*दुख दर्द पीर भारत*
*की नारी का ले गये ।*
*बाबा साहब तो बिन*
*राखी के सारे अधिकार दे गये।*
*बिगडा हुआ कल था*
*वो आज बना दिया है।*
*बाबा साहब ने नारी*
*को सरताज बना दिया है ।*
*मेरा साथ दे और*
*तू भी अपना रुख मोड़ ले ।*
*दूज दिवाली होली*
*मनाना तू भी छोड़ दे ।*
*रक्षा बंधन पर एक भीम अनुयाई भाई की अपनी बहिन से विनती*
*आहत न होना*
*मे दिल की खोल रहा हूँ ।*
*जय भीम दीदी*
*मैं तेरा भाई बोल रहा हूँ ।*
*तेरा घर है तू*
*सौ नहीं हज़ार बार आना ।*
*पर राखी बाँधने*
*तू कल मत आना।*