@narendramodi@AmitShah ये सवर्ण बच्चा है अपनी मेहनत पर भरोसा करता है बैसाखी भी नहीं माँगता और कुछ जातिवादी लोगो को आपकी सरकार उन्हें एहसास दिलाती है कि वो अच्छुत है भिखमंगें है और फिर सारा जातिवादी दोष हम सवर्ण पर मढ़ते हो राजनीति बहुत हो गई सही रास्ते पर आइए
“पापा बीमार है, इसलिये काम करता हूँ”
“कभी कभी मामा और नानी हेल्प कर देती है”
ब्राह्मण बच्चा मेहनत करके ख़ुद घर चला रहा है, लेकिन सरकार की नज़र में सारे ब्राह्मण अम्बानी अड़ानी है। 🤦🏻♂️
पहला ट्वीट आपने ग़लत किया लोगों को भ्रमित करने के लिए फिर सफ़ाई दे दी आपने छोटे से शब्द में
$75 = ₹6750/-
भारत मे 1318 KM का किराया कितना है ? ₹2500-₹3000
और यदि आरक्षण और फ्रीबीज चाहिए तो विकासशील व विकसित देशो से तुलना मत करो, वहा आरक्षण नही है और आरक्षण देश का दीमक है
कितनी नफ़रती मानसिकता लेकर बैठे हो चिंटू कोई एक श्लोक बताना जहाँ पर स्त्रियों को हीन भावना से दिखाया गया है, हमारे यहाँ स्त्री को देवी का स्वरूप कहा जाता है और कितना गिरोगे राजनीतिक सफ़र तय करने के लिए 😡😡
अगर मनु आज जिंदा होता, तो इस तस्वीर को देखकर रो रहा होता क्योंकि जिन महिलाओं को उसने सदियों तक दबाकर रखने की कोशिश की, वही आज अपने हक़, सम्मान और अधिकार के लिए सीना तानकर खड़ी हैं।
1951 में पारंपरिक शहर-ड्यूल (अखाड़ा /मिट्टी की कुश्ती) में जिसमें ग्रेको-रोमन शैली पारंपरिक पहलवानी शामिल थी Dara Singh को Brahmdev Mishra से हार मिली थी
Dara Singh के प्रोफेशनल रेसलिंग रिकॉर्ड में, उनकी हार की यह घटना-मात्र बताई जाती है
लेकिन छाती पर बैठकर फोटो की बात झूठ है
इस बात में कितनी सच्चाई है…??
दारा सिंह को ब्रह्म देव नामक पहलवान ने डेढ़ मिनट में हराया…
छाती पर चढ़कर फ़ोटो खिंचवाई
उसी दिन से दारा सिंह ने अखाड़े वाली कुश्ती छोड़कर नक़ली कुश्ती खेलना शुरू कर दिया…!!
उनके अनुयायियों ने सभी को संकलित कर धम्म नाम दिया,जो आगे चलकर बौद्ध नाम से जाना जाने लगा बुद्ध ने कोई धर्म नहीं बनाया समझी, उन्हें जातिवादिता में मत बांट दिमाग़ 🧠 से पैदल लड़की !
आरक्षण मिला ज्ञान लेने के लिए पर अभी भी तुम अनपढ़ ही रह गई 😡
नीच मानसिकता की लड़की पहले शिक्षा ग्रहण कर उसके बाद ज्ञान देना
बुद्ध जी स्वयं सनातन में जन्मे और उनका पालन पोषण सनातन में हुआ क्षत्रिय कुल के थे उन्होंने कोई धर्म की स्थापना नहीं की बल्कि उन्होंने धर्म (धम्म) की शिक्षा दी — दुःख,उसके कारण,और उससे मुक्ति का मार्ग(अष्टांगिक मार्ग)
राम मंदिर हो CAA हो 370 हो ट्रिपल तलाख हो और चाहे वक़्फ़ हो
आप लोगों के सामने नेताओं से लेकर वकीलों तक एक ही ब्रिगेड है
समय रहते इनको पहचान लीजिए वरना देर हो जाएगी…..
‘इस्लाम में महिलाओं को वो दर्जा नहीं, जो सनातन धर्म में है’
अनवर ने इस्लाम त्याग की घर वापसी, बने राधेश्याम।
खंडवा के अनवर शेख ने सनातन धर्म की प्राचीनता और देवी पूजा से प्रभावित होकर इस्लाम छोड़ हिंदू धर्म अपनाया।
बीते कुछ वक्त में मध्य प्रदेश के खंडवा में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इस्लाम त्याग कर अपने मूल धर्म यानि कि सनातन धर्म में घर वापसी की है।
इसी क्रम में एक और नाम जुड़ गया है अनवर शेख का जो कि सनातन धर्म, उसका वैभव और उसमें स्त्रियों को देवी के रुप में पूजे जाने से काफी प्रभावित हैं, इसीलिए अनवर ने घर वापसी की।
संसद की क्या ही ज़रूरत है! आज खन्ना जी हैं! कल उनके दामाद, परसों दामाद के मौसेरे भाई और नरसों मौसेरे भाई के फुफेरे भाई ये देश चला ही लेंगे!
बेकार में ही चुनाव-उनाव कराए जाते हैं! संसद-वंसद चलाई जाती है!
आरडीएक्स
वेलकम फ़िल्म के ज़िल्लेइलाही यानी आरडीएक्स याद होंगे, जब कहते है न्याय हम करेंगे। इन दिनों भारत के सुप्रीम कोर्ट का एटीट्यूड कमोबेश ऐसा ही है।
नो इफ नो बट आईएम सुपर बॉस!
तभी तो देखिए तमिलनाडु सरकार के मामले पर राष्ट्रपति और उपराज्यपाल को अनुच्छेद 142 के तहत निर्देशक दिया है कि विधानसभा से पारित बिल को तीन महीने के भीतर मंजूरी दें, नहीं देते है तो बिल कानून मान्य होगा।
भारत के प्रथम नागरिक राष्ट्रपति को सीधे शक्ति प्रदर्शन दिखाए है। तो आज इंटर्न ग्रुप को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ ने कायदे से जजों को लपेटा है। कैश कांड वाले जज का भी जिक्र किया गया कि इतना बड़ा मामला हुआ और 7 दिनों तक किसी को खबर नहीं हुई।
धनकड़ जी क़ानून के अच्छे जानकार है, ऊपर से जाट है एक कहावत तो सुनी होगी ....अनपढ़ जाट पढ़ा जैसा, पढ़ा जाट खुदा जैसा तो आज इस खुदा ने अपना दम दिखा दिया और बढ़िया क्लास लगाई दी।
#WaqfAmendmentAct
माननीय सुप्रीम कोर्ट क्या "BY USER" वाला विशेषाधिकार मुसलमानों के लिए ही है? हमें राम कृष्ण की जन्मपत्री से लेकर जन्मस्थली तक का कागज़ दिखाना होगा? क्या कर्नाटक के वो किसान "किसान बाय यूजर्स" नहीं हैं जिनकी पुश्तें वहां खेती कर रही ?
जिस सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर जन्मस्थान के सैंकड़ो सबूत मांगे थे उसका कहना है पुरानी मस्जिदों के कागज कहाँ से मिलेंगे??
वाह रे सेकुलरिज्म तेरे रूप गजब हैं।
कह रहीम कैसे निभै, केर बेर को संग…
ये सर्वविदित है कि बिल संसद में पास होने के बाद धरा का कानून बन जाता है।आज वक़्फ़ के समर्थन और विरोध में देश के सारे राजनैतिक दल और विचारधाराएं दो धड़े में बटी हुई हैं, पक्ष हो या विपक्ष इतना तो सभी मानेंगे कि पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में जिन पिता पुत्र कि निर्मम हत्या की गयी, जिनके घर, दुकानें जलायी गयीं, लूटी गयीं, इतना ही नहीं जिन असंख्य हिन्दुओं को औरतों, बच्चों की जान और अस्मिता बचाने के लिए अपना घर, गांव छोड़कर पलायन करना पड़ा उनका वक़्फ़ संशोधन बिल से कोई लेना देना नहीं है, बिल के पास होने में उनकी कोई भूमिका नहीं है, उनको तो ये भी पता नहीं होगा कि ये वक़्फ़ क्या बला है।
आख़िर उनका दोष क्या था? मस्जिद के सामने ‘डीजे’ भी तो नहीं बजा रहे थे! वक्फ़ एक्ट का बहाना लेकर ‘अल्पसंख्यकों’ ने अकारण बिना उकसाये जो सुनियोजित हिंसक हमला किया है, आये दिन ऐसे हमले झेलना अब हिन्दुओं की नियति बन चुकी है। आख़िर हिन्दू कब तक और कहां तक भागेगा? बांग्लादेश से तो ये सोचकर भागे थे कि भारत में सुरक्षित रहेंगे, अब यहां से भागकर कहां जायेंगे?
संसद से लेकर सड़कों तक आये दिन संविधान लहराने वालों को भी याद रखना चाहिए कि संविधान शिल्पी बाबा साहब के संविधान में वक़्फ़ नाम का शब्द कभी था ही नहीं, न ही उनकी परिकल्पना में इसका कोई औचित्य था। हत्या, लूटपाट और बर्बरता ‘काफ़िरों’ के साथ हो रही है, मारने के पहले किसी की जाति नहीं पूछी जा रही है। सबसे बड़ी विडंबना तो ये है कि पिछड़ों और दलितों के तथाकथित स्वयंभू नेताओं की इसपर मुंह खोलने की हिम्मत तक नहीं है।
बिल तो बस बहाना है, मक़्सद ‘काफ़िरों’ को मिटाना है।
धर्मो रक्षति रक्षितः
सुप्रीम कोर्ट पूछ रहा है कि क्या हिंदू बोर्ड में मुसलमानों को रखेंगे?
सरकार के वकील को भी बोलना चाहिए कि
हाँ, रख लेंगे पहले हिंदू-मुसलमान का तराजू बराबर कर दो पहले आप। हिंदू को भी जहाँ उँगली रख दी वो ज़मीन अपनी घोषित करने का अधिकार दे दो। फिर अगले पचास सत्तर साल संसद से लेकर पूरे के पूरे गाँव तक को हिंदू की प्रॉपर्टी घोषित करने दे दो। फिर हिंदू ट्रिब्यूनल भी बना दो। फिर आप जहाँ कहोगे वहाँ 20 सदस्यों में से 2 मुस्लिम या किसी भी ग़ैर हिंदू को सदस्य रख लेंगे। पहले ये वाला तराजू बराबर कर दो बस, उसके बाद बराबरी की बात करते हैं।
हिन्दुओं के प्रति इतनी घृणा आती कहां से है?
होटल में हाथ पोछने के नैपकिन में हिन्दू देवी देवता की तस्वीर बना दी।
ताकि जब लोग खाना खाकर नैपकिन में हाथ पोछे तो देवी देवताओं को अपमानित किया जा सके।
घटना अलीगढ़ के ख़्वाजा होटल की है, होटल मालिक मोहम्मद सलीम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।