ग़ज़ल
थक गया करके इंतज़ार उसका
उठ गया अब तो एतबार उसका।
बेख़याली में भी ख़याल मुझे
जाने क्यों आया बार-बार उसका।
जैसी करनी थी वैसी भरनी है
बेवफ़ा हो चुका है यार उसका।
बेवफ़ाई तो उसका शेवा है
क्यों गरीबां है तार तार उसका।
Gen-Z तुम्हे ऐसे ही कॉकरोच नहीं कहा गया, बार बार सरकार से पेपर लीक पर बात करते हो, रोज़गार पर बात करते हो, महंगाई पे बात करते हो अर्थ व्यवस्था पर बात करते हो इस लिए सरकार की निगाह में तुम कॉक्रोच हो।
कभी हिन्दू मुस्लिम पर बात करो
कभी दंगे करने की बात करो
कभी रेप करने की बात करो
कभी मोदी के नाम पर देश बर्बाद करने की बात करो
तब जा कर तुम सच्चे अच्छे और नेक भारतवासी कहलाओगे!
सालों जेल में रहने के बाद भी शहीद भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस, जवाहर लाल नेहरू ने कभी अंग्रेजों के सामने सर कह कर बात नहीं की मगर 56 इंच वाला See More....
यदि आप भारतीय मुस्लिम हैं, तो आपके खिलाफ लगे आरोपों की जांच या उन्हें साबित करने की कोई आवश्यकता नहीं है—आपका मुस्लिम होना ही आपके अपराध का प्रमाण माना जाता है। अलथान में, अज़ीज़ नाम के एक व्यक्ति पर पाटीदार समुदाय की एक महिला के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया था। पुलिस ने उसे घुमाया और सजा के लिए भीड़ के हवाले कर दिया; यहां तक कि पुलिसकर्मियों ने भी उस पर हमला किया।
बीजेपी वालों होशियार हो जाओ जनता तुम्हारी सारी काली करतूतों को जान चुकी है!
बंगालवासियों बहुत सावधानी से वोट करना वरना जिस तरह दिल्ली गंदी हो चुकी है कहीं बंगाल का नंबर भी न लग जाए!
नारी शक्ति और नारी सुरक्षा का दम भरने वाली सरकार का रवैया कुछ ऐसा है!
जुमले,और झूठ पर टिकी इस सरकार को न देश के जवान बेटों को नौकरी देनी है, न बेटियों को सम्मान!
ये ढोंगी आंसू किस लिए बहा रहा है?
क्या चुनाव हारने के बाद जेल जाने से या सत्ता सुख भोग चुके महाराज को सत्ता जाने के डर से?
सॉलिड जवाब देने वाले को मै स्वयं फॉलो करूंगा!
“सदियों की कमजोरी और बिखराव के बाद आज एक नई सोच उभरती दिख रही है — जहां पहचान फिर से ताक़त बन रही है,
और इरादे फिर से बुलंद हो रहे हैं। Iran का खड़ा होना सिर्फ एक देश की कहानी नहीं, बल्कि ये एक पैग़ाम है कि हिम्मत, यक़ीन और एकता हो तो हालात बदलते देर नहीं लगती।
हमारी असली पहचान किसी फिरके या नाम में नहीं, बल्कि उस एकता में है जो हमें जोड़ती है। न देवबंदी, न ब्रेलवी, न शिया, न सुन्नी — अगर कोई पहचान है तो वो सिर्फ एक है:
उम्मत की, एक होने की, खड़े होने की।दुनिया की बड़ी ताक़तों के सामने खड़े होने का हौसला सिर्फ हथियारों से नहीं आता, बल्कि यक़ीन, सब्र और एकजुट इरादों से आता है। और जब ये तीनों मिल जाएं, तो इतिहास खुद को दोहराने से पहले सोचता है।
वक़्त आ गया है कि बिखराव से ऊपर उठकर एक नई सोच के साथ आगे बढ़ा जाए — क्योंकि जब उम्मत एक होती है, तो उसका असर सिर्फ सीमाओं तक नहीं, पूरी दुनिया तक जाता है।”
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भूरे लाल ने मसीहा बनने के चक्कर में अमरीका की सुपारी अनजाने में ईरान के हाथों सौंप दी है!!
अभी हरमूज़ का मसला हल नहीं हो पाया है कि ईरानी फ़ौज ने नई वार्निंग जारी कर दी है।
लाल सागर, अरब सागर और बाब अल मंदब भी दुश्मनों के लिए बंद कर सकने की वार्निंग।
गर ईरान और उसके सहयोगियों ने ऐसा कर दिया जंग बढ़ते ही तो यूरोप एशिया से पूरी तरह कट जाएगा। स्वेज़ कैनाल की कोई वैल्यू नहीं रह जाएगी। स्वेज़ कैनाल की वैल्यू ही मेडिटरेनियन सागर और लाल सागर से शिपिंग स्वेज़ कैनाल को जोड़ने की वजह से है और परेशानी ये है कि लाल सागर से हिन्द महासागर और अरब सागर तक पहुंचने के लिए जिस रास्ते से निकलना है वो है बाब अल मंदब। यमन अंसारल्लाह ने पहले भी इस रस्ते को रोका था ग़ज़ा के लिए और उसे दोबारा ऐसा करने से कोई नहीं रोक पाएगा।
दुनिया की कुल शिपिंग के तक़रीबन 50% पर कंट्रोल मतलब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को कंट्रोल कर लेना। यही वजह है कि भूरे लाल सकपकाए हुए वापस बातचीत का पैग़ाम भेजे हैं 😎