संवैधानिक समानता का मतलब हर व्यक्ति को समान अवसर मिलने से होता है,यदि आप प्रतिभा को किनारे कर देंगे,तो आने वाले देश के भविष्य के साथ एक खिलवाड़ होगा।
एक तरफ आप विश्वगुरु बनने की बात करते है,और वहीं दूसरी तरफ आप talent को मौका ही नहीं देते।
अगर यही हाल रहा तो विश्वगुरु तो नहीं पर गुरुघंटाल बनने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा देश को।
व्यवस्था में सुधार की जो मांग है,वो बिल्कुल सही है।