आजादी के बाद पहली बार पारंपरिक कारीगरों और हस्तशिल्पियों की सुध लेकर उन्हें टूलकिट, आधुनिक ट्रेनिंग और सस्ते बैंक ऋण की सुविधा उपलब्ध कराने वाले देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को उनके जन्मदिन की अनंत शुभकामनाएँ!
आदरणीय प्रधानमंत्री जी के दूरदर्शी नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार का ही परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में 3 करोड़ से अधिक हस्तशिल्पी और कारीगर रोजगार प्राप्त कर स्वावलंबन का जीवन जी रहे हैं। आधुनिक भारत में भगवान विश्वकर्मा के अनमोल शिल्प को नई तकनीक, बेहतरीन पैकेजिंग, डिज़ाइनिंग और नए बाजार से जोड़ने का जो अभूतपूर्व कार्य मोदी जी ने किया है, वह वंदनीय है। आज संपूर्ण देश ईश्वर से उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु होने की प्रार्थना कर रहा है, ताकि उनके सशक्त मार्गदर्शन में हमारे कारीगर, युवा और आधी आबादी (नारी शक्ति) मिलकर 'आत्मनिर्भर' व 'विकसित भारत' के संकल्प को पूरी तरह से साकार कर सकें।
पहले मंत्री पद से बर्खास्तगी, फिर सीधे पार्टी से बाहर का रास्ता, और अब लोहिया ट्रस्ट के अध्यक्ष पद से भी हटाना अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल यादव को एक के बाद एक कई बार सार्वजनिक रूप से अपमानित किया है।
हर बार शिवपाल यादव ने संयम दिखाया, लेकिन अब लगता है सब्र का बांध टूट चुका है। जसवंतनगर में हुई गहन मंथन बैठक और अब आरएलडी की तरफ बढ़ते कदम इस बात का सबूत हैं कि सपा का यह पुराना पारिवारिक झगड़ा अब पूरी तरह खुलकर सड़क पर आ गया है।
गेबी हनुमान गली के बाहर बैठने वाले हिन्दू बाबा के साथ दुर्व्यवहार लूट-पाट
देखने में यह सभी म्लेच्छों कि नाजायज़ औलादें लग रही है गिरफ्तारी से इस आशांका कि पुष्टि होगी।
@sp_ujjain@collectorUJN@DrMohanYadav51@UjjainPolice
दो दोस्तों ने शुरू की कंपनी, बंटवारे के बाद एक पाकिस्तान चला गया और कंपनी बनी M&M: महिंद्रा की पूरी संघर्ष से सफलता की कहानी
आज जब भारत की सड़कों पर Mahindra Scorpio, Thar, XUV, Bolero जैसी गाड़ियां दिखाई देती हैं, तो शायद ही कोई सोचता है कि इस विशाल कारोबारी साम्राज्य की शुरुआत एक कार कंपनी के रूप में नहीं, बल्कि स्टील के कारोबार से हुई थी।
यह कहानी सिर्फ एक कंपनी के बनने की कहानी नहीं है। यह कहानी है—दो भाइयों, उनके एक कारोबारी साथी, देश के बंटवारे, मुश्किल परिस्थितियों और बदलते भारत के साथ खुद को बदलने की क्षमता की।
आज की Mahindra & Mahindra Ltd. की जड़ें 2 अक्टूबर 1945 तक जाती हैं। उस समय कंपनी का नाम Mahindra & Mohammed Ltd. था और इसकी स्थापना जगदीश चंद्र महिंद्रा (JC Mahindra), कैलाश चंद्र महिंद्रा (KC Mahindra) और मलिक गुलाम मोहम्मद ने मिलकर की थी। कंपनी की शुरुआत स्टील ट्रेडिंग से हुई थी।
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नौकरी छोड़कर शुरू किया अपना कारोबार
महिंद्रा की कहानी उस समय शुरू हुई जब भारत अंग्रेजी शासन से आजादी की तरफ बढ़ रहा था।
जगदीश चंद्र महिंद्रा, जिन्हें JC Mahindra के नाम से जाना जाता था, स्टील उद्योग की अच्छी समझ रखते थे। वे Tata Steel में काम कर चुके थे और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारत के Iron and Steel Controller भी रहे थे।
उनके छोटे भाई कैलाश चंद्र महिंद्रा, यानी KC Mahindra, भी कारोबार और उद्योग की समझ रखने वाले व्यक्ति थे।
दोनों भाइयों ने नौकरी छोड़कर अपना कारोबार शुरू करने का फैसला किया। उन्होंने अपने कारोबारी साथी मलिक गुलाम मोहम्मद के साथ मिलकर 1945 में मुंबई में कंपनी स्थापित की।
महिंद्रा की अपनी आधिकारिक कहानी के अनुसार, दोनों भाइयों ने अपना कोलकाता का घर बेचकर भी इस नए उद्यम के लिए पूंजी जुटाई थी। कंपनी का शुरुआती उद्देश्य स्टील ट्रेडिंग था।
उस समय भारत तेजी से औद्योगिक विकास की जरूरत महसूस कर रहा था। रेलवे, निर्माण, उद्योग और भविष्य के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए स्टील की आवश्यकता बढ़ने वाली थी।
इसलिए महिंद्रा भाइयों ने ऐसा कारोबार चुना जो आने वाले भारत की जरूरत से जुड़ा हुआ था।
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कंपनी का पहला नाम था Mahindra & Mohammed
2 अक्टूबर 1945 को कंपनी की शुरुआत Mahindra & Mohammed Ltd. के नाम से हुई।
यह कंपनी मुख्य रूप से स्टील की ट्रेडिंग करती थी और विदेशी स्टील उत्पादकों के लिए भारत में एजेंसी का काम भी करती थी।
लेकिन कंपनी के संस्थापकों का सपना केवल स्टील खरीदकर बेचने तक सीमित नहीं था।
JC Mahindra भारत में औद्योगिक विकास देखना चाहते थे।
महिंद्रा की आधिकारिक कहानी के अनुसार, 8 नवंबर 1945 को कंपनी के शुरुआती विज्ञापन में भारत के औद्योगिक विकास को लेकर उसकी सोच सामने रखी गई थी। यानी कंपनी का उद्देश्य केवल पैसा कमाना नहीं, बल्कि उस समय के भारत की औद्योगिक जरूरतों के साथ खुद को जोड़ना भी था।
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फिर आया 1947 का ऐतिहासिक मोड़
1947 भारत के इतिहास का सबसे बड़ा मोड़ था।
भारत आजाद हुआ, लेकिन इसके साथ देश का विभाजन भी हुआ।
इस विभाजन का असर सिर्फ आम लोगों पर नहीं पड़ा, बल्कि कारोबार और उद्योगों पर भी पड़ा।
महिंद्रा एंड मोहम्मद के तीन संस्थापकों में से एक मलिक गुलाम मोहम्मद पाकिस्तान चले गए।
बाद में वे पाकिस्तान के वित्त मंत्री बने और पाकिस्तान के शुरुआती शासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अब कंपनी के सामने एक बड़ी चुनौती थी।
एक तरफ देश का बंटवारा हो चुका था, दूसरी तरफ कंपनी के तीन संस्थापकों में से एक अलग देश में चला गया था।
लेकिन यहीं से कहानी ने एक नया मोड़ लिया।
कंपनी का नाम बदलकर Mahindra & Mahindra Ltd. कर दिया गया।
महिंद्रा की आधिकारिक टाइमलाइन 1948 में नाम बदलने को दर्ज करती है, जबकि कंपनी के कुछ अन्य आधिकारिक पन्ने इसे 1947 से जोड़ते हैं; इसलिए इसे स्वतंत्रता के बाद के शुरुआती वर्षों में हुआ पुनर्गठन समझना अधिक उचित है।
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स्टील से ऑटोमोबाइल तक बड़ा फैसला
अगर महिंद्रा सिर्फ स्टील ट्रेडिंग में ही रह जाती, तो शायद आज की Mahindra & Mahindra कहानी बिल्कुल अलग होती।
लेकिन कंपनी ने बदलते भारत की जरूरत को पहचाना।
आजादी के बाद भारत एक विशाल लेकिन मुख्य रूप से ग्रामीण अर्थव्यवस्था था।
सड़कों की स्थिति हर जगह अच्छी नहीं थी।
देश को ऐसे वाहनों की जरूरत थी जो कठिन रास्तों, गांवों और खराब सड़कों पर भी चल सकें।
यहीं से महिंद्रा का ऑटोमोबाइल कारोबार शुरू हुआ।
कंपनी ने अमेरिका की Willys-Overland से जुड़े Jeep वाहनों को भारत में लाने और असेंबल करने का काम शुरू किया।
शेष कमेंट मै !
पत्रकार — आप दलित हो आपके हाथ में ॐ लिखा है और हाथ में कलावा है.
पीड़ित परिवार - हम हिंदू हैं, मुस्लिम थोड़ी ना हैं. हिन्दुओं में तो कलवा पहनते हैं.
पत्रकार — आपके भाई की हत्या हो गई चंद्रशेखर रावण क्यों नहीं आया?
पीड़ित परिवार - चूंकि आरोपी मुस्लिम है.
पत्रकार — अगर आरोपी मुस्लिम नहीं होते तो?
पीड़ित परिवार - चंद्रशेखर 100% आता.
पत्रकार — अब किस पर भरोसा है?
पीड़ित परिवार - अब केवल योगी आदित्यनाथ जी पर भरोसा है.
यही है विपक्ष और रावण चन्द्र शेखर की राजनीति जब क्राइम करने वाला हो तो इन लोगों के मुंह पर टेप लग जाता है!
विश्वकर्मा जयंती आज:-
विश्वकर्मा दिवस या विश्वकर्मा जयंती या विश्वकर्मा पूजा भगवान विश्वकर्मा को समर्पित है, जिन्हें दुनिया का डिजाइनर माना जाता है। उन्होंने द्वारका के पवित्र शहर का निर्माण किया जिस पर श्रीकृष्ण का शासन था। भगवान विश्वकर्मा ने भी देवताओं के लिए कई हथियार बनाए। विश्वकर्मा दिवस प्रत्येक वर्ष भगवान विश्वकर्मा की जयंती मनाता है और ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार 17 सितंबर को मनाया जाता है। दिन की गणना बिसुधा सिद्धांत के आधार पर की जाती है। पूर्वी भारतीय राज्यों जैसे त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और झारखंड में विश्वकर्मा दिवस को विश्वकर्मा पूजा के रूप में मनाया जाता है। यह पूरे देश के शिल्पकारों और कारीगरों के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है। यह त्योहार बिहार और कुछ उत्तरी राज्यों में दिवाली के बाद मनाया जाता है।
विश्वकर्मा जयंती के दौरान अनुष्ठान:-
त्योहार के दिन कार्यालयों, कारखानों और कार्यस्थलों में विशेष पूजा और प्रार्थना की जाएगी। ऐसे स्थानों को फूलों से खूबसूरती से सजाया जाएगा।
भक्तों द्वारा भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। उनकी मूर्ति सजावटी पंडालों में स्थित है।
इस दिन श्रमिकों द्वारा औजारों की पूजा भी की जाती है। पूरा माहौल मनोरंजक और उल्लासपूर्ण है।
त्योहार के दिन, एक स्वादिष्ट दावत तैयार की जा रही है और श्रमिकों और मालिकों द्वारा एक साथ खाया जाता है।
विश्वकर्मा दिवस का महत्व:-
विश्वकर्मा दिवस हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए एक अनमोल दिन है। जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, यह दिन भगवान विश्वकर्मा का सम्मान करता है। ऋग्वेद में उनके योगदान की व्यापकता का विवरण दिया गया है। कार्यकर्ता समुदाय इस त्योहार को मस्ती के साथ मनाते हैं। यह अपने संबंधित क्षेत्रों में सफलता के लिए भगवान की पूजा करता है।
विश्वकर्मा पूजा की कथा :-
सूतजी बोले, प्राचीन समय की बात है, मुनि विश्वमित्र के बुलावे पर मुनि और संन्यासी लोग एक स्थान पर एकत्र हुए सभा करने के लिए। सभा में, मुनि विश्वमित्र ने सभी को संबोधित किया। मुनि विश्वमित्र ने कहा कि, हे मुनियों आश्रमों में दुष्ट राक्षस यज्ञ करने वाले हमारे लोगों को अपना भोजन बना लेते हैं। यज्ञों को नष्ट कर देते हैं। जिसके कारण हमारे पूजा-पाठ, ध्यान आदि में परेशानी हो रही है। इसलिए अब हमें तत्काल् उनके कुकृत्यों से बचने का कोई उपाय अवश्य करना चाहिए। मुनि विश्वमित्र की बातों को सुनकर वशिष्ठ मुनि कहने लगे कि एक बार पहले भी ऋषि-मुनियों पर इस प्रकार का संकट आया था। उस समय हम् सब मिलकर ब्रह्माजी के पास गए थे। ब्रह्माजी ने ऋषि मुनियों को संकट से छुटकारा पाने के लिए उपाय बताया था। ऋषि लोगों ने ध्यानपूर्वक वशिष्ठ मुनि की बातों को सुना और कहने लगे कि वशिष्ठ मुनि ने ठीक ही कहा है, हमें ब्रह्मदेव की ही शरण में जाना जाना चाहिए। ऐसा सुन सब ऋषि-मुनियों ने स्वर्ग को प्रस्थान किया। मुनियों के इस कष्ट को सुनकर ब्रह्माजी को बड़ा आश्चर्य हुआ। ब्रह्माजी कहने लगे कि, हे मुनियों राक्षसों से तो स्वर्ग में रहने वाले देवता को भी भय लगता रहता है। फिर मनुष्यों का तो कहना ही क्या जो बुढ़ापे और मृत्यु के दुखों में लिप्त रहते हैं। उन राक्षसों को नष्ट करने में श्री विश्वकर्मा समर्थ हैं, आप लोग श्रीविश्वकर्मा के शरण में जाएं। इस समय पृथ्वी पर अग्नि देवता के पुत्र मुनि अगिंरा यज्ञों में श्रेष्ठ पुरोहित हैं और जो श्री विश्वकर्मा के भक्त हैं। वही आपके दुखों को दूर कर सकते हैं, इसलिए हे मुनियों, आप उन्हीं के पास जाएं। सूतजी बोले, ब्रह्माजी के कथन के अनुसार मुनि लोग अगिंरा ऋषि के पास गए। मुनियों की बातों को सुनकर अगिंरा ऋषि ने कहा, हे मुनियों आप लोग क्यों व्यर्थ में इधर-उधर मारे-मारे फिर रहे हैं। दुखों दूर करने में विश्वकर्मा भगवान के अतिरिक्त और कोई भी समर्थ नहीं है।
अमावस्या के दिन, आप लोग अपने साधारण कर्मों को रोककर भक्ति पूर्वक श्रीविश्वकर्मा कथा सुनें और उनकी उपासना करें। आपके सारे कष्टों को विश्वकर्मा भगवान अवश्य दूर करेंगे। महर्षि अगिंरा के बातों को सुनकर सभी लोग अपने-अपने आश्रमों को चले गए। तत्प्रश्चात् अमावस्या के दिन, मुनियों ने यज्ञ किया। यज्ञ में विश्वकर्मा भगवान का पूजन किया। श्रीविश्वकर्मा कथा को सुना। जिसका परिणाम यह हुआ कि सारे राक्षस भस्म हो गए। यज्ञ विघ्नों से रहित हो गया, उनके सारे कष्ट दूर हो गए। जो मनुष्य भक्ति-भाव से विश्वकर्मा भगवान की पूजा करता है, वह सुखों को प्राप्त करता हुआ संसार में बड़े पद को प्राप्त करता है
LIVE: भगवान विश्वकर्मा की पावन जयंती पर गोरखपुर में आयोजित 'श्री श्री विश्वकर्मा पूजनोत्सव' कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी.
उत्तर प्रदेश में 'PM विश्वकर्मा' योजना एवं राज्य सरकार की नीतियों के माध्यम से करोड़ों कारीगरों और हस्तशिल्पियों को टूलकिट, प्रशिक्षण व बैंक ऋण की सुविधा से जोड़ा जा रहा है।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में प्रदेश के कारीगरों को स्वावलंबन और आत्मनिर्भर भारत का आधार बनाया जा रहा है।
#Gorakhpur #VishwakarmaJayanti #YogiAdityanath #UPGovt #SelfReliantIndia
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी को 76वें जन्मदिवस की हार्दिक बधाई। 🇮🇳🙏
आप स्वस्थ रहें और दीर्घायु हों।
मोतीझील, कानपुर में 17 सितंबर:
2 से 6 बजे — निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर
7 बजे — 76,000 दीप
8 बजे — ड्रोन शो
@irameshawasthi जी को इस विशेष पहल के लिए शुभकामनाएं।
#HappyBirthdayModiJi #SevaSankalpAbhiyan
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
भगवान शिव की कृपा से आप सभी के जीवन में स्वास्थ्य, शांति, सुख और समृद्धि बनी रहे।🙏
हर भय और संकट दूर हो, और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो। 🔱
🙏हर हर महादेव 🙏
#हर_हर_महादेव_शिव_शंभू_ॐ
Facts matter, especially when discussing a tragedy. The collapsed structure in Satya Niketan was a privately operated PG near Delhi University’s South Campus, not a DU or government building. Accountability must be based on verified facts, not misleading claims or narratives that distort ownership and responsibility.