#समाज_की_शत्रु_सत्यार्थप्रकाश तीसरा समुल्लास सूर्यादि विषय का वर्णन करते हुए लिखा है कि- सूर्य पर भी मनुष्यादिक रहते हैं, वे वेद पढ़ते हैं। मानवधर्मी होते हुए भी सब प्रकार से सुखी हैं। उनका शरीर उज्जवल, तेजोमय और अत्यन्त सुखदायक है।
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#समाज_की_शत्रु_सत्यार्थप्रकाश
आर्य समाजी कालवा गुरुकुल के आचार्य ने स्वीकार किया कि सत्यार्थ प्रकाश मे 11 स्त्री-पुरुषो तक नियोग अर्थात दुष्कर्म करने की इजाजत दी गई है। इस बात को लेकर पूरे हरियाणा मे समाज शत्रु आर्य समाज का बहिष्कार किया जा रहा है।
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#समाज_की_शत्रु_सत्यार्थप्रकाश
सत्यार्थ प्रकाश (समुल्लास 4) में विधवा महिलाओं और गर्भवती पत्नी के संदर्भमें दिए गए नियमों पर महिला संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि यह सोच महिलाओं को केवल संतानोत्पत्ति का साधन मानने जैसी है,जो स्त्री सम्मान के सर्वथा विरुद्ध है।
#समाज_की_शत्रु_सत्यार्थप्रकाश
सत्यार्थ प्रकाश में विवाह की आयु और वैवाहिक नियमों से जुड़े विचार भी मिलते है। इनका मूल्यांकन करने के लिए मूल ग्रंथ के संबंधित अंश पढ़ें और स्वयं विचार करें।
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#समाज_की_शत्रु_सत्यार्थप्रकाश
दयानंद का कथन मां अपने बच्चे को केवल 6 दिन तक दूध पिलाये। उसके बाद धायी पिलाये।
दयानंद के ये वचन भांग के नशे में ही थे। और गरीब वर्ग के शोषण के लिए ही थे।
देखिए।
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#संतरामपालजी_Vs_महर्षिदयानंद
Dayanand was
against the service of parents
Dayanand Saraswati did not support the service of parents.
VS
In contrast, Sant Rampal Ji Maharaj instructs his disciples that serving parents is an absolute moral duty.
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#संतरामपालजी_Vs_महर्षिदयानंद
कबीर साहेब, गुरुनानक देव आदि जिन संतों को पूरी दुनिया पूजती है।
दयानंद सरस्वती ने अपनी पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश में उन्हीं महान संतों पर अपमान जनक टिप्पणियाँ कर उनका अपमान किया।
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#संतरामपालजी_Vs_महर्षिदयानंद
दयानंद सरस्वती अपनी पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश में लिखते हैं कि परमात्मा निराकार है। कहीं लिखते है कि स्तुति से परमात्मा का साक्षात्कार होता है। इससे पता चलता है यह अज्ञानी व्यक्ति थे।
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#संतरामपालजी_Vs_महर्षिदयानंद
महर्षि दयानंद ने पूज्य गुरु नानक देव जी के बारे में बहुत अपमानजनक बातें कही हैं। जबकि संत रामपाल जी महाराज जी ने हमेशा श्री गुरु नानक देव जी का सम्मान किया है और कहते हैं कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महापुरुषों की अमर वाणी है और पूजनीय है।
#संतरामपालजी_Vs_महर्षिदयानंद
महर्षि दयानंद ने कबीर परमेश्वर और कबीर पन्थियों की निंदा की है सत्यार्थ प्रकाश।
जबकि संत रामपाल जी महाराज जी ने कबीर साहेब को पवित्र वेदों से सिद्ध किया है कि काशी वाले कबीर साहेब ही पूर्ण परमात्मा हैं सारी सृष्टि के रचनहार हैं।
#वाहरे_समाज_नाशक_महर्षिदयानंद
सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 11, पृष्ठ 296 पर दयानंद सरस्वती ने संत शिरोमणि कबीर साहेब, जिन्होंने पूरे समाज को समरसता का मार्ग दिखाया, उनके विषय में जातिगत संदर्भ लेकर अपमानजनक टिप्पणियां कीं।
देखिए।
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#वाहरे_समाज_नाशक_महर्षिदयानंद
दयानंद सरस्वती आत्मकथा,पेज 17
महर्षि दयानंद समग्र क्रांति के अग्रदूत,पेज 21 एवं महर्षि दयानंद सरस्वती का जीवन चरित्र, पेज 50 मे उल्लेख है कि दयानंद जी चावल त्यागकर इतना अधिक भांग पी लिया करते थे कि बेसुध हो जाते थे।Factful Debates YouTube Channel
#वाहरे_समाज_नाशक_महर्षिदयानंद
समाज का नाशक
महर्षि दयानंद सरस्वती का जीवन चरित्र
पुस्तक (पृष्ठ 202) पर लिखा है कि
दयानंद जी तंबाकू खाते थे, सूंघते थे तथा
हुक्का भी पीते थे।
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#Destroyer_of_Society_Maharshi_Dayananand
On page 142 of the biography of Maharshi Dayanand Saraswati, it is written that when a devotee asked for a lota to pour water on Shiva, Dayanand Ji said-'Take some water in your mouth for gargling and spit it on top of him!' See
#वाहरे_समाज_नाशक_महर्षिदयानंद
सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 11, पृष्ठ 291 पर दयानंद सरस्वती ने लिखा है कि श्रावण मास में भक्तों के 'बम-बम' नाद की तुलना सीधे बकरे की आवाज़ से की गई और त्रिलोकीनाथ महादेव को 'प्रेतनाथ और 'भूतनाथ' कहकर उपहास उड़ाया गया है।
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#जीवन_रक्षक_पूर्ण_परमात्मा
जन्म-मरण के सबसे बड़े बंधन से मुक्ति
मानव जीवन का सबसे गंभीर बंधन जन्म, बुढ़ापा और मृत्यु का चक्र है। इस काल-चक्र से मुक्ति केवल तत्वदर्शी संत द्वारा बताए गए सत्य भक्ति मार्ग और मर्यादा से ही संभव है।
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#जीवन_रक्षक_पूर्ण_परमात्मा
परंपरा बनाम वास्तविक सुरक्षा
रक्षाबंधन पर कलाई पर बंधा धागा केवल एक औपचारिक रस्म बनकर रह गया है।यह धागा अकाल मृत्यु या जीवन के बड़े संकटों से रक्षा नहीं कर सकता;
जीवन की पूर्ण और वास्तविक सुरक्षा केवल पूर्ण परमात्मा की शरण में ही संभव है।
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#जीवन_रक्षक_पूर्ण_परमात्मा
Supreme God is the True Life Saver
Proofs in holy scriptures-such as Yajurveda Chapter 5, Mantra 32 and Rigveda Mandala 9, Sukta 82, Mantra 1
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#जीवन_रक्षक_पूर्ण_परमात्मा
यजुर्वेद अध्याय 8 मंत्र 13, ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 82 मंत्र 1 और ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 20 मंत्र 1 के प्रमाण बताते है कि संकटों का निवारण करने वाले, पापों का नाश करने वाले और जीवों के सच्चे रक्षक कविर्देव (कबीर परमेश्वर) हैं।
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#जीवन_रक्षक_पूर्ण_परमात्मा
सच्चा रक्षक कौन?
राखी बांधने से जीवन की हर विपत्ति और अकाल मृत्यु से रक्षा संभव नहीं है। वास्तव में सबका एकमात्र और सच्चा रक्षक पूर्ण परमात्मा (कविर्देव/कबीर साहेब) है, जो तीनों लोकों का भरण-पोषण करता है।
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