दिल्ली की Gen-Z महिलाएं उन चीज़ों की मांग के लिए सड़कों पर उतर रही हैं जिनकी मांग कभी नहीं करनी पड़नी चाहिए थी-सुरक्षा, सम्मान और जवाबदेही।
उनका संदेश साफ़ है: महिलाएं बिना किसी डर के सड़कों पर चलने, बिना डरे अपनी बात कहने और सम्मान के साथ जीने की हकदार हैं।
यह सिर्फ़ एक विरोध-प्रदर्शन नहीं है।
पढ़िए। पूरा खेल।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सोमवार, 28 सितंबर को तीन हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की है। कॉलेजियम के प्रस्ताव के अनुसार गुजरात हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सुनीता अग्रवाल, दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और तेलंगाना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अपरेश कुमार सिंह के नाम की सिफारिश की गई है।
यह फैसला सोमवार को हुई कॉलेजियम की बैठक में लिया गया। कॉलेजियम में भारत के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के अलावा जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीएस नरसिम्हा शामिल हैं।
कॉलेजियम की सिफारिश सामने आने के बाद जजों की वरिष्ठता को लेकर सवाल भी उठाए जा रहे हैं। पूर्व नौकरशाह आशीष जोशी और पत्रकार मनीष छिब्बर ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कॉलेजियम की सिफारिश पर आपत्ति जताई है। उनका दावा है कि ऑल इंडिया सीनियरिटी के आधार पर शीर्ष तीन हाई कोर्ट चीफ जस्टिस के बजाय चौथे, पांचवें और छठे स्थान वाले नामों की सिफारिश की गई है।
आशीष जोशी ने इसे संस्थागत क्षरण से जोड़ते हुए कहा कि वरिष्ठता की अनदेखी से न्यायपालिका के भीतर मनोबल प्रभावित हो सकता है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर किसी वरिष्ठ को दरकिनार कर उससे जूनियर को पदोन्नत किया जाता है तो इसके स्पष्ट और रिकॉर्डेड कारण सार्वजनिक किए जाने चाहिए। ये टिप्पणियां उनके व्यक्तिगत विचार हैं।
मनीष छिब्बर ने भी सोशल मीडिया पर इसी मुद्दे को उठाते हुए कहा कि ऑल इंडिया सीनियरिटी में पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर रहने वाले नामों की जगह चौथे, पांचवें और छठे स्थान वाले मुख्य न्यायाधीशों की सिफारिश की गई है। वरिष्ठता सूची और कॉलेजियम की सिफारिश के बीच अंतर को लेकर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई है।
अगर केंद्र सरकार कॉलेजियम की इन सिफारिशों को मंजूरी दे देती है तो सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या 37 हो जाएगी। इसके साथ ही महिला न्यायाधीशों की संख्या दो से बढ़कर तीन होने की बात कही जा रही है। सुप्रीम कोर्ट में भारत के प्रधान न्यायाधीश समेत अधिकतम 38 न्यायाधीश हो सकते हैं।
उत्तर प्रदेश में @BhimArmyChief चन्द्रशेखर आजाद का खुमार सिर चढ़कर बोल रहा है🔥
वो "One Man Army" की तरह अकेले ही मैदान में डटे हुए हैं और पूरे सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष को चुनौती देते हुए यूपी की जनता के आगे नये विकल्प बन रहे हैं👇🏻
उत्तर प्रदेश में चन्द्रशेखर आजाद के बढ़ते प्रभाव को कोई नजरंदाज नहीं कर सकता
उनकी रैलियों में जो भीड़ उमड़ रही है वो अन्य पार्टियां तमाम संसाधन खर्च करके भी नहीं जुटा पाती हैं....!!
नेता विपक्ष श्री राहुल गांधी ने इस साल 3 जून को बताया था कि देश में भयंकर आर्थिक सुनामी आने वाली है।
अब वो बात सच साबित हो रही है 👇
• शेयर मार्केट लगातार गिर रहा है। सिर्फ 1 महीने में 17 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है
• सिर्फ 2 हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार 20 बिलियन डॉलर कम हो गया
• रुपया कमजोर है, महंगाई चरम पर है
• मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ सुस्त पड़ी है
• MSME बंद हो रहे, नौकरियां जा रही हैं
• बाजार में मंदी छाई हुई है
अगर वक्त रहते PM मोदी ने नेता विपक्ष श्री राहुल गांधी की बात सुनी होती और सही कदम उठाए होते तो आज भारत के लोग ये सब ना झेल रहे होते।
नरेंद्र मोदी ने सब बर्बाद कर रखा है।
एक ब्राह्मण व्यक्ति ने एक दलित किसान की ज़मीन पर जबरन कब्ज़ा कर लिया। जब अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया, तो उन्होंने पाया कि उसने दलित किसान की संपत्ति पर अवैध रूप से अतिक्रमण किया था।
निरीक्षण के बाद अधिकारियों ने SC/ST Act के तहत कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए।
पर सोशल मीडिया पर ब्राह्मणवादी बोल रहे हैं कि अधिकारी SC/ST Act की धमकी दे रहा है। अरे भाई, जब किसी की ज़मीन पर जबरन कब्ज़ा करोगे तो कार्रवाई तो होगी ही। गज़ब के लोग हैं भाई—एक तो चोरी, ऊपर से सीनाजोरी!
यमुना किनारे बेला एस्टेट में 728 लोग रहते हैं। SIR के बाद वोटर लिस्ट में सिर्फ़ एक नाम बचा - बाकी 727 नाम काट दिए गए।
ये लोग दशकों से यहाँ रह रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव और 2025 के दिल्ली चुनावों में वोट डाल चुके हैं। 2023 में इनके घर तोड़ दिए गए थे - पर ये कहीं नहीं गए, यहीं हैं।
आज मैं इनकी झुग्गी में गया और सीधे इन्हीं से सुना कि चुनाव आयोग ने इनके साथ क्या किया है।
SDM से फ़ोन पर मैंने यही कहा - मकान होने या न होने का वोट के अधिकार से कोई रिश्ता नहीं है। ख़ुद CEC ज्ञानेश कुमार कह चुके हैं कि "हाउस नंबर 0" बेघरों के लिए है। फिर भी 727 लोगों का नाम काट दिया गया।
यह SIR नहीं - यह वोट चोरी का तरीक़ा है। जिनके पास पहले ही सबसे कम है, उनसे उनकी इकलौती ताक़त छीनी जा रही है।
ज्ञानेश कुमार तो जाएँगे। पर जिस सिस्टम ने उनसे यह करवाया, उसका हिसाब भी होगा।
#VoteChori
गाजियाबाद के नंदग्राम में IIT की तैयारी कर रहे दलित छात्र आयुष प्रताप सिंह की 28 दिसंबर 2025 को हुई मृत्यु के मामले में उनके पिता, पूर्व वायुसैनिक खजान सिंह जाटव जी, न्याय के लिए हर स्तर पर अपनी गुहार लगा चुके हैं। कई महीनों से अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मिलने के बावजूद अभी तक परिवार को न्याय नहीं मिला।
अब न्याय की उम्मीद लेकर राहुल गांधी जी से गुहार लगाई है। @RahulGandhi जी, एक पिता अपने बेटे की मौत का सच और न्याय मांग रहा है। कृपया इस मामले को संज्ञान में लेकर परिवार की आवाज़ उठाने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराने में मदद करें।
@KhajanSing60833@myogiadityanath@UPGovt@NCSC_GoI
"मैं जीते जी तो आपका हूं ही, मरने के बाद भी अगर मेरी हड्डियों की जरूरत पड़े तो उन्हें भी काम में लेना लेकिन कभी अपने अधिकारों से समझौता नहीं करना"
संभल की चंदौसी विधानसभा में रैली को संबोधित करते हुए @BhimArmyChief चन्द्रशेखर आजाद 👇🏻
चन्द्रशेखर आजाद की इस ऐतिहासिक महारैली ने विरोधियों के हाथ-पांव फुला दिये हैं, बहुत बड़ा हुजूम उन्हें सुनने के लिए उमड़ा हुआ है....!!