BHU में हिंदी PhD
जनरल कटऑफ: 100 में 100
ST कटऑफ: 100 में 3.7
ये किसी छात्र का नहीं, पूरे सिस्टम का फेल होना है।
जब योग्यता नहीं, जाति ही पैमाना बन जाए
तो शिक्षा नहीं, समाज का भविष्य बर्बाद होता है।
आज 3.7 नंबर वाला PhD करेगा,
कल वही प्रोफेसर बनेगा,
और परसों वही हमारी पीढ़ी को पढ़ाएगा।
सवाल जाति का नहीं है,
सवाल न्याय, योग्यता और राष्ट्र के भविष्य का है।
या तो सब एक मापदंड में आओ,
या फिर “समानता” शब्द बोलना बंद करो।
#योग्यता_या_विनाश
Our fights will continue for-
1. Full UGC Roll back
2. SC/ST Creamy layer
3. One Family One Reservations
4. Sunset clause- Reservation ends after fixed period
5. Abolition of SC/ST Act
ये है इस देश में सवर्णों की हैसियत!
किसी भी नेता, यहां तक कि प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति तक को हमारी चिंता नहीं है!
कभी कभी लगता है कि हम इस देश के नागरिक हैं भी कि नहीं!!
#Feb1BharatBand
Shout out to @MehHarshil for the superb work he has been doing for several months now on exposing the insidious agenda being pushed in the humanities depts in the IITs, and for his stupendous work in bringing the #UGCRegulations to light. Love the focus and persistence. Bravo!
Merit पर देखें तो UGC कानून में बदलाव के misuse होने के, पूरे-पूरे chances हैं. ये कहना काफी नहीं है कि सरकार किसी पर ज़ुल्म नहीं होने देगी. लेकिन ये मामला political भी है. ब्राह्मण और राजपूत समाज का vote ज़्यादा नहीं है, इसलिए उनकी अनदेखी की जाती है. ये राजनीतिक दलों की अपनी विवशता है. इसीलिए समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, BSP, सब पर्दे के पीछे से इस issue को हवा दे रहे हैं. ये सोचकर कि इससे बीजेपी को नुकसान होगा. बीजेपी में भी ब्राह्मण समाज के कई ऐसे नेता है जो काफी पहले से कह रहे हैं कि उनके साथ अन्याय हो रहा है. उनको अब एक और बहाना मिल गया है. वो इस मामले का इस्तेमाल pressure बनाने के लिए करेंगे. इसीलिए इस मसले को लटका कर नहीं छोड़ा जा सकता. समाज समतामूलक हो, सबको बराबरी का हक मिले, जिनके साथ पहले अन्याय हुआ है उनका ज़्यादा ध्यान रखा जाए, ये सब ठीक है. लेकिन इसके साथ-साथ अब अन्याय के, harassment के, नए रास्ते न खुलें, इसका भी ध्यान रखना ज़रूरी है वरना आगे जाकर बड़ी problem होगी. #UGCAct #UGCRules #AajKiBaat #MyTake
17 Jan 2016- रोहित वेमुला का सुसाइड, जातीय उत्पीड़न के आरोप ( पूरे देश की खबर बनी, नेताओं का ताँता उनके परिवार वालों से मिलने में लग गया, UGC ने तो नया नियम ही बना दिया )
26 Feb 2016- लखनऊ में इंजीनियरिंग के छात्र लवकेश मिश्रा ने सुसाइड किया, चिट्ठी में HOD पर आरोप लगाया, ना कहीं खबर बनी ना कोई नेता उनके दरवाज़े तक गया. कोई नाम भी नहीं जानता होगा.
सच ये है कि इस देश में जाति हमें हर रोज मारती है फर्क बस इतना है कि राजनीति ने एक वर्ग के छात्रों को हाशिये पर फेंक दिया है. क्योंकि उनके जीने और मरने से सियासतदानों को कोई फर्क नहीं पड़ता.उनके संघर्ष से वोट नहीं मिलते.
इस हमाम में सब एक जैसे हैं…
"कुछ देशद्रोही कह रहे हैं कि मैं सवर्ण नेता होकर भी यूजीसी नियमों के खिलाफ क्यों नहीं बोल रहा? किसने कहा कि नहीं बोल रहा?
लीजिए, सुनिए: ये नियम जनवरी माह में लागू किए गए थे। जनवरी जॉर्जियन कैलेंडर का पहला माह है। हमारा नया साल मार्च से शुरू होता है, जब चैत्र शुक्ल प्रतिपदा आती है।
अभी तो और सुनिए: जनवरी, फरवरी, मार्च किसके नाम पर हैं, आप नेट पर सर्च कर लीजिएगा। जूलियस के नाम पर जनवरी, ऑगस्टस के नाम पर अगस्त… लेकिन सितंबर, अक्टूबर, नवंबर, दिसंबर किसके नाम पर हैं, कहीं नहीं मिलेगा, क्योंकि ये सूर्य किस ग्रह में है, उसके आधार पर रखे गए हैं। यानि एक समय पूरी दुनिया में हमारा कैलेंडर चलता था। समझ गए? फिर मत कहना कि मैंने यूजीसी नियमों के बारे में कुछ नहीं कहा। हह।"
You are right. No one will misuse this law. Instead, they will use it. Because you can only misuse a just and moral law, not an unjust and immoral one. And you have drafted the latter.
This is the kind of utterly vile mentality the #UGCRegulations encourage and enable. I think it's time to junk the convenient excuse "Sarkar humaari hai par system unka hai" which is used to defend the indefensible.
RJD National Spokesperson Kanchana Yadav triggered sharp reactions after stating that the “upper caste deserves to be trapped in fake cases.” The remark, made in a public political context, has drawn criticism from multiple quarters, with opponents calling it divisive and dangerous, while raising concerns over the normalisation of targeting communities through misuse of legal processes.
ये अपर कास्ट क्या है? मतलब “सवर्ण” और “अपर कास्ट”बोल बोल के इन लोगो ने एक निरेटिव बनाया है और आज “सामान्य वर्ग” जिसे ये लोग “अपर कास्ट” बोलते है सबसे ज़दा उत्पीड़न का शिकार है।
सब सरकारे देखती है SC ST के कितने मामले आए क्या किसी ने देख की सामान्य वर्ग के उत्पीड़न कितने मामले आए ?
“तिलक, तराजू और तलवार….. कौन लोग बोलते है? जो लोग ब्राह्मणों की कब्र खोदने की बात करते हैं वो क्या है? क्या ये जातिगत भेदभाव , क्या ये उत्पीड़न नहीं है।कोई हो जो जवाब दे।
झूठे केस के कारण लोग आत्महत्या कर रहे हैं
झूठी शिकायत, झूठी FIR, झूठी जांच और झूठी गवाही को गंभीर अपराध घोषित करिये
नार्को पॉलीग्राफ ब्रेनमैपिंग टेस्ट अनिवार्य करिये
100% संपत्ति जब्त करने, नागरिकता खत्म करने और 01 वर्ष में 10 साल की सजा देने के लिए कानून बनाइये @narendramodi