लालू प्रसाद यादव सिर्फ एक नेता नहीं, दलित, पिछड़े व आदिवासियों की आत्म-सम्मान की जीवित प्रतिमा हैं। जिनकी राजनीति ने लाखों को जुबान दी।
#LaluPrasadYadav#HappyBirthdayLaluJi
जिसने वर्षों तक पत्रकारिता को TRP, प्रोपेगेंडा और सत्ता के पक्ष-विपक्ष की लड़ाई में बदल दिया हो, उसे शिक्षकों को 'धंधेबाज' कहने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए।
शिक्षा में गलत लोग भी हैं।
लेकिन पत्रकारिता में भी हैं।
राजनीति में भी हैं।
व्यापार में भी हैं।
तो क्या कुछ गलत लोगों के कारण पूरे शिक्षक समाज को "दो कौड़ी का" कह दिया जाएगा?
anjana शिक्षक का सम्मान कमाने में वर्षों लगते हैं।
भर्तियाँ अटक रही थीं,
लाखों युवाओं की उम्र निकल रही थी,
तब आपके स्टूडियो की आवाज़ कहाँ थी?
शिक्षकों ने पैसे लेकर शिक्षा दी है।
लेकिन पैसे लेकर किसी राजनीतिक दल का प्रवक्ता बन जाना,
व्यवस्था की हर गलती पर पर्दा डालना,
और जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाना...
यह सिर्फ पत्रकारिता का पतन नहीं,
बल्कि अपने पेशे के साथ गद्दारी है।
शिक्षक फीस लेकर ज्ञान देता है,
मेहनत करवाता है,
बच्चे का भविष्य बनाता है
शिक्षकों ने पैसे लेकर पढ़ाया है,
देश के लाखों युवाओं को रोजगार तक पहुँचाया है।
लेकिन गलत को सही और सही को गलत साबित करने की कीमत लेकर काम करना,
समाज और लोकतंत्र दोनों के साथ विश्वासघात किसने किया ?
@Nonbeliever36 @Ashi220460 @Mrsinha This is perception created by media and bjp not reality.. Nitish RJD k Saath jb jb gye hai us samay v nitish ko pro islamist aur kiya kiya kaha gya tha