@arvindchotia हर छात्र नेता नकल से ही पास होता हैं।
यह सार्वत्रिक सत्य हैं।
पूनम भाटी को नकल में पकड़ने वाला महान व्यक्ति होगा।
बाकी छात्र नेताओं को नकल करते हुए कोई नहीं रोकता हैं।
देश आज उस सिद्धांतवादी, बेबाक और निडर नेता के निधन पर शोक में है, जिन्होंने कभी सत्ता के सामने झुकना नहीं सीखा।
ऐसे समय में पत्रकार कहलाने वाला दुर्ग सिंह राजपुरोहित जिस तरह की अमर्यादित और निम्नस्तरीय टिप्पणी कर रहा है, वह उसकी मानसिक दिवालियापन का प्रमाण है।
✍️ यह केवल एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और पत्रकारिता की गरिमा पर सीधा हमला है।
📢 दुर्ग सिंह राजपुरोहित को तत्काल माफी मांगनी चाहिए, अन्यथा यह समाज उन्हें पत्रकार नहीं, बल्कि संकुचित सोच और राजनीतिक चाटुकारिता के प्रतीक के रूप में याद रखेगा।
@ZeeNews@zeerajasthan_@BarmerDurg इस पर कार्यवाही करे
श्री धनराज चौधरी जी अधिवक्ता, श्री राकेश बेरड़ जी व्यवसायी व श्री नेमाराम कड़वासरा जी अधिवक्ता,आप सभी को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
आप सदैव स्वस्थ रहें ईश्वर आपको हमेशा स्वस्थ एवं सुखी जीवन प्रदान करें!
#HappyBirthdayWishes
@SangitaBishnoi_@jakharmukesh@deepakjat5@Mukeshbaitu@jakharmukesh कोई तुम्हें क्यों फोलो करेगा।
आप सोशल मीडिया पर क्या करते हैं।
सबका अलग अलग दृष्टिकोण होता हैं...उसी तरीके से अपना अकाउंट यूज करते हैं.
आपको टांग अड़ाने की क्या जरूरत हैं।
काफी लोग ऐसे भी हैं जो आपकी तरह दूसरे की बातों में नहीं उलझते हैं। सबका अलग दृष्टिकोण होता है
@alokrajRSSB जो सबका होता हैं वो किसी का नहीं होता है...
यह कहने की बातें हैं...
नॉर्मलाइजेशन ने प्रतियोगियों के हितों पर कुठाराघात ही किया है।
नोर्मेलाइजेशन में नौकरी किस्मत से तय होती हैं
1 अप्रैल 1989 को जब मैं विश्वविद्यालय में अध्ययनरत था तब पिताजी ने मुझे जीवन की पहली मोटरसाइकिल यामाह दिलाई थी जिसके नंबर थे RPK 99 थे,इस नंबर का मेरे जीवन में बहुत महत्व है,अपने विद्यार्थी जीवन की यादे हमेशा ताजा रहे और पिताजी का वो अनमोल तोहफा सदैव मेरे जीवन का अभिन्न अंग बना रहे इसलिए आज एक मोटरसाइकिल ली जिसके नंबर वो ही RPK 99 लूंगा क्योंकि इस नंबर के मायने मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
#RPK_99
सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की अनियमितता सबसे बड़ी कमजोरी हैं।
दूसरी कमी शैक्षणिक स्टाफ की कमी भी बड़ी चुनौती है।
तीसरी कमी सीनियर सेकेंडरी स्कूलों की बहुलता...
एक पंचायत में एक ही सीनियर विद्यालय होना चाहिए।
कहीं ऐसी सीनियर स्कूल्स हैं जिसे चार स्टाफ चला रहे हैं।
सोशल मीडिया पर सरकारी स्कूलों की इमेज खराब है पर क्यों है...?
बोला जाता है मास्टर पढ़ाते नहीं, बल्कि मैंने जाना है सरकारी स्कूल आने वाले बच्चों के माता-पिता के जब काम होता है तब वह बच्चे को ड्रॉप कर लेते हैं बहुत बार ऐसा होता है, समझाने के बाद निरंतरता का नियम नहीं अपनाएंगे🙄
सरकारी में पैसा नहीं लगता इस कारण सीरियस नहीं लेते, प्राइवेट में पैसे लगते हैं इस कारण ड्रॉप नहीं करते, क्योंकि मानव का स्वभाव है फ्री की कद्र नहीं होती, अब ऐसे बोला जाता है कि रेगुलर आने के लिए मोटिवेशन का दायित्व अध्यापक का बनता है, बहुत नजदीकी से देखा है मोटिवेशन के बाद भी बच्चे रेगुलर नहीं आते, पारिवारिक आर्थिक स्थिति के कारण माता-पिता पूरी साल रेगुलर नहीं भेजते बल्कि उनको बीजारी, निनाण, लावणी जैसे कार्य करवाते हैं, आप किसी भी स्कूल में जाकर देख सकते हो जो बच्चा हमेशा आता है वह पढ़ाई में कहीं कमजोर नहीं मिलेगा, हमारे जमाने में अध्यापक के पास गंगाराम होता था जिसके डर से आप और हम रेगुलर जाते थे। अब किसी को कुछ बोल नहीं सकते, सरकार ने भी पाबंदियां लगा दी, थोड़ा कुछ बोले तो परिजन लट्ठ लेकर आ जाते हैं,,,,
कुछ लोग बोलते हैं अध्यापक कंजूस होता है तो हर साल मुख्यमंत्री जी हजारों अध्यापकों को भामाशाह सम्मान से सम्मानित करते हैं इसलिए ऐसा कुछ नहीं है, खैर हर डिपार्टमेंट में पैसे सेविंग करने वाले मिल जाएंगे और सामाजिक कार्यों में भी लगाने वाले मिल जाएंगे। और हां, सरकारी महकमों में पहला ऐसा डिपार्टमेंट है जिसमें भ्रष्टाचार नाम की चीज जमीनी स्तर पर ना के बराबर मिलेगी।
खैर मुद्दा यह है कि सरकारी स्कूलों की हालत कैसे सुधार सकते हैं बच्चों को रेगुलर कैसे बुला सकते हैं,,, सरकार मिड डे मील के अलावा किसी अन्य योजना को धरातल पर कैसे उतार सकती है स्कूलों में, क्योंकि इसके अलावा बहुत कम योजनाएं धरातल पर नजर आती है, इस सबका जवाब 🙌 सब पढ़े लिखे युवा साथी जुड़े हैं अपने सुझाव जरूर लिखें 💘🙏
आपका @JATbera1
कभी बड़ी बहन बनकर भाइयों के साथ खड़ी रही तो कभी अच्छी दोस्त बनकर लेकिन मुझे उन लोगों से सिर्फ ....उनके द्वारा अपनी औकात ही बताई गई...कुछ लोग अपने रियल चेहरे के साथ लेट आते है लेकिन एक दिन आ ही जाते है और हमको भी अपनी वैल्यू बताकर चले जाते है..!!
खाली हाथ आए थे,खाली हाथ जाओगे बंदे
तो घमंड किस बात का..🙏