चूँकि नोट गिनते समय ज़्यादातर लोग थूक का इस्तेमाल करते हैं,
नोट शराब से लेकर माँस की दुकान और वे़श्यालयों तक से होकर गुज़रते हैं, इसलिए भी नोटों को किसी भी धर्म के पूजास्थल पर न चढ़ाएँ।
पाप लगेगा।
💐💐पूजास्थलों पर सिर्फ फूल चढ़ाए💐💐।
पाखण्ड छोड़े आस्था नही👍
कोटा, आप कमाल थे।
यकीन मानिए, कल हमने मिलकर इतिहास की शुरुआत की।
हज़ारों छात्र मैदान में थे, लाखों लोगों ने ऑनलाइन देखा - और देश को पहली बार खुलकर पता चला कि शिक्षा के नाम पर कितनी बड़ी वसूली चल रही है।
लेकिन यह तो सिर्फ़ शुरुआत है। कोटा में जो लौ जली है, उसे अब पूरे देश में बदलाव की मशाल बनाना है। और इस सफ़र में आपकी जगह तय है।
अपने सुझाव भेजिए। Petition पर अभी Sign कीजिए।
#ChhatronKiGoonj
मैं अंडमान और निकोबार के विनाश के खिलाफ़ पूरी शक्ति के साथ खड़ा हूँ।
अंडमान और निकोबार भारत की सबसे अनमोल प्राकृतिक धरोहर हैं। वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए उनकी रक्षा करना मेरा कर्तव्य है।
मेरे साथ जुड़िए - याचिका पर हस्ताक्षर कीजिए और इस अमूल्य संपत्ति को बचाने की लड़ाई का हिस्सा बनिए।
#GreenOverGreed
देश का मीडिया 157 वें नंबर पर है - क्यों?
>क्योंकि मीडिया बता रहा है कि वेनेज़ुएला से तेल लेना भारत की मजबूरी नहीं फायदे का सौदा है।
>वेणुजुवेला से 114$ प्रति बैरल तेल खरीदना सस्ता है, जबकि रूस का 70$ प्रति बैरल था।
यू आर राइट टीचर्स
ब्रेकिंग:-
क्रूड ऑयल 108$ प्रति बैरल से घटकर 87$ प्रति बैरल पर आ चुका है।
लेकिन तुम लोग देखते रहना, भारत में पेट्रोल के दाम कम नहीं होंगे,
अब तेल कंपनियों को मुनाफा पहुंचाया जाएगा।
दोस्तो की जेबें भरी जाएंगी
“मुझे पूरी ईमानदारी से लगता है कि नरेंद्र मोदी का भारत का प्रधानमंत्री बनना देश के लिए एक बड़ी आपदा साबित होगा।”
– पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, मई 2014
~NEET पेपर लीक - कोई आवाज नहीं
~पेट्रोल डीजल मंहगा - कोई आवाज नहीं
~रुपया की गिरावट - कोई आवाज नहीं
~भयानक मंदी की आहट - कोई आवाज नहीं
~नौकरी पर खतरा - कोई आवाज नहीं
लेकिन "मेलोडी टॉफी" पर सुबह से हंगामा काटे हुए हैं।
पता नहीं क्या मजबूरी है इनकी, जो इनको शर्म भी नहीं आती है?
रूस से सस्ता तेल लेकर खूब मलाई चांपी है तेल कंपनियों ने,
लगभग 100 करोड़ प्रतिदिन मुनाफा कमाया है।
और अब तेल मंहगा होने पर घाटा होने का रोना रो रहे हैं, जबकि सरकार ने इंपोर्ट ड्यूटी भी घटा दी है।
इन सबके बावजूद भी तेल का रेट बढ़ा तो समझो कि सरकार सिर्फ उद्योगपतियों की है।
IAS ऑफिसर सुब्रत गुप्ता शिवेंदु अधिकारी के सलाहकार नियुक्त हुए है, जो कि बंगाल SIR के आब्जर्वर थे,
ये खबर उन लोगों के लिए सरप्राइज़ हो सकती है, जिनको ये नहीं पता है कि चुनाव आयोग और बीजेपी एक ही बात है।
लोकतंत्र का उतना लोड भी मत लो यारो,
जिनको लगता है कि नेता लोग जनता के हितों की रक्षा करेंगे वो सब ना समझ हैं।
1- मुलायम जी ने अपना बेटा सेटल किया
2- अमित शाह जी ने अपना बेटा सेटल किया
3- राजनाथ जी ने अपना बेटा सेटल किया
4- ममता बनर्जी ने अपना भतीजा सेटल किया
5- मायावती जी ने अपना भतीजा सेटल किया
6- ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपना बेटा सेटल किया
7- नितिन गडकरी जी ने अपना बेटा सेटल किया
बाकी लोगों के बच्चे विदेशों में पढ़ रहे हैं।
90 % विधायकों सांसदों के बच्चे विदेशों में पढ़ रहे हैं, या फिर सेटल हैं।
इसलिए भारत की रोड, बिजली व्यवस्था, स्वास्थ्य व्यवस्था नागरिक अधिकार कभी सही होंगे, ऐसा सोचना बेईमानी है।
लखनऊ में 232 करोड़ का प्रेरणा स्थल बनाने के बाद अब प्रयागराज में भी प्रेरणा स्थल बनाया जा रहा है
दूसरी तरफ़ यूपी में 9508 स्कूल ऐसे है जहाँ केवल एक शिक्षक है
शिक्षक रखने के लिए पैसा नहीं है लेकिन मूर्तियों पर पैसा बर्बाद करने के लिए पैसा ही पैसा है ।
वाह रे सरकार
वोट चोरी से कभी सीटें चुराई जाती हैं, कभी पूरी सरकार।
लोकसभा के 240 BJP सांसदों में से, मोटे तौर पर हर छठा सांसद वोट चोरी से जीता है। पहचानना मुश्किल नहीं - क्या उन्हें BJP की भाषा में “घुसपैठिए” कहें?
और हरियाणा? वहाँ तो पूरी सरकार ही “घुसपैठिया” है।
जो संस्थाएँ अपनी जेब में रखते हैं, जो मतदाता सूचियों और चुनावी प्रक्रिया को तोड़-मरोड़ देते हैं - वो ख़ुद “remote controlled” हैं।
उन्हें असली डर सच्चाई का है। क्योंकि निष्पक्ष चुनाव हो जाएँ, तो आज ये 140 के पास भी नहीं जीत सकते।
- TMC ने 15 साल शासन किया, इसलिए एंटी-इंकम्बेंसी थी और वे हार गए
ठीक है 👍
- DMK ने 5 साल शासन किया, इसलिए एंटी-इंकम्बेंसी थी और वे हार गए
ठीक है 👍
- LEFT ने 10 साल शासन किया, इसलिए एंटी-इंकम्बेंसी थी और वे हार गए
ठीक है 👍
- तो फिर बिहार में 20 साल और मध्य प्रदेश में 22 साल शासन करने के बाद BJP के खिलाफ एंटी-इंकम्बेंसी क्यों नहीं हुई?
क्यों ऐसे सभी ट्रेंड और टैग सिर्फ विपक्ष के खिलाफ ही लागू होते हैं, BJP के खिलाफ क्यों नहीं जाते?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 फरवरी 2023 को कर्नाटक के शिवमोगा में एक नए ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे का उद्घाटन किया था।
ये उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 18 घंटे काम करने का नतीजा हैं जो उन्हें देश के हर कोने के विकास करने के लिए बाध्य करता हैं।
एक जलनखोर RTI एक्टिविस्ट Manjunath Hirechowti हैं जो इस उद्घाटन में हुए खर्च पर RTI डाल देते हैं जिसका जवाब जनवरी 2026 को दिया जाता हैं।
जिसमें मामूली खर्च आया था एयर पोर्ट उद्घाटन में मात्र 18.81 करोड़ रुपए लगे
एयर पोर्ट उद्घाटन में भीड़ को लाने के लिए मात्र 4.11 करोड़ लगे
रोड शो, एयर शो और एयर क्रॉफ्ट के लिए लगे मात्र 14.35 करोड़ रुपए लगे
जर्मन पंडाल, मंच बनवाने, सजावट करने में मात्र 1.80 करोड़ लगें
कुल मिलाकर खर्च आया 33 करोड़ रुपए ये पैसा उस जनता से वसूला गया हैं जिसे सरकारी लाभ के नाम पर 5 किलो राशन मिलता हैं।
आप सरकारी स्कूलों, सरकारी अस्पतालों इतना खर्च कर देते तो देश के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को फायदा होता
कभी कभी ऐसा लगता हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी केवल पूंजीपतियों के लिए काम करते हैं आम आदमी को धर्म और राष्ट्रवाद की चटनी से मदहोश किए रहते हैं।
कल जो अडानी एक्सप्रेसवे जिसे गंगा एक्सप्रेसवे का नाम दिया गया है पर पोस्ट डाली थी तो गोबर भक्त बहुत कुतर्क कर रहे है थे कि राष्ट्रिय सेठ अडानी ने पैसा लगाया है तो उसे वसूल क्यों नहीं करेगा ? मत जाओ अडानी एक्सप्रेसवे पर, फलाना ढिकाना।
अब सच सुनिए, गंगा एक्सप्रेसवे मे अडानी का 10,238 करोड़ रुपये लगा है।
अडाणी एंटरप्राइजेज की तीन सब्सिडियरीज बदायूं-हरदोई रोड प्राइवेट लिमिटेड, हरदोई-उन्नाव रोड प्राइवेट लिमिटेड और उन्नाव-प्रयागराज रोड प्राइवेट लिमिटेड ने मिलकर इस परियोजना का विकास किया है । इस परियोजना के लिए SBI ने 10,238 करोड़ रुपये की समूची कर्ज जरूरत को बैंक ने राष्ट्रिय सेठ अडानी को दे दिया है । सुनने में आया है योगी सरकार बैंक गारंटर है।
अब बताइये राष्ट्रिय सेठ अडानी की एक चवन्नी इस प्रोजेक्ट में नहीं लगी है और वो 27 साल तक हेवी टोल टैक्स जनता से बसूलेगा। जबकि टोल दर को देखते हुए मुश्किल से कुछ सालो में ही ब्याज सहित सारा बैंक कर्ज निबट जायेगा।
मीडिया ने सारी जानकारी छिपा ली है बस बता रहे हैं 15 दिन फ्री में अडानी एक्सप्रेसवे पर फर्राटा भरिये। इसकी सच्चाई भी ये है कि इन 15 दिन का टोल टैक्स योगी सर्कार के द्वारा भरा जायेगा। राष्ट्रिय सेठ यहाँ भी एक चव्वनी नहीं छोड़ेगा।
ये सीधी सीधी जनता से लूट है जिसमे मोदी और योगी दोनों सरकार शामिल हैं।
पता है? मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के शुरुआती 97 दिन के भीतर ही 25 आतंकी हमले हो गए थे...
• 21 सैनिक शहीद हुए हैं
• 28 घायल हुए हैं...
• 15 आम नागरिक मारे गए हैं...
• 47 घायल हुए
उसके बाद लोगों ने गिनना बंद कर दिया, क्योंकि लोगों को लगने लगा कि ये तो रूटीन है, इसमें क्या नया है। वैसे भी देश का रिवाज बन गया है कि एकसाथ 20-30 शहीद हों, तो ही संवेदनाएं उफान मारती हैं। 1-2, 1-2 करके रोज़ शहीद होते रहे, उससे किसी के माथे पर बल नहीं पड़ता।
इसलिए कई साल से एक तरफ़ रोज़ कश्मीर में लाशें बिछ रही हैं और दूसरी तरफ़ नेता लोग रैलियों में चिल्ला रहे कि मोदी ने आतंकवाद ख़त्म कर दिया है, आतंकी हमले तो कांग्रेस के टाइम होते थे, अब तो आतंकी हमले होते ही नहीं।
लेकिन सच्चाई ये है कि मोदी कार्यकाल के आतंकी हमलों कि लिस्ट इतनी लंबी है कि आप एक गिनवाओगे, 10 छूट जाएंगे...
▪️28 दिसंबर, 2014 बेंगलुरू में बम धमाका
▪️20 मार्च, 2015 को जम्मू कश्मीर में आतंकी हमला
▪️4 जून, 2015 मणिपुर में हमला
▪️27 जुलाई 2015 में गुरदासपुर में आतंकी हमला
▪️2 जनवरी, 2016 को पठानकोट हमला
▪️25 जून, 2016 जम्मू कश्मीर के पंपोर में आतंकी हमला
▪️18 सितंबर, 2016 को जम्मू कश्मीर के उड़ी में आतंकी हमला
▪️3 अक्टूबर, 2016 को जम्मू कश्मीर के बारामूला हमला
▪️6 अक्टूबर, 2016 हंदवाड़ा हमला
▪️29 नवंबर, 2016 को नगरोटा आर्मी बेस पर हमला
▪️7 मार्च, 2017 भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में बम विस्फोट
▪️24 अप्रैल, 2017 को सुकमा में नक्सली हमला
▪️11 जुलाई, 2017 अमरनाथ यात्रा पर आतंकी हमला
▪️5 अगस्त, 2017 को कोकराझार हमला
▪️10 फरवरी, 2018 सुंजुवान हमला
▪️13 मार्च, 2018 सुकमा में नक्सली हमला
▪️9 अप्रैल, 2019 को दंतेवाड़ा में नक्सली हमला
▪️14 फरवरी, 2019 को पुलवामा में आतंकी हमला
▪️7 मार्च, 2019 को जम्मू बस स्टैंड पर ग्रेनेड विस्फोट
▪️1 मई, 2019 को गढ़चिरौली नक्सली बमबारी
▪️12 जून, 2019 को कश्मीर में आतंकी हमला
▪️26 जनवरी, 2020 असम के डिब्रूगढ़-चराइदेव बम विस्फोट
▪️26 नवंबर, 2020 को HMT श्रीनगर में आतंकी हमला
▪️3 फरवरी, 2021 को हैलाकांडी असम के हैलाकांडी में बम विस्फोट
▪️3 अप्रैल, 2021 को सुकमा- बीजापुर हमला,
▪️27 जून, 2021 को जम्मू ड्रोन हमला
▪️4 अगस्त, 2021 को बांदीपुर, कश्मीर आतंकी हमला
▪️ 27 अगस्त, 2021 को असम दिमा हसाओ आतंकी हमला
▪️ 11 अगस्त, 2022 को राजौरी के परगल में आतंकी हमला
▪️ 20 अप्रैल, 2023 को पुंछ राजौरी हमला,
▪️ 26 अप्रैल, 2023 को दंतेवाड़ा में बम विस्फोट
▪️ 13 सितंबर, 2023 को अनंतनाग में आतंकी हमला
▪️ 29 अक्टूबर, 2023 इंस्पेक्टर मसरूर अली वानी की गोली मार कर हत्या
▪️ 22 दिसंबर, 2023 पुंछ में सेन आले वाहनों पर हमला
▪️ 24 दिसंबर, 2023 कश्मीर के राजौरी में बड़ा आतंकी हमला
▪️ 12 जनवरी, 2024 पुंछ में सेना की गाड़ी पर आतंकी हमला
▪️ 4 मई: पुंछ के आतंकवादी हमले में एक जवान शहीद, पांच घायल
▪️ 28 अप्रैल: उधमपुर में एक डिफेंस गार्ड शहीद
▪️ 22 अप्रैल: राजौरी में सरकारी कर्मचारी की हत्या
▪️ 9 जून को कटरा के रियासी में तीर्थयात्रियों पर आतंकी हमला
▪️ 11 जून, भद्रवाह चौकी पर हमला
▪️ 11-12 जून की रात को कठुआ में हमला, सीआरपीएफ जवान शहीद
▪️ 12 जून डोडा में पुलिस पार्टी पे आतंकी हमला, एक शहीद
▪️ 6 जुलाई को कुलगाम एनकाउंटर में 2 जवान शहीद
▪️ 7 जुलाई को राजौरी में सेना के शिविर पर आतंकी हमला
▪️ 8 जुलाई को कठुआ में 5 जवान शहीद
▪️ 10 जुलाई को नौशेरा में आतंकियों ने घुसपैठ की कोशिश की
▪️ 16 जुलाई को आर्मी कैप्टन समेत 4 जवान शहीद
▪️ 17 जुलाई को छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सलियों हमले में 2 जवान शहीद, 4 घायल
▪️ 10 अगस्त को अनंतनाग आतंकी मुठभेड़ में 2 जवान शहीद, 3 जख्मी
▪️ 12 सितंबर बारामुला एनकाउंटर में एक जवान शहीद
▪️ 14 सितंबर को किश्तवाड़ हमले में 2 जवान शहीद
▪️ 10 सितंबर को भारत-बांग्लादेश सीमा पर आतंकी मुठभेड़ में BSF जवान शहीद
इसके अलावा 15-16 जून 2020 की रात को चीनी हमले में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हुए। और मणिपुर में इतने महीने से लगातार हमारे जवान और आम नागरिक शहीद हो रहे हैं... वो हमले अलग हैं।
हां पिछले साल पहलगाम में पर्यटकों पर घातक हमला हुआ था जिसमें छब्बीस से अधिक लोगों की शहादत हुई थी, अन्य अनेक घायल थे,
पठानकोट, पुलवामा, उड़ी व पहलगाम हमले की जांच हुई कौन दोषी था, किसकी जिम्मेदारी में कभी रही देश वासियों को कोई जानकारी नहीं दी गई है।
लेकिन सारी ख़बरों को दबा दिया गया। देश को ये बताया गया कि आतंकवाद ख़त्म हो चुका है। बस जब भी एकसाथ कई लोगों की मौत होती तो एक-दो दिन की ज़िक्र चर्चा होती है और हर बार वहीं रटी-रटाई बातें मीडिया में चला दी जाती हैं-
हम हमले की कड़ी निंदा करते हैं...
शहीदों को नमन करते हैं...
दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा...
आपातकालीन बैठक बुलाई गई है...
मुंहतोड़ जवाब देने की रणनीति बनाई गई है...
ऑपरेशन ऑलआउट शुरू कर दिया गया है...
पाकिस्तान में बैठे आतंकियों ने साज़िश रची है...
आज सवाल उठाने वाले कांग्रेस के टाइम कहां थे...
कांग्रेस के टाइम पर भी तो हमले होते थे...
कहां हैं वो लोग जो कहते हैं आतंकवाद का धर्म नहीं होता...
हमले को इस्लामिक आतंकवाद बोलने से क्यों डर रहे हैं...
'इस्लामिक आतंकवाद' ले बोल दिया, अब? ये भी बता दिया कि कांग्रेस के टाइम हमले होते थे तो हम उसको ख़ूब गरियाते थे, इस्तीफ़े मांगते थे। अब? अब सरकार से सवाल करोगे? पूछोगे कि आतंकियों के हौसले इतने बुलंद क्यूं हैं? क्यूं इतने बड़े टूरिस्ट प्लेस पर सुरक्षा कर्मी तैनात नहीं किए? क्या गृहमंत्री-प्रधानमंत्री की जवाबदेही तय होगी? नहीं !
क्योंकि इस दिशा में तो सोचा ही नहीं जा रहा। सोचा तो सिर्फ़ ये जा रहा है कि इससे कितना राजनीतिक फ़ायदा उठाया जा सकता है। कैसे इसकी आड़ में अपना पॉलिटिकल नैरेटिव सेट किया जा सकता है। जो लोग कल ख़ुद सारे मुद्दे को ताक पर रखकर सिर्फ़ और सिर्फ़ जाति के नाम पर वोट दे रहे थे, वो आज हिन्दू एकता की दुहाई दे रहे हैं।
क्या ही देश है, क्या ही नागरिक हैं ...!!
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