I don't want to take risk to discuss friendship btw modani 🤯 i just want to convey message to Prashant bhusan ji why are you taking risk to upload this video
नारा ‘बेटी पढ़ाओ’ का और बेटियों के सम्मान समारोह पर बुलडोज़र?
गाजियाबाद में 1000 मेधावी बेटियों को साइकिल वितरण से पहले सपा नेताओं ने पुलिस-प्रशासन पर कार्यक्रम स्थल उजाड़ने का आरोप लगाया है।
योगी सरकार बताए - तकलीफ़ बेटियों को साइकिल मिलने से है या समाजवादियों द्वारा सम्मान किए जाने से?
भाजपा अपनी राजनीतिक दुश्मनी में बेटियों के सपनों का रास्ता रोकना बंद करे!
@ravish_journo Ravish sir I made video on YouTube channel ( Mithun Reformer ) in which i compare ration price 2014 vs 2026 and believe me this videos will expose modi Sarkar or Andhbhakto ki nind uda dega
@atullondhe WELCOME TO RAMRATAN JAT'S WATER TANKER GPS SERVICE YOUR TRIP OTP IS 736657. VEHICLE AND DRIVER NUMBER IS RJ23RB8486 7790991393 THANKS RRJTNK
देश में 2014 के बाद एक नया गैंग आया है Godi गैंग , चाटुकार गैंग, तलवे चाटने वाला गैंग, 100 crore की फिरोती मांगने वाला गैंग..! गैंग मैं कोन कौन है..? बताने वाला को मिलेगा 7 Cr 😊
Journalist protest started! Then police allowed to enter Journalist in police HQ
Then protest stoped!
For few minutes 2 protest were started first @nsui and another by journalist who sit on road..
Then police allowed
लोकतंत्र की आत्मा पर रिजीम चेंज का भूत डांस
SIR और वोट चोरी के आरोपों का जवाब नहीं दिया गया। कई दिनों तक चुप रहने के बाद गृहमंत्री ने कहा कि राहुल घुसपैठियों को बचाने के लिए SIR का विरोध कर रहे हैं। पिछले साल जून से SIR हो रहा है, गृहमंत्री बता देते कि कितने घुसपैठिए SIR से पहचाने गए हैं। आयोग ही बता देता। बिहार SIR के समय सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोई निकला भी तो उसकी जाँच की सक्षम अथॉरिटी गृहमंत्रालय है। गृहमंत्री बता सकते हैं कि ऐसे कितने केस उनके सामने आए हैं।
असम में कई दशक तक घुसपैठ का भूत नचाया गया। सुप्रीम कोर्ट से भी भूत नचवाया गया। कोर्ट ने NRC का आदेश दिया। डेढ़ हज़ार करोड़ से अधिक की राशि फूंक दी गई। NRC की लिस्ट बनी तो लाखों की संख्या में हिन्दू भी निकल गए जिनकी नागरिकता संदिग्ध थी। निकलनी थी क्योंकि किसके पास काग़ज़ होता है। SIR में भी लोग पिछले SIR का सबूत नहीं दे पाए। विपक्ष ने कोर्ट से लड़कर आधार नहीं जुड़वाया होता तो आधे वोटर बाहर हो गए होते। लौटते हैं असम के NRC पर। बीजेपी ने NRC को तुरंत फेंका। NRC के बाद असम में जो पहला विधान सभा चुनाव हुआ, उसमें NRC का नाम तक लेना बंद कर दिया। फिर से उसी भूत को SIR के नाम से नचाया जा रहा है कि घुसपैठिया पकड़ा जा रहा है।
जंतर मंतर पर जेन ज़ी का आंदोलन अहिंसक था फिर भी दिमाग़ी नक्सल कहा गया। पेपर तो लीक हो ही रहा था। NTA बेकार एजेंसी साबित हुई। परीक्षा में सुधार के लिए नंदन कमेटी बनानी पड़ी। प्रधान का इस्तीफ़ा हुआ। हिंसा के आरोप पुलिस पर लगे और गृहमंत्री जवाब देने पूरे आख़िरी दिन छोड़ कर मानसून सत्र के दौरान सदन में ही नहीं आए।
SIR से तब भी ध्यान नहीं भटका तो जंतर मंतर हटाने और राजधानी ठप्प करने में उलझाया गया। सारी बहस प्रदर्शन के अधिकार की तरफ चली गई। उससे भी ज्ञानेश कुमार का मामला पीछे नहीं गया तो रिजीम चेंज ले आए। ये भी नहीं चलेगा तो परिसीमन है ही। इसे भारत की सभी समस्याओं का इलाज बताया जाएगा।
इधर आयोग कोर्ट जाने से पहले नाम जोड़ने में लगा है। नियमों के नाम पर नाम काटे गए और नियमों को ताक पर रख कर नाम जोड़े जा रहे हैं। बिहार और बंगाल में नाम काट कर वोट देने से रोका गया। यह अवैध काम था। ये अपराध सुप्रीम कोर्ट और आयोग की नाक के नीचे हुआ है। जिस तरह से जनता के डर से नाम जोड़े जा रहे हैं, उसी तरह से पहले भी जोड़े जा सकते थे। जवाब है नहीं ।
जनता के बीच चोरी पकड़ी गई तो बेंच के नीचे कॉपी छिपा कर जल्दी जल्दी होमवर्क की कॉपी भर रहे हैं ताकि आयोग तक जनता के पहुँचने के पहले दिखा सकें कि किसी का नाम नहीं कटा है। फॉर्म 6 में जो अवैध था, उसे तो ख़त्म कर दिया। फॉर्म 7 भी अब एक आदमी दस से ज़्यादा नहीं भर सकता। पहले तो सैंकड़ों भर रहा था तब कहाँ थे? 27 लाख लोगों से वोट के अधिकार छीने गए। तब कहाँ थे?
अख़बार में ख़बर छपी कि जेन ज़ी का नाम नहीं जोड़ने के लिए SIR के नाम पर SSR बंद है। तो तुरंत दिल्ली में घोषणा कर दी गई और अब पूरे देश में। इसके बाद जो वोटर लिस्ट आएगी उसकी मशीन से पठनीय कॉपी दी जाएगी। पहले का वोटर लिस्ट तो ख़त्म हो चुका, उसकी कॉपी आयोग ने नहीं दी। नीयत में खोट नहीं होती तो वोटर रोल की मशीन पठनीय कॉपी दे सकता था। राहुल गांधी और दूसरे नेता माँगते रहे। नहीं दिया तो नहिये दिया।
ज्ञानेश कुमार के अपराध को बचाने के लिए असंख्य पुलिस बल उतारा गया। मुद्दा और पब्लिक के बीच पहुंच गया। अब रिजीम चेंज के मुद्दे से ज्ञानेश को बचाया जा रहा है। चुनाव आयुक्त सामने आकर जवाब नहीं दे सकते। जवाब होता तो प्रेस कांफ्रेंस हो जाती। 23 सितंबर से 18 अक्तूबर के बीच दिल्ली में रोज़ प्रेस कांफ्रेंस हुई। केवल चुनाव आयोग की नहीं हुई।
वोट चोरी असली रिजीम चेंज प्रूफ़ काम है। मुद्दा तो यही है कि वोट का अधिकार छीना गया ताकि चुनाव में जनता वोट से हरा न सके। अपने ऊपर लगे आरोप का जवाब नहीं है तो विपक्ष की तरफ से आए एक दो बयान के ज़रिए विपक्ष पर हमला किया जा रहा है कि वह रिजीम चेंज करना चाहता है जैसे इसके लिए विपक्ष ने वोट चोरी की हो। हर नेता ने संवैधानिक तरीके से प्रदर्शन की बात की तो आपने जंतर मंतर को हमेशा के लिए बंद कर दिया। तो ड्रामा से एक वास्तविक मुद्दे का काउंटर तैयार हुआ है लेकिन इससे चुनाव आयोग की साख बहाल नहीं होगी। वोट चोरी लोकतंत्र की हत्या है। उसकी आत्मा पर प्रहार है। अब उस आत्मा पर रिजीम चेंज का भूत डांस हो रहा है ताकि लोग भाग जाएँ।
The last two days in Delhi have changed the paradigm of how police will deal with protests across the country, despite specific Court orders for restraint. There are precedents set in terms of the numbers of security forces deployed, the size of area domination, the freedom given to violent political militia to attack protestors, and the treatment of journalists including their detention.
The question is, will this precedent stand and become the standard by which the government deals with those who dissent?