अगर प्रभु श्री राम के मंदिर में हुई चंदा चोरी पर आपका खून नहीं खौलता, लेकिन मोदी जी को कोई गाली दे दे तो आपको तुरंत गुस्सा आ जाता है तो साफ कहूँ, आप 'राम भक्त' नहीं, बल्कि 'मोदी भक्त' हैं।
सुना है कई चाटूकार एंकर्स आज जंतर- मंतर और Gen Z की महिमा का बखान कर रहे हैं .
यही वो एंकर्स हैं , जिन्होंने लगातार जंतर - मंतर के प्रोटेस्ट के ख़िलाफ़ एजेंडा चलाया . प्रोटेस्ट में आने वालों के लिए दुष्प्रचार किया . सरकार के पक्ष में नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की . सरकार को लगे थप्पड़ का असर इनके गालों पर भी हुआ है . तो गाल सहलाते हुए Gen Z की शान में कसीदे पढ़ रहे हैं .
श्रीमान वसूली चौधरी जी ,
आप कह रहे हैं कि सरकार सारे प्रदर्शनकारी को डंडे मारकर भगा देती .एक और लाठीचार्ज हो सकता था .
एक बार लाठीचार्ज का अंजाम तो ये हुआ कि देश भर से हज़ारों युवा हर रोज आने लगे . मोदी जी ने दो बार रील बनाकर
Gen Z के गुस्से को दूर करने की कोशिश की . आखिर में अपने लाडले मंत्री का इस्तीफा लेना पड़ा. पांच दिन में सरकार घुटने पर आ गई.
एक और लाठीचार्ज होता तो क्या होता , ये आप अंदाज़ा नहीं लगा सकते हैं .
चैन से सरकारी खज़ाने से करोड़ों बटोरते हुए चाटुकारिता जारी रहिए .
इस बंदे को एक बार जंतर - मंतर आना चाहिए था .
ये न किसानों के आंदोलन में गया . न पहलवानों के आंदोलन में गया . न नौजवानों के आंदोलन में आया क्योंकि इसे पता है कि आया तो क्या लेकर जाएगा .
ऐसे लोगों ने देश के जनमानस को ख़राब करने में बहुत अहम भूमिका निभाई है .