जो लोग कहते हैं गुरुकुल में पढ़ने वाले केवल पंडित,पुजारी ब्राह्मण,पुरोहित ही बन सकते हैं उन्हें विश्व के सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा संस्थानों में जाना चाहिए वहाँ उन्हें मुख्य द्वार पर ही चरक और सुश्रुत ऋषि की प्रतिमाएँ मिल जायेंगी !
त्वदन्यः पाणिभ्यामभयवरदो दैवतगण-
स्त्वमेका नैवासि प्रकटितवराभीत्यभिनया ।
भयात्त्रातुं दातुं फलमपि च वाञ्छासमधिकं
शरण्ये लोकानां तव हि चरणावेव निपुणौ ॥
हे शरणार्थियों को शरण देने वाली ! तुम्हें छोड़कर जितने दूसरे देवता हैं वे अपने हाथों से ही अभय और वरदान का काम लेते हैं, इसी से तो उन्होंने अपने हाथों में अभय और वरद मुद्रा धारण कर रखी है। तुम्हीं एक ऐसी हो जो इन दोनों ही मुद्राओं के धारण करने का स्वाँग नहीं रचतीं। रचने भी क्यों लगीं, तुम्हें इसकी आवश्यकता ही क्या है ? तुम्हारे दोनों चरण ही आश्रितों को सब प्रकार के भयों से मुक्त करने तथा उन्हें इच्छित फलसे अधिक देने में समर्थ हैं। तुम्हारे हाथ सदा शत्रु संहार के काम में ही लगे रहते हैं। भक्तों के लिये तो तुम्हारे चरण ही पर्याप्त हैं।
पीठ पर खंजर घोंपने वालों से अब कोई शिकायत नहीं,
हमने अपनों के चेहरे में भी कई अजनबी देखे हैं।
वक्त ने सिखा दिया कि हर मुस्कुराहट सच्ची नहीं होती,
कुछ लोग साथ चलकर भी पीठ पर खंजर छोड़ जाते हैं।
पीठ पर खंजर घोंपने वालों से अब कोई शिकायत नहीं,
हमने अपनों के चेहरे में भी कई अजनबी देखे हैं।
वक्त ने सिखा दिया कि हर मुस्कुराहट सच्ची नहीं होती,
कुछ लोग साथ चलकर भी पीठ पर खंजर छोड़ जाते हैं।
भाजपा परिवार के अभिवावक एवं हम सभी कार्यकर्ताओं के मार्गदर्शक, देश के पूर्व उप-प्रधानमंत्री, ‘भारत रत्न’ आदरणीय लालकृष्ण आडवाणी जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ।
बिनु विश्वास भगति नहीं, तेही बिनु द्रवहिं न राम।
राम-कृपा बिनु सपनेहुँ, जीव न लहि विश्राम॥ 🙏
भगवान् में सच्चे विश्वास के बिना मनुष्य को भगवद्भक्ति प्राप्त नहीं हो सकती और बिना भक्ति के भगवान् कृपा नहीं कर सकते। जब तक मनुष्य पर भगवान् की कृपा नहीं होती तब तक मनुष्य स्वप्न में भी सुख-शांति नहीं पा सकता।
रावण ने श्री राम को अपने कौन से 4 सपने बताए थे ?
आपको लंकापति रावण के उन सपनों के बारे में बताउंगी जिन्हें खुद राक्षस राज ने मरते समय श्री राम से साझा किया था। अगर रावण की आयु थोड़ी और लंबी होती तो .....
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