@alokrajRSSB आज के एग्जाम में टीचर्स ने atndets फील नहीं की बोला कि ऑफिस रूम में करेंगे तो आप सोचो अभी अटेंडेंस आफिस में फील करेंगे तो इसका क्या विश्वास है कि वहां वो omr नहीं फील करेंगे जवाब जरूर देना
@1stIndiaNews@RajGovOfficial@rituraj9999 *आज राजस्थान के समस्त विभागों के अधीनस्थ मंत्रालयिक कर्मचारी मुख्यमंत्री आवास पहुंच कर बजट घोषणा के क्रम में मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी पदोन्नति हेतु 2 वर्ष की छूट की प्रेस विज्ञप्ति में पिछले 3 वर्ष में छूट लेकर पदोन्नत होने वाले कर्मचारियों को वंचित रखने की शर्त का विरोध
@1stIndiaNews@RajGovOfficial@rituraj9999 किया एवं वित्तीय वर्ष में 2023-24 में छूट लेकर पदोन्नत हुए कर्मचारियों को भी शिथिलता प्रदान करें जिससे हजारों कर्मचारी लाभान्वित हो सके*।
कर्मचारियों ने कहा हम निरंतर उच्च अधिकारियों एवं उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी जी एवं माननीय मुख्यमंत्री महोदय को ज्ञापन देकर विरोध दर्ज किया है.
#Jaipur: अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ एकीकृत ने की पदोन्नति में 2 वर्ष की छूट की मांग की
वित्त प्रमुख सचिव वैभव गालरिया से मुलाकात करके सौंपा ज्ञापन, महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ ने वित्त सचिव से मुलाकात की
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जिन कर्मचारियों को वर्ष 2023-24 में यानी 3 वर्ष पहले पदोन्नति में अनुभव का लाभ मिला, उन कर्मचारियों को भी 2026-27 की पदोन्नति के लिए 2 वर्ष की छूट का मौका दिया जाना चाहिए।@BhajanlalBjp@RajCMO
सबको मिले पदोन्नति में छूट,
किसी के साथ न हो अन्याय ।
प्रदेश की सरकार द्वारा पदोन्नति में दी गई छूट को बिना किसी शर्त के 2 वर्ष के लिए लागू किया जाना चाहिए जिससे सभी संवर्गों को पदोन्नति में समान लाभ मिल सकें।। @RajCMO@BhajanlalBjp@KumariDiya
@RajGovOfficial@rajcmo@DIPRRajasthan
*पदोन्नति में 2 वर्ष की छूट पर लगाई गई शर्त का मंत्रालयिक कर्मचारियों ने किया विरोध, आदेश संशोधन की मांग*
जयपुर, 18 जून। राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए पदोन्नति में अनुभव एवं सेवा अवधि में 2 वर्ष की छूट प्रदान किए जाने के आदेश का मंत्रालयिक कर्मचारियों में व्यापक विरोध शुरू हो गया है। अखिल राजस्थान मंत्रालयिक कर्मचारी महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने आज उपमुख्यमंत्री महोदया से मुलाकात कर आदेश में लगाई गई शर्तों को कर्मचारी विरोधी बताते हुए तत्काल संशोधन की मांग की।
महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार ने पदोन्नति में 2 वर्ष की छूट तो प्रदान की है, लेकिन इसके साथ यह शर्त जोड़ दी गई है कि वर्ष 2023-24, 2024-25 एवं 2025-26 में जिन कर्मचारियों ने किसी भी प्रकार की अनुभव अथवा सेवा अवधि शिथिलता का लाभ लिया है, वे इस छूट के पात्र नहीं होंगे। इस कारण अधिकांश मंत्रालयिक कर्मचारी पदोन्नति के लाभ से वंचित हो जाएंगे और आदेश का वास्तविक उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा।
प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि वर्तमान आदेश कर्मचारियों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार करता है तथा इससे केवल सीमित संख्या में कर्मचारियों को ही लाभ मिलने की संभावना है। वर्षों से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हजारों कर्मचारियों की उम्मीदों पर यह आदेश पानी फेरने का कार्य कर रहा है।
महासंघ ने मांग की कि पदोन्नति में 2 वर्ष की छूट पर लगाई गई उक्त शर्त को तत्काल हटाया जाए तथा सभी पात्र कर्मचारियों को बिना किसी भेदभाव के समान अवसर प्रदान किया जाए। कर्मचारियों का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में पदोन्नति प्रक्रिया को गति देना चाहती है तो छूट का लाभ सभी पात्र कार्मिकों को मिलना चाहिए।
महासंघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि कर्मचारी हित में शीघ्र संशोधित आदेश जारी नहीं किया गया तो राज्यभर के मंत्रालयिक कर्मचारी आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे। आवश्यकता पड़ने पर चरणबद्ध आंदोलन, पेन डाउन तथा सामूहिक हड़ताल जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
कर्मचारी राज्य की रीढ़ होते हैं। जब हम अपनी पूरी ऊर्जा और निष्ठा प्रशासन को देते हैं, तो बदले में परिवार की स्वास्थ्य सुरक्षा की गारंटी हमारा संवैधानिक हक है।
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