मोबाइल की जिद की वजह से पूरा परिवार खत्म हो गया है।
घटना महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर का है जहां शुक्रवार को माता-पिता और बेटे समेत 3 लोगों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि 18 साल का युवक सुसाइड करने के इरादे से पहाड़ी पर पहुंचा था। पिता उसे बचाने के लिए चट्टान से पीछे खींचने की कोशिश कर रहे थे लेकिन दोनों पहाड़ी से नीचे गिर गए। अपनी आखों के सामने बेटे और पति की मौत होने से के बाद मां ने भी पहाड़ी से छलांग लगा दी और तीनों की मौत हो गई।
घटना तिसगांव इलाके के खावड्या पहाड़ की है। लड़का सुसाइड क्यों करने पहुंचा था इसकी वजह अभी स्प��्ट नहीं हुई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। हालांकि तिसगांव के पूर्व सरपंच का दावा है कि सुसाइड करने वाला लड़का आईफोन लेना चाहता था।
టీచర్కు భయపడి కుప్పకూలి ఎల్కేజీ విద్యార్థి మృతి
విశాఖపట్నంలో దారుణ ఘటన
లిటిల్ గార్డెన్ స్కూల్లో హోంవర్క్ చేయలేదని టీచర్ కొట్టడంతో భయపడి గుక్కపెట్టి ఏడుస్తూ, కుప్పకూలి టీచర్ మీద పడిపోయిన ఎల్కేజీ విద్యార్థి ప్రణయ్ తేజ్ (6)
చికిత్స నిమిత్తం ఆసుపత్రికి తరలించగా, అప్పటిక��� మృతి చెందినట్టు నిర్ధారించిన వైద్యులు
సీసీటీవీ ఫుటేజ్ చూసి ఆగ్రహంతో స్కూల్ ఎదుట ఆందోళనకు దిగిన ప్రణయ్ తేజ్ తల్లిదండ్రులు, కుటుంబ సభ్యులు
कांग्रेस नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री, *आस्कर फर्नांडिस* जो पिछले दिनों कैंसर से पीड़ित थे, देश विदेश में हर स्तर का महंगे से महंगा ��लाज करवाने के बाद भी मौत सामने देखते अंततः मेरठ के नजदीक एक सनातन आश्रम में भर्ती हुए । वहां पर *गौमूत्र सेवन* के इलाज से इन्होनें अपने कैंसर पर विजय प्राप्त की ।इस बारे में उनके द्वारा पार्लियामेंट में दी गई जो जानकारी है उसके अनुसार
ऑस्कर फर्नांडिस ने गोमूत्र के सहारे कैंसर पर विजय तो प्राप्त की ही इसके साथ-साथ योग-प्राणायाम के सहारे अपने *घुटनों के दर्द* से पूरी तरह से निजात प्राप्त की
और ईसाई होने के बावजूद सारा जीवन आश्रम में रहकर वहां से���ा देने का संकल्प लिया.
आप स्वयं सुनिए पार्लियामेंट में ऑस्कर फर्नांडीज को ....
लेकिन आज उनके ही नेता संसद में गोमूत्र का मजाक उड़ा रहे है।
वो पुराने न्यूज एंकर...
एक थीं नीलम शर्मा। बहुत पसंद की जाती थीं। कम उम्र में ही कैंसर से उनका निधन हो गया।
शम्मी नारंग।
न्यूज खत्म होने के बाद पेन ️जेब में रखने का उनका अंदाज बहुत ही अनोखा था।
दूरदर्शन के न्युज रीडर्स बेहतरीन तरीके से न्युज रीड करते थे परन्तु अविनाश कौर शरीन के अंदाजेबयां को बहुत उच्च मुकाम हासिल था। सब उन्हें बहुत पसंद करते थे।
उस दौर के समाचार वाचक लोगों के दिलों में बसा करते थे। उनकी सादगी, उनके चेहरे का आकर्षण लोगों को लुभाता था। उनके काम में रत्तीभर बनावट नहीं होती थी, जो आज के हर चैनल पर दिखती है।
तब के कुछ खास ऐंकर थे...
अविनाश कौर सरिन
शोभना जगदीश
नीलम शर्मा
मंजिरी जोशी
सलमा सुलतान
शम्मी नारंग
तेजेश्र्वर सिंह
रीनी खन्ना
जे. पी. रमन
सरला माहेश्वरी
आदि....
बड़ा ही सादगी भरा दौ��� थ��� वो जिसमें आज की तरह चीखना चिल्लाना नहीं होता था।
" वो दिन याद करो.... "
😣
💔 कैंसर से जंग हारने से पहले पिता ने अपने छोटे बेटे के लिए छोड़ा आख़िरी संदेश…
एक पिता, जो टर्मिनल कैंसर से लड़ रहा था, दुनिया छोड़ने से पहले अपने बेटे मंत्रा के लिए ऐसी बातें कह गया जिन्हें पढ़कर शायद आपकी भी आँखें नम हो जाएँ।
उसने बेटे से कहा— "हमेशा अपनी माँ की बात मानना, उनका ख़्याल रखना… और अपनी दोनों बहनों की हमेशा रक्षा करना।"
फिर उसने एक और बात कही जिसने लाखों लोगों का दिल छू लिया— "मैं कहाँ चला गया, ये मत पूछना… जब भी मेरी याद आए, समझना मैं हमेशा तुम्हारे पास हूँ।" ❤️🥺
कुछ रिश्ते मौत से नहीं टूटते… पिता का प्यार हमेशा बच्चों के साथ रहता है। 🙏
जब बिजली नहीं थी, तब अंग्रेजों को ठंडी हवा कैसे मिलती थी...
एयर कंडीशनर और बिजली के पंखों से पहले, ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में बड़े-बड़े कपड़े के छत वाले पंखे, जिन्हें पंखा (Punkah) कहा जाता था, इस्तेमाल किए जाते थे। लेकिन इन्हें कोई मशीन नहीं चलाती थी।
इन पंखों को घंटों तक रस्सी खींचकर भारतीय कर्मचारी, जिन्हें पंखा वल्लाह (Punkah Wallah) कहा जाता था, हाथ से चलाते थे।
भीषण गर्मी में लगातार यह काम करना बेहद कठिन और थकाऊ होता था। एक तरफ अंग्रेज अधिकारी आराम से ठंडी हवा का आनंद लेते थे, वहीं दूसरी तरफ भारतीय मजदूर उसी आराम की कीमत अपने कठिन श्रम से चुकाते थे।
इतिहास हमें सिर्फ अतीत नहीं बताता, बल्कि यह भी सिखाता है कि किसी भी समाज की समृद्धि और आराम कभी भी दूसरों के शोषण की कीमत पर नहीं होना चाहिए।
The untold mystery of Shri Krishna that is still believed to be hidden within Jagannath Temple...
A story of faith, devotion, and an ancient tradition that continues to inspire millions. Watch till the end!
हाथरस भगदड़ के 2 साल- आरोपी बाहर, भोले बाबा कहां है: बाबा की सटीक लोकेशन सेवादार भी नहीं जानते, 121 मौतों के बाद मैनपुरी, कासगंज और हाथरस के आश्रमों में क्या-कुछ बदला? पढ़िए इस रिपोर्ट में…
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