बुंदेलखंड आदि इलाकों में आरएसएस को मजबूत करने में खपा दी। बीजेपी के अनेक संगठन महामंत्री रामचंद्र पांडेय के द्वारा प्रशिक्षित हैं।
रामचंद्र जी आज भी गुमनाम तरीके से रहते हैं। दो जोड़ी कपड़ों में वह अपना साल गुजार देते हैं। उनकी साधारण चप्पल और निरंतर चलते रहने की उनकी इच्छाशक्ति ने उन्हें आरएसएस के सभी प्रचारकों में सबसे जमीनी स्तर पर खड़ा किया है। कोलकाता का कोई गली-कूचा नहीं, किसी आरएसएस और पुराने बीजेपी कार्यकर्ता का घर नहीं, जहां रामचंद्र पांडेय ने प्रवास न किया और बैठकी नहीं लगाई। उनके साथ इस कार्य में आरएसएस के युवा प्रचारकों की पूरी टोली दिन-रात संपर्क में जुटी रही। आरएसएस की घोषवादकों की टीम के वह पूरे देश के मार्गदर्शक संचारक हैं। और तो और, उत्तर प्रदेश के अवध, गोरखपुर, काशी, बुंदेलखंड के इलाकों में अधिकांश आरएसएस कार्यकर्ताओं के निर्माण में यदि सबसे ज्यादा सक्रिय भूमिका किसी ने निभाई तो 1967 से 2000 के मध्य रामचंद्र पांडेय ने निभाई।
सूत्र बताते हैं कि बीजेपी में नेताओं के चयन से लेकर टिकट बंटवारे तक में युवाओं को चुन चुनकर रामचंद्र पांडेय ने आगे किया और केंद्रीय नेतृत्व को सही सूचनाएं दीं। बीते 10 साल में रामचंद्र पांडेय ने पश्चिम बंगाल की जमीन के चप्पे चप्पे को छान मारा। बदलाव की बयार ऐसे ही आरएसएस कार्यकर्ताओं के बूते भी बीजेपी ने बंगाल में खडी की है।
गृह मंत्री @AmitShah ने हम तीन पत्रकारों को पुडुचेरी में ऑफ द रिकॉर्ड में कहा था की ममता बनर्जी भवानीपुर से चुनाव हार जाएंगी। ममता को दो जगहों से चुनाव लड़ना चाहिए था।
यही बात कोलकाता में कई पत्रकारों के सामने भी उन्होंने दोहराया था। जहां मैं भी मौजूद था।
उस समय शायद पूर्ण भरोसा न रहा हो अधिकतर पत्रकारों को। लेकिन आज @SuvenduWB ने ममता बनर्जी को भवानीपुर में हरा दिया।
इसीलिए @AmitShahOffice को राजनीति का चाणक्य कहा जाता है!
बारह साल पहले ममता बनर्जी ने पूछा था कौन है अमित शाह?
तब शाह ने कोलकाता में एक बड़ी रैली में बताया था कि वे कौन हैं और एक दिन तृणमूल को बंगाल की धरती से उखाड़ फेंकेंगे।
रुबिका जी, याद कीजिए बिहार को! बैलट बॉक्स में इंक, आग लगा देना, डब्बों को नदी में फेंक देना, लूट कर भाग जाना! ऐसे ही खुली धमकियाँ दी जाती थीं जो आज अभिषेक और ममता, जहाँगीर और ऋजु दत्ता दे रहे हैं। लोग भय के कारण वोट देने ही नहीं जाते थे। 42-45% मतदान होता था।
एक चुनाव आयुक्त आया, सब बदल गया। मुझे याद है हमारे बेगूसराय के SP गुप्तेश्वर पांडे हुआ करते थे। खुली जीप से हाथ में मेगा फ़ोन लिए, अपराधियों को सीधे गोली मारने की बात भी की, और मारा भी।
तब जाकर हमें उन दुरूह दिनों से मुक्ति मिली। वही हाल बंगाल में इस बार संभवतः हो रहा है। लोगों को भावनात्मक रूप से ये सुरक्षा बल बहुत सँभाल रहे हैं। एक वीडियो देखा जिसमें एक स्त्री केवल इसलिए रो पड़ी कि अब वो निर्भय हो कर वोट दे सकती थी।
यह दुर्भाग्य है कि एक स्त्री को, काली माता के घर में नेतृत्व दिया गया और उसने पूरे राज्य और बंगला संस्कृति का सत्यानाश कर दिया। एक समय औद्योगिक केंद्र रहने वाले बंगाल के कारखानों की दीवारों पर पेड़ उगा दिए इन वामपंथियों ने, और ममता उसे सींचती रही।
ॐ श्री महाकालेश्वराय नमः 🙏🏻
महादेव के पावन आशीर्वाद के साथ अंग्रेज़ी नव वर्ष 2026 का शुभारंभ।
आप सभी को नव वर्ष मंगलमय हो।
दिनांक 01 जनवरी 2026
श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग — भस्म आरती श्रृंगार दर्शन🙏🏻🙏🏻
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@AjitYadav260 वोटिंग परसेंटेज बिहार विधानसभा चुनाव 2005 (फरवरी)- 46.05 प्रतिशत, 2005 (अक्टूबर)- 45.85 प्रतिशत , 2010 में - 52.73 प्रतिशत मतलब 2005 से लगभग (6.88%) ~7% ज्यादा । नतीजा क्या था NDA (BJP +JDU) 206, RJD+ 25 सीट। तब लोजपा और राजद साथ चुनाव लड़ी थी।
@AjitYadav260 वोटिंग परसेंटेज बिहार विधानसभा चुनाव 2005 (फरवरी)- 46.05 प्रतिशत, 2005 (अक्टूबर)- 45.85 प्रतिशत , 2010 में - 52.73 प्रतिशत मतलब 2005 से लगभग (6.88%) ~7% ज्यादा । नतीजा क्या था NDA (BJP +JDU) 206, RJD+ 25 सीट। तब लोजपा और राजद साथ चुनाव लड़ी थी।