पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी जी को उनकी जयंती पर सादर नमन।
उनके साहसिक एवं निडर नेतृत्व, निर्णायक दूरदर्शिता ने एक मजबूत आत्मनिर्भर राष्ट्र का निर्माण किया, जिसने कभी किसी महाशक्ति के आगे घुटने नहीं टेके।
🙏🏻
#IronLady#IndiraIsIndia#IndiraGandhi#impreetsharma
भारत के किसी भी नागरिक को #ट्रंप पर भरोसा नहीं है, केवल #बीजेपी और #PMModi को उन पर भरोसा है।
आज G-7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री जी ने कहा कि हमारे #नाविकों की जान गई, जो कायरता की निशानी है। मोदी जी “जान गई” नहीं है, बल्कि #अमेरिकी_सैनिकों द्वारा उनकी “जान ली गई” है, अर्थात् उनकी हत्या की गई है। हमारे नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान का मामला है और आप अब भी चुप्पी साधे हुए हैं।
बेहद शर्मनाक बयान
#Vantara #Melodi #Modiji #G7 #RahulGandhi #Trump #IranWar @srivatsayb@vivek83srivast1@Ashfaq_Joiya21@garrywalia_
हम अपने सपनों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं और इसमें परिवार की गाढ़ी कमाई लगती है, लेकिन फिर पेपर लीक हो जाता है.
मोदी सरकार ने हमारे भरोसे की धज्जियां उड़ा दीं हैं. असल में नरेंद्र मोदी को देश और छात्रों की परवाह ही नहीं है.
महाराष्ट्र के अहमदनगर स्थित ब्राह्मण गली में बकरीद के दिन मांस फेंके जाने की घटना से क्षेत्र में तनाव फैल गया था। सीसीटीवी फुटेज में बुर्का पहने एक महिला संदिग्ध तरीके से मांस से भरा पैकेट फेंकती हुई दिखाई दी, जिसके बाद मामला गंभीर विवाद का विषय बन गया।
लगभग दो सप्ताह तक चली गहन जांच और 150 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने के बाद पुलिस ने आरोपी की पहचान स्वाती विक्रम भोसले के रूप में की। पुलिस के अनुसार, स्वाती हिंदू समुदाय से संबंधित है और उसने अपनी पहचान छिपाने के उद्देश्य से बुर्का पहन रखा था।
पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
भारत के ख़िलाफ़ हर बार पाकिस्तान की मदद करने वाला अमेरिका हमला होने पर भारत की मदद का वादा कर रहा है.
अग्रेजों ने भारतीय राजाओं से एकदम यही वादा किया था जो आज अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कर रहे हैं.
अंग्रेजों ने भारत की कैसी दुर्दशा की, ये भारत का बच्चा-बच्चा जानता है, पूरी दुनिया जानती है, लेकिन शायद मोदीजी इतिहास को भूल रहे हैं.
भारत अपनी सुरक्षा ख़ुद कर सकता है, उसे अपनी सुरक्षा के लिए पाकिस्तान के आका की ज़रूरत नहीं है.
India’s Education System is an EXTORTION MACHINE
One Exam - NEET - which 22 lakh kids write costs to their families the same as Indian Govt’s Education Budget.
Parents are spending ₹2lakh to ₹10 lakh on their child’s NEET preparation. Costs including coaching, hostel, lodging, fees etc.
On an average, NEET families are spending ₹6 lakh per child. This isn’t education. This is extortion. And families are going into huge Debts.
The kids are huge financial and mental burden because of this extortion system which LOP Rahul Gandhi told the world today
Don’t miss this presentation by RG. Take 45 mins out and watch him launch a nationwide movement to rebuild India’s education system.
RAHUL GANDHI : "Prime Minister...."
OM BIRLA : NOOOOO 😖
RAHUL GANDHI : "Prime Minister...."
OM BIRLA : NOOOOO 😖
RAHUL GANDHI : Do one thing, you write my speech and i will read 😂
What a brilliant set up by #RahulGandhi, this is viral with 30 million views on Instagram 🔥
12 सालों में भगतों के लिए गोदी ने एक गजबे पैरलल वर्ल्ड क्रिएट कर दिया है, जिसमेंः-
मोदी सबको सुना रहा है...
मोदी सबको डाँट रहा है...
मोदी सबको सिखा रहा है...
मोदी सबको रस्ता दिखा रहा है...
मोदी से सब काँप रहे हैं...
मोदी को सब बॉस बोल रहे हैं...
मोदी के लिए सब कुर्सी छोड़ रहे हैं...
बाक़ी उस असल दुनिया में मोदी की असलियत और हैसियत क्या है, इससे कोई मतलब नहीं है. इस पैरलल वर्ल्ड वाली छवि से मोदी (और गोदी का) भारत में काम बनता रहे बस! और क्या चाहिए बॉस!
कल फ़्रांस में वर्सिलिया के ऐतिहासिक महल में ट्रम्प ने ईरान से हुई संधि के मसौदे पर दस्तख़त किए।
1919 में वर्सिलिया में ही एक संधि पर दस्तख़त हुए थे और पहला विश्वयुद्ध ख़त्म हो गया था।
उस वक़्त यह संधि जर्मनी के लिए अपमानजनक थी और दूसरी आलमी जंग की वजह बनी।
कल हुई संधि अगर किसी के लिए अपमानजनक है तो इज़रायल के लिए। पहले विश्वयुद्ध के वक़्त हिटलर के होलोकास्ट का शिकार हुए लोगों के नाम पर बना देश अपने इतिहास में पहली बार निर्णायक तौर पर हारा है और वह भी उस ईरान से जिसे ख़त्म करने की साज़िश 30 साल से नेतन्याहू कर रहा है। नए हिटलर उसकी गद्दी पर क़ब्ज़े की ताक में हैं। जनता का सर्वजेता होने का ख़्वाब वैसे ही टूटा है, जैसे जर्मनी में 1919 में टूटा था। यह भ्रम कि नेताओं ने सेना के साथ धोखा किया।
क्या इतिहास ख़ुद को दुहराएगा?