Tumhein chaha to bas itna qasoor tha hamara
Tumhein apna samajhna hi shayad qasoor tha hamara
Tum to aasani se bhool gaye humein
Ek tum hi to the jin par guroor tha hamara
आसू कई वज़ह से निकले हैं
कभी कुछ गहरा सोचता हू,
कभी प्यार महसूस करता हू,
कभी कोइ गलती याद करता हू
कभी प्रकृति की बनावट देखता हू
कभी लोगों की कहानिया पढ़ता हू
और भी ���हुत सारे कारण है आसू आने के
और मैं दिल खोल के ��सू बहा लेता हू क्यू की मैं पत्थर नहीं हू इंसान हू - रवि प्रकाश