In the era of photo-ops and reels madness, Rahul Gandhi chose to put a Gen Z girl Neha Bora in front during today’s massive rally. She didn’t even mention him in her tweets, calling him “some opposition leaders.” In return, he asked her to lead the movement. This is character that comes with upbringing and values.
BREAKING 🚨
Jantar Mantar has been denotified as protest site.
Three new venues are:
Ramlila Ground - Central Delhi
Burari Ground - North Delhi
CBD Ground - East Delhi
Surprisingly, all three grounds are holding Ramlila these days. So where is the immediate protest site?
MPSC के अध्यक्ष को आखिर जाना पड़ा - अब भ्रष्टाचार की पूरी जांच होगी।
ये छात्रों की बड़ी जीत है,
ये युवाओं की बड़ी जीत है,
ये सत्याग्रह की बड़ी जीत है।
#Satyagraha
I want to join protest - dhruv rathee
But police has surrounded my house and they are following me , it’s an unofficial house arrest
Dear @RahulGandhi please ask your team to pickup dhruv rathee from his house he wants to join your protest
Innova bhej do , Genuine trouble hai bro 🫣
NDTV पर रवीश कुमार का 9 PM का प्राइम टाइम शो की बैकग्राउंड म्यूजिक!
इकलौते ऐसे एंकर जो 8-10 मिनट लगातार उस सब्जेक्ट पर बोलते हुए स्क्रीन पर रहते थे! हम लोगों के लिए वो रोज़ का शो एक किताब की तरह था कि एनालिसिस की कैसे जाती है, सवाल कैसे किए जायें और विषयवस्तु कैसे समझी जाए!
उनके एक शो का ये हिस्सा देखिए और आज भारत में डेमोक्रेसी और हालात हो इमेजिन कीजिए!
“लोग टीवी पर जो देखते हैं उस पर सवाल नहीं उठाते"
"भारतीय लोकतंत्र को नष्ट करने के लिए, भारतीय मीडिया ने पहले खुद को नष्ट किया और अब इसे बदलना बहुत मुश्किल है, भले ही सत्ता परिवर्तन हो जाए।”
“नफरत फैलाने वाले झूठ फैलाने वाले न्यूज़ एंकर रातोंरात गायब नहीं होंगे। यह मीडिया कभी लोकतंत्र के लिए वापस नहीं आएगा।“
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“People don’t question what they see on TV”
“Indian media destroyed itself first. And it’s now very difficult to change this, even if there is a regime change.”
“The news anchors who are spreading hate lies will not go away overnight. This media will never return for democracy.”
(द गार्जियन में @ravish_journo सर को कोट करते हुए)
कल हुए प्रोटेस्ट और उसमें पिटते बच्चों को देखकर मन में कई सवाल थे उन सवालों को इस बार वीडियो के जरिए पूछा है...सवाल CJP से हैं।
पहली कोशिश है तो कमियां तो होंगी ही फिलहाल सिर्फ सवालों पर ध्यान दिया जाए...
ध्रुव राठी को छोड़िए, उन्होंने अपना वीडियो डाल दिया है। जो गुंडे हैं, गोदी मीडिया को उनका पीछा करना चाहिए। ज़रा चार सवाल पूछ कर देखना चाहिए कि हज़ारों की सुरक्षा के बीच गुंडे कहाँ से आ गए? जनता के पैसे से गोदी चैनलों और अख़बारों को कई सौ करोड़ के विज्ञापन मिलते हैं। इनके पास कई सौ रिपोर्टर हैं। इनका डिटेल ले आएं, पुलिस और गृहमंत्री से पूछ कर दिखाएं कि गुंडे कहाँ से आए थे? कहाँ से हर बार आ जाते हैं और पुलिस कुछ करती क्यों नहीं है? ध्रुव का इंटरव्यू तो आसान है। उन्होंने तो अपना पासपोर्ट दिखा दिया कि भारतीय है। कमाल का दौर है। एक अखबार की रिपोर्ट में गुंडों की चर्चा न के बराबर है और इंस्टाग्राम पर उसी अख़बार के अकाउंट पर शानदार तस्वीरे हैं। वैसी तस्वीरें अख़बार में नहीं हैं। इसका मतलब है उस अख़बार के पास हिंसा की सूचना थी, पुलिस की ज़बरदस्ती की अपनी तस्वीरें थीं फिर भी आप पेपर के तीन चार पन्नों को पलट कर देखेंगे तो ज़बरदस्ती का स्केल दिखेगा नहीं जो उनके इंस्टा अकाउंट पर उन्हीं के शानदार फोटोग्राफर ने ली है।
अमित शाह की दिल्ली पुलिस खुद तो गुंडागर्दी पर उतर ही आई - RSS-BJP के असली गुंडों को भी महिलाओं और युवाओं पर हिंसा करने की खुली छूट और बढ़ावा दे रही है।
जैसा मैंने कहा था, Mogambo Modi और उसकी सरकार जितना दबाएगी, Gen Z और छात्रों का गुस्सा उतना ही बढ़ेगा।
सोमवार, 12 अक्टूबर को कांग्रेस, पूरा INDIA गठबंधन और देश के युवा बड़ी संख्या में एक बार फिर सड़कों पर उतरेंगे। और इस बार भी आवाज़ पूरे देश में गूंजेगी - पहले से कहीं ज़्यादा।
@AmitShah, जितनी पुलिस लानी है, 10 हज़ार, 20 हज़ार, 40 हज़ार, ले आइए। BJP-RSS के जितने गुंडे बुलाने हैं, बुला लीजिए।
हम डरने वाले नहीं हैं। पीछे हटने वाले नहीं हैं। ये लड़ाई अब रुकने वाली नहीं है!
सोमवार को हम मुख्य न्यायाधीश से भी मिलेंगे और मांग करेंगे कि जब दिल्ली की सड़कों पर संविधान को तार-तार किया जा रहा है और लोकतंत्र को कुचला जा रहा है, तब कानून के संरक्षक आंखों पर पट्टी डाल कर नहीं बैठ सकते।
संविधान की धज्जियां उड़ेंगी और हम चुप बैठेंगे? ऐसा हरगिज़ नहीं होगा। जवाबदेही तय करवाकर रहेंगे!