कश्मीरी पंडितों पर हल्ला बोल मचाने वालों भारत के अंदर सबसे अधिक अत्याचार आदिवासियों पर हुआ है। हर महीने दर्जनों गांव और हजारों आदिवासियों को अपनी ही जमीन से बेदखल किया जाता है। नक्सल मिटाने के नाम पर, खनन करने के नाम पर, अभयारण्य में जानवरों की सुरक्षा के नाम पर, बांध के नाम पर।
मांसाहार शुद्ध हिंदू परंपरा है। जो लोग धर्म ग्रंथों को लाल कपड़े में लपेटकर उनकी पूजा करते हैं, पढ़ते नहीं हैं, उनको समझ में नहीं आएगा।
घर के रखी आदिकवि महर्षि वाल्मीकि कृत रामायण को निकालिए। उसके अयोध्याकांड के सर्ग 52 का 102 नंबर का श्लोक पढ़िए। समझ में आ जाएगा कि भगवान राम क्या खाते थे। शिकार क्यों करते थे।
ये मैंने आईआईटी कानपुर की वेबसाइट से लिया है। मेरे घर पर सैकड़ों धर्म ग्रंथ है। उनकी पूजा नहीं करता। पढ़ता हूँ। इसलिए हिंदू धर्म के बारे में मेरे ज्ञान पर संदेह करने वाले हमेशा हारेंगे। हारते रहे हैं।
हिंदू धर्म ग्रंथों में मांसाहार के वर्णन के मैं सैकड़ों उदाहरण दे सकता हूँ। कोई चुनौती तो दे।
◆ सिंधु घाटी के लोग द्रविड़ थे. सिंधु घाटी की सभ्यता द्रविड़ो की बौद्ध सभ्यता थी. बौद्ध सभ्यता का विकास रातों रात नही हुआ. कई पीढ़ियों, कई गणों ने इसके विकास में अपना अपना योगदान किया है.
◆ गौतम बुद्ध से पहले जो 27 बुद्धों के नाम मिलते हैं, भाषाई दृष्टिकोण से वे नज़्म काफी दिलचस्प हैं.
◆ एकदम से आरंभिक बुद्धों के नाम हमें द्रविड़ नामों की याद कराते हैं. शायद इसलिए कि इन बुद्धों की मौजूदगी सिंधु घाटी की द्रविड़ सभ्यता में रही होगी.
◆ मिसाल के तौर पर, पहले बुद्ध का तणहंकर बुद्ध है. तण द्रविड शब्द है जो शीतलता का, तृप्ति का बोधक है. तणहंकर ना तो संस्कृत में है और न प्राकृत में है. तणहंकर द्रविड़ शब्द है.
◆ तीसरे बुद्ध का नाम शरणकर बुद्ध है. येही द्रविड़ो का शंकरण है.
◆ पांचवे बुद्ध का नाम कोंडाभ है. यह भी द्रविड़ नाम है. ज्यों ज्यों हम सिंधु घाटी सभ्यता से गौतम बुद्ध की तरफ चलते हैं, त्यों त्यों बुद्धों के नाम प्राकृत भाषा के होते जाते हैं.
◆ उदाहरण के तौर पर - तिस्स, विपस्सी, वेस्सभु, कस्सप जैसे नाम प्राकृत भाषा में हैं. 28 बुद्धों के नाम से हम सिंधु घाटी सभ्यता से गौतम बुद्ध के काल तक की सभ्यताई यात्रा कर सकते हैं.
◆ स्मरण रहे सिंधु घाटी सभ्यता द्रविडों की बौद्ध सभ्यता थी.
Source : पुस्तक - बौद्ध सभ्यता की खोज.
▪️धम्मपद में बुद्ध ने कहा है कि
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एस धम्मो सनन्तनो अर्थात “यही धम्म सनातन है”
▪️ अशोक ने ब्रह्मगिरि आदि शिलालेखों में लिखवाया कि
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एसा पोराणा पकिति अर्थात यही “धम्म की पुरातन / पोराणा रीति है”
“धम्म पहले ��े चला आ रहा है”
▪️साहित्यिक और पुरातात्विक दोनों सबूत बताते हैं कि धम्म ही सनातन है, धम्म ही पुरातन है।
▪️मतलब कि धम्म की परंपरा पहले से चली आ रही थी और बुद्ध के पहले भी बुद्ध हुए।
इसे जन-जन तक पहुँचाएँ। कोई सरकारी संस्था या कपंनी या विभाग SC/ST से नौकरी के एप्लिकेशन की फ़ीस लेता पकड़ा जाता है तो सवाल उठाएँ। भारत सरकार की नीति के खिलाफ काम करने वालों को सजा मिलनी चाहिए। @AmitShah@AmitShahOffice को सूचित करें।
कभी कभी मैं सोचता हूं क्या गाली - गलौज और धमकियों से डरकर मैं लिखना बंद कर दूंगा? या अपना ए��ाउंट समेट लूंगा? या रोना-धोना शुरू कर दूंगा? क्योंकि गालियां तो हर दिन आती हैं। धमकियां भी...आपको भी मिलती होंगी,सोशल मीडिया में यह कौन सी बड़ी बात है !!
फिर याद आती है माता सावित्रीबाई फुले की बीसेक साल की एक मासूम महिला। लगभग डेढ़ सौ साल पहले, पुणे के भिडेवाड़ा में देश के पहले गर्ल्स स्कूल में पढ़ाने जा रही है। लोग उनपर गोबर और गंदगी फेंक देते हैं,क्योंकि लड़कियों को पढ़ाना धर्म विरुद्ध है, उन���हें गालियां दी जाती हैं,सावित्रीबाई रुआंसी घर लौटती है,लेकिन हिम्मत नहीं छोड़ती।वह मानवतावादी मिशन पर है...अगले दिन वे फिर स्कूल जाती हैं।
आज उनके पास एक थैली है, जिसमें एक सेट एक्स्ट्रा साड़ी है. गालियों के साथ आज भी उनपर गोबर और नाली की गंदगी फेंकी जाती है, वे सब सह लेती है। स्कूल आकर साड़ी बदलती हैं और फातिमा शेख के साथ मिलकर लड़कियों को पढ़ाती हैं,महीनों तक हर दिन यह सिलसिला चलता है।फिर ब्राह्मणवादी लोग थक जाते हैं।मिशन की जीत होती है।
इसे मिशन की ताकत कहते हैं!! इसे विचारों की ���ाकत कहते हैं...
यह निजी मान,सम्मान,अपमान वगैरह से बहुत कीमती चीज है।
सावित्रीबाई इतिहास की महानायिका हैं।
उन पर गोबर और गंदगी फेंकने वाले इतिहास के कूड़ेदान में हैं।
गाली और आलोचनाओं के डर से चुप बैठ जाने वाले लोग चाहे जो कुछ हों, फुले-आंबेडकरवादी तो कतई नहीं हैं। आलोचना से घबरा कर रुक जाना इस परंपरा का हिस्सा नहीं है।
चुप बैठ जाने वाले भयभीत लोग दया के पात्र हैं।वे फैशन में हिस्सा लेने आए हैं. मानवतावादी मिशन से उनका कोई लेना देना नहीं है। वे फैशन परेड में आए थे,चले गए... फिर आ जाएंगे...फिर चल देंगे।
#सावित्री_बाई_फुले #सावित्रीबाई_फुले
भीमा कोरेगांव न होता,तो इस देश में बगावत की शुरुआत न होती। वहीं तय हुआ कि इस भौगोलिक हिस्से में रहने वाला हर आदमी,आदमी है।उसे आदमी मानना होगा, इंसान की गरिमा देनी होगी,उसे गुलाम मानना बंद करना होगा,वरना वह बगावत कर देगा और 500 लोग मिलकर 28,000 को खत्म कर देंगे।
सिर्फ 500 थे,लेकिन जज़्बा था कि जातिवाद को हराना है। वे जान पर खेले,कट मरे पर आख़िरकार, भीमा कोरेगाँव के मैदान से पेशवा की फ़ौज भाग गई
1 जनवरी 1818 को इसी दिन महार सैनिकों ने पेशवाई को हराकर भारत को जातिमुक्तपहला ऐतिहासिक क़दम ब���़ाया। बाबा साहब का कोरेगांव स्तंभ पर ऐतिहासिक फ़ोटो
मेरे गृह जिले जोधपुर के सपूत एवं 1962 के भारत चीन युद्ध में शहीद हुए परमवीर चक्र विजेता मेजर शैतान सिंह जी के भारत-चीन सीमा पर बने मेमोरियल को हटाने की खबर सुनकर मारवाड़ सहित पूरे देशवासियों को आघात लगा है।
1962 में एक छात्र के रूप में मैं भी मेजर शैतान सिंह जी के अंतिम संस्कार में शामिल हुआ था और बजट 2023-24 में जोधपुर में मेजर शैतान सिंह जी की स्मृति में म्यूजियम बनाने के लिए 75 करोड़ ��ुपए का प्रावधान किया था।
बेहतर होता कि किसी भी कारणवश मेमोरियल हटाने से पहले केन्द्र सरकार आधिकारिक रूप से इस संबंध में जानकारी देती।
वाल्मीकि रामायण, उत्तर काण्ड, बयालीसवां सर्ग
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राम स्वयं सीता को नशीली मदिरा मैरेय पिला रहे हैं जैसे शची को इंद्र पिलाया करते हैं-
सीतामादाय हस्तेन मधु मैरेयकं शुचि।।
पाययामास ककुस्त्थ: शचीमिव पुरंदर:।।18।।
और फिर उनके खाने के लिए सेवक अच्छी तरह पकाए गए मांस और भांति भांति के फल शीघ्र ले आते हैं-
मांसानि च सुमृष्टानि फलानि विविधानि च।।
रामास्याभ्यवहारार्थं किंकरास्तूर्तमाहरन्।। 19।।
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योग-मार्ग वैष्णव धर्म का विरोधी नास्तिक दर्शन था
सो योगी ने श्रीराम और सीता माता के प्रिय खान-पान पर पाबंदी लगा दी
भगवद् गीता में कृष्ण अर्जुन को गृहयुद्ध करने के लिए मोटीवेट करने में सफल हो जाते ��ै लेकिन दुर्योधन को 5 गाँव देने तक लिये मोटीवेट नहीं कर पाते।
क्या कृष्ण ईश्वर नहीं थे?
अगर नहीं तो फिर भगवद गीता चैप्टर 4 श्लोक 13 में वो ये क्यों कहते है कि चारो वर्ण को उन्होंने ने ही बनाया है।
यह तस्वीर गाजा या यूक्रेन की नहीं,मणिपुर की है।जहां सोंगपी जिले के सेहकेन में 87 कुकी आदिवासी लोगों का अंतिम संस्कार किया गया।ये शव 7 महिने से इम्फाल के मुर्दाघरों में लावारिश पड़े थे,जिन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद घरों तक सरकार द्वारा पहुंचाया गया है#SaveManipurTribals
आज हमारी ओलंपिक मेडलिस्ट बेटी रो रही है ये हो रहा है जाटों का अपमान।
अरे जाटों चुल्लू भर पानी में डूब मरो ,अगर तुम अब भी पार्टियों के झंडे उठाते फिर रहे हो।
अपनी बेटियों को रोते देखकर भी तुम्हारा खून नहीं खौला तो समझो तुम्हारा जमींर मर चुका है।
#जाट_समाज
एक समय था ऊंची जाति के लोग नीची जाति के लोगों को पसंद नहीं करते थे।
बस फिर क्या समय का पईया घूमा अब नीची जाति के लोग ऊंची जाति के लोगों को पसंद नहीं करते हैं।।
#Not_Your_Dalit_Tavleen
बुलडोजर की कार्यवाही से अगर अपराधी अपराध करना छोड़ देते तो अब तक यूपी अपराध मुक्त हो गया होता लेकिन यूपी में सबसे ज़्यादा अपराध होता है ,
इसका मतलब साफ है कि बुलडोजर की कार्यवाही सिर्फ नफरत को बढ़ावा देने और एक विशेष वर्ग को खुश रखने के लिए की जा रही है।।
आज की घटना के बहुत से पहलु और उसे देखने के नजरिए हो सकते हैं -
एक नजरिया - भाजपा सरकार देश और संसद दोनों की रक्षा करने में फेल साबित हुई है,
दूसरा नजरिया -
भारत की एक युवा, पढ़ी लिखी, बेरोजगार बेटी ने आज अपने साथियों के साथ देश के #संविधान और करोडों युवाओं के हक़-अधिकारों की ख़ातिर तानाशाह, गुंगी, बहरी सरकार की दीवारें हिला कर रख दी.. नाम है #नीलम
उम्मीद करते हैं कुम्भकर्ण की नींद सो रही भाजपा सरकार अब तो जागेगी और देश के करोडों युवा बेरोजगारो�� के बारे में सोचेगी.
#ParliamentAttack #BhagatSingh