भारत की शिक्षा व्यवस्था आज सिर्फ़ एक वसूली तंत्र बन गई है।
ज़रा सोचिए - देशभर के परिवार जितना पैसा सिर्फ़ NEET की तैयारी पर ख़र्च करते हैं, वो भारत सरकार के पूरे शिक्षा बजट के बराबर है।
आज कोटा से, और देश के हर कोने से, लाखों युवा एक सुर में कह रहे हैं - इस व्यवस्था ने हमारे साथ अन्याय किया है।
हर युवा अलग है, पर सबकी कहानी एक - या तो सपने देखने नहीं दिए गए, या देखे हुए सपने तोड़ दिए गए।
‘छात्रों की गूंज’ सिर्फ़ अभियान नहीं - एक क्रांति है। हमें एक ऐसी व्यवस्था बनानी है जो आपको बड़े सपने देखने का हक़ दे और आपकी ज़िंदगी गिरवी रखे बिना, उन्हें पूरा करने में आपका साथ दे।
#ChhatronKiGoonj
आज यहां 3,000 स्टूडेंट्स हैं।
⦿ 3,000 में सिर्फ 1 IAS बनेगा
⦿ 3,000 में सिर्फ 30 IIT में जाएंगे
⦿ 3,000 में सिर्फ 180 डॉक्टर बनेंगे
हिंदुस्तान में 'सलेक्शन सिस्टम' नहीं, 'रिजेक्शन सिस्टम' है।
- सुनिए नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi और स्टूडेंट्स के बीच देश के एजुकेशन सिस्टम पर क्या बात हुई 👇
कोटा में सरकारी लापरवाही से खुले गड्ढे में गिरने के कारण रिटायर्ड शिक्षक श्री रामेश्वर रावल की मृत्यु की दुखद घटना ने झकझोर कर रख दिया। आज कोटा में उनके निवास स्थान पहुंचकर शोक-संतप्त परिजनों से मुलाकात कर संवेदनाएं व्यक्त कीं और ईश्वर से इस कठिन समय में उन्हें संबल देने की प्रार्थना की।
पूरे जीवन समाज को देश निर्माण की राह दिखाने वाले शिक्षक की जान प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण चली गई जब वे रिटायरमेंट के बाद जीवन की एक नई पारी शुरू कर रहे थे।
यह संवेदनहीन और दुखद है कि राज्य सरकार की इस स्पष्ट लापरवाही से मौत के बावजूद पीड़ित परिवार को अब तक कोई मुआवजा या सहायता राशि नहीं दी गई है। सरकार को अपनी इस गंभीर लापरवाही की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए पीड़ित परिवार को तुरंत उचित सहायता प्रदान करनी चाहिए।
देश के युवाओं की आवाज़ को बुलंद करने के लिए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जी कोटा आ रहे हैं। आज जब छात्र पेपर लीक, बेरोज़गारी और बढ़ते मानसिक दबाव जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, तब उनकी बात सुनना और उनके साथ खड़ा होना समय की मांग है।
यदि छात्रों और कोचिंग संस्थानों पर किसी भी प्रकार का दबाव बनाकर उन्हें कार्यक्रम से दूर रखने की कोशिश की जा रही है, तो यह बेहद चिंताजनक है। लोकतंत्र में युवाओं की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता।
यदि ऐसा है,तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ है। विद्यार्थियों को अपनी बात रखने और अपने नेताओं से मिलने का पूरा अधिकार है।”
कोटा से उठने वाली युवाओं की यह आवाज़ पूरे देश तक पहुंचेगी।
– आपणो गहलोत
#AshokGehlot #AshokGehlot
गत रात्रि कोटा स्थित चंबल रिवर फ्रंट का भ्रमण करने का अवसर मिला।
मैं कह सकता हूं कि चंबल रिवर फ्रंट देश का सबसे भव्य और खूबसूरत रिवर फ्रंट है। यहां के स्थापत्य में राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आधुनिकता का जो सुंदर मेल दिखता है, वह इसे सच में बेमिसाल बनाता है।
यह परियोजना तत्कालीन कांग्रेस सरकार की दूरदर्शी सोच और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता का जीवंत प्रमाण है।
कोटा देश के लगभग सभी बड़े शहरों से रेल मार्ग द्वारा अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। मैं सभी से दिल से अपील करता हूं कि एक बार कोटा जरूर आएं और इस अद्भुत चंबल रिवर फ्रंट का आनंद लें। यह अनुभव आपको हमेशा याद रहेगा।
कोटा में प्रसूताओं की मौत के सम्बन्ध में मीडिया से बातचीत की :
देखिए बहुत ही गंभीर स्थिति है। जिस रूप में यह 4 मई से आने लगे अब आप सोच सकते हो कि 4 मई, 4 जून, लगभग डेढ़ महीना हो गया। तो इनमें से जो चार की डेथ हो गई है। और अभी तक उनका एफ़.एस.एल. वगैरह की रिपोर्ट आती है, अभी तक आई नहीं है। अब डॉक्टर कहते हैं चार-छह महीने लगते हैं। तो मालूम करना पड़ेगा वास्तव में चार-छह महीने लगते हैं या कम, या इमरजेंसी में और कहीं भेज के हम करवा सकते हैं क्या रिपोर्ट? राजस्थान के अलावा भी, यह तो हमें मालूम करना पड़ेगा, हमें मालूम नहीं।
बाकी जो पाँच पेशेंट भर्ती हैं, उनकी किडनी की स्थिति में थोड़ा-बहुत फ़र्क है। किसी की ज़्यादा, किसी की कम पर सबकी किडनी डैमेज है। ठीक है? डायलिसिस किसी की तीन बार होता है सप्ताह में, किसी की दो बार, किसी की एक बार होता है। ये स्थिति बनी हुई है।
परिवार वाले करीब-करीब ये सब गरीब हैं। एक भी परिवार ऐसा नहीं मिला जो कि यह सब कुछ करने के लिए सक्षम हो।
एक बेटा मान लो टैक्सी ड्राइवर था, वो टैक्सी बंद हो गई, ये सेवा कर रहा है वो। ये स्पेशल केस है, ये मामूली केस नहीं है कि किन कारणों से ये प्रसव के बाद में स्थिति बनी है, ये बताने के लिए कोई तैयार नहीं है। डॉक्टर भी कहते हैं हमें नहीं मालूम। टीमें आई हैं, एम्स की भी आई हैं और स्टेट गवर्नमेंट की भी आई है, उसका तो मैं स्वागत करता हूँ कि कम से कम टीमें आई हैं, एम्स की भी और स्टेट गवर्नमेंट की भी। उनकी रिपोर्ट क्या है? यह यहाँ के डॉक्टरों को मालूम नहीं है और यह स्थिति इतनी सीरियस है, ऐसी बातें पब्लिक से भी शेयर करनी चाहिए कि भाई, कुछ कमी रह गई थी दवाओं में? या इलाज में? देखभाल में? ये नौबत क्यों आई? क्योंकि प्राइवेट हॉस्पिटल में दवाएं वही है कह रहे हैं। यहाँ के डॉक्टर कह रहे हैं प्राइवेट अस्पताल में दवाएं वही थी, वहाँ ये स्थिति नहीं बनी है। तो वहाँ नहीं बनी फिर यहाँ ही क्यों बनी? जेके के अंदर भी दो डेथ हुई। तो जेके में दो डेथ हुई, यहाँ चार डेथ, यहाँ दो? तीन डेथ। तीन डेथ, यहाँ आ गए, वो यहाँ आ गए शिफ्ट हो गए थे। यहाँ भी, आप ठीक कह रहे हैं। तो ये स्थिति है। मेरी मांग मुख्यमंत्री जी से और स्वास्थ्य मंत्री जी यह रहेगी कि इस केस को आप स्पेशल मानो। खाली इलाज फ्री हो गया, उसमें भी क्या है? कई लोग समझते नहीं हैं। दवाएं जैनरिक दी जा रही है मान लो। हमने खुद ने फैसला किया 10 साल पहले जैनरिक दवाओं का, डायलिसिस फ्री किया हम लोगों ने।
परंतु कई लोगों को भ्रम रहता है, कई लोग कहते हैं ब्रांडेड दवाएं दो तो ज़्यादा से जल्दी ठीक हो जाते हैं। कुछ लोगों ने शिकायत करी, तो उनको भी तसल्ली दिलानी चाहिए कि जैनरिक दवाएं और ब्रांडेड में कोई फ़र्क नहीं है। फिर भी मान लो, क्योंकि स्पेशल केस है, तो मान लो पाँच मरीजों के लिए आप ब्रांडेड दवाएं देकर इनको खुश कर सकते हैं। कॉन्फिडेंस बिल्ड कर सकते हैं, तो करना चाहिए। बात छोटी सी होती है। कुछ इनको इमदाद मिलनी चाहिए। किसी के निधन पर इमदाद करते हैं लोगों की।
उनकी तो ऐसी स्थिति है जो डेढ़-डेढ़ महीने से भुगत रहे हैं बेड पर। डीमोरलाइज हैं, ठीक होंगे तो बाद में हमारा क्या होगा? किडनी हमारी खराब हो गई तो डायलिसिस रोज कौन करेगा? यहाँ आने देंगे क्या? ये उनको भ्रम था तो मैंने डॉक्टर से बात करी और उनको विश्वास दिलाया कि आपको कोई मना नहीं करेगा। आप आएं, डायलिसिस करवाएं।
पर जिंदगी में डायलिसिस पे जिंदा रहे आदमी, वो ही बहुत बड़ी बात है ना? अगर आपकी किडनियां खराब हो गई है, इलाज के अभाव में या गलत दवाओं से या किन कारणों से, तो सरकार का सबसे पहला काम है कि इसकी तह में जाना चाहिए कि ये हुआ क्यों है? लोग मरे क्यों हैं और क्यों भुगत रहे हैं? ये मालूम जब तक नहीं होगा, तब तक आगे बात बढ़ेगी ही नहीं। ये हम कह के आए है। 1/2
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आज कोटा एयरपोर्ट पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी का स्वागत किया।
श्री राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर कोटा में स्टूडेंट्स में बड़ा उत्साह है। भाजपा सरकार द्वारा रोकने के प्रयासों के बावजूद बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स कोटा के दशहरा मैदान में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने पहुंच रहे हैं। @RahulGandhi