Ladke gf ko hi biwi banana chahte h pr kuch ldkiyo ko (not all) bs mje ke lie bf chahiye aur unka chutiya kat ke kisi well settled ke sath shadi kr lengi
बेचैन हो जाते है लड़के अपने से आगे निकलते उन लड़कों की तरक्की देखकर जिनके साथ बैठकर पढा करते थे..
यह बेचैनी उनकी सफलता की नही बल्कि अपने पीछे छूट जाने की होती है
वे कोसते रहते है अपनी पारिवारिक परिस्थितियों को अपनी आर्थिक मजबूरियों को और कभी कभी खुद को भी।
इसी बीच मन में उपजता है 'काश' जो उम्मीद बनकर कुछ कर गुजरने को करता रहता है प्रेरित जिसके सामने छोटी लगे सारी मजबूरियां..
फिर वो कोशिश करते है छूने की अपने हिस्से का आ'काश',