सर-ए-तूर हो सर-ए-हश्र हो हमें इंतिज़ार क़ुबूल है
वो कभी मिलें वो कहीं मिलें वो कभी सही वो कहीं सही
न हो उन पे जो मिरा बस नहीं कि ये 'आशिक़ी है हवस नहीं
मैं उन्हीं का था मैं उन्हीं का हूँ वो मिरे नहीं तो नहीं सही
~पीर नसीरुद्दीन नसीर
दिल गुमाँ था गुमानियाँ थे हम
हाँ मियाँ दासतानियाँ थे हम
हम सुने और सुनाए जाते थे
रात भर की कहानियाँ थे हम
जाने हम किस की बूद का थे सुबूत
जाने किस की निशानियाँ थे हम
~ #जौन_एलिया@JaunSee
ख़ुश हैं तो फिर मुसाफ़िर-ए-दुनिया नहीं हैं आप
इस दश्त में बस आबला-पाई है रोइए
हम हैं असीर-ए-ज़ब्त इजाज़त नहीं हमें
रो पा रहे हैं आप बधाई है रोइए
~ अब्बास क़मर @Rekhta
I shall be telling this with a sigh
Somewhere ages and ages hence:
Two roads diverged in a wood, and I -
I took the one less traveled by,
And that has made all the difference. - Robert Frost
#rekhta#urdushayari#penguin#robertfrost#explore
जो रानाई निगाहों के लिए फ़िरदौस-ए-जल्वा है
लिबास-ए-मुफ़्लिसी में कितनी बे-क़ीमत नज़र आती
यहाँ तो जाज़बिय्यत भी है दौलत ही की पर्वर्दा
ये लड़की फ़ाक़ा-कश होती तो बद-सूरत नज़र आती
~Jaun eliya @JaunSee