Don't call them "tourist"
They were not killed because of being tourist..
Call me wrong but this needs to avenged with all brutality
#PahalgamTerroristAttack#Pahalgam#IndianArmy
उद्वेश्य तो जानना ही हो सकता है। सब कुछ जान लेना। अध्ययन का, विज्ञान का, साहित्य का, कला का, ध्यान का, अध्यात्म का, धर्म का, मार्गों का। सभी मार्गों का उद्देश्य एक ही है - जानना। सब कुछ जान लेना। सभी कलाओं का ज्ञान, सभी विज्ञान का ज्ञान, सभी दर्शनों का ज्ञान, संपूर्ण धरा का ज्ञान, चराचर जगत की उत्पत्ति का ज्ञान, हमारे होने का ज्ञान।
बचपन से अभी तक की यात्रा में यही एक इच्छा है जो प्रश्न रूप में लगातार साथ है। सब कुछ जानने की इच्छा। अन्य सब कुछ परिवर्तित हो चुका है। शरीर वो नहीं है जो पहले था। हर पल परिवर्तन का शिकार है शरीर। विचार भी परिवर्तित हो रहे हैं। घर, परिवेश, वातावरण, देश, संसार तो परिवर्तनशील हैं ही। इच्छाएं भी अनंत प्रकट हुई, नष्ट हुई , परिवर्तित होती रहीं। एक इच्छा है, सब कुछ जान लेने की इच्छा, है जो अभी तक व्याप्त है। अटल सत्य की तरह जो स्थिर है। वो है सब कुछ जानने की इच्छा। स्वयं को जानने की, अन्य को जानने की , सर्वत्र को जान लेने की, सर्व शक्तिमान को जान लेने की। यह एक प्रश्न रूपी इच्छा हमेशा उठती रही। आत्म तत्व को जानने की इच्छा। जो परम तत्त्व है उसको जानने की इच्छा। उसका ज्ञान होना जिसके ज्ञान होने के बाद सारा अज्ञान समाप्त हो जाए। जिसको जानने के बाद कुछ जानना शेष न रह जाए उस विशेष को जानना।
वस्तुतः इच्छाएं विनाशी है। परंतु सब कुछ जानने की इच्छा अन्य इच्छाओं से श्रेष्ठ है क्योंकि यह दीर्घ काल से अडिग इच्छा है । यदि सत्य अनंत काल का है तो उसको अनंत काल की इच्छा से ही समझा जा सकता है। यह सब कुछ जानने की इच्छा लगातार साथ चल रही है।
इतना ज्ञात तो कई वर्ष पूर्व से हो ही रहा है कि वो जो बदल रहा है वो हम नहीं हैं। हमारे मूलस्वरूप के अलावा सब कुछ आभासी है। सिर्फ हमारा मूलस्वरूप ही सत्य है। वहीं हम स्थित हैं। हमारा वह स्वरूप शरीर, मन, बुद्धि , चित्त के परे है। हमारा वह स्वरूप स्थिर है और सत्य भी स्थिर है। स्थान , देश और काल के परिवर्तन होने पर भी हम स्थिर हैं। तो सत्य भी वही होगा जो स्थान, देश और काल की उलझनों में एक समान रहे।
वो सत्य जो भी है वो एक है और वही अनंत है। वही एक सत्य स्वयं को अनंत रूपों में अभिव्यक्त करता रहता है। इसलिए वो एक ही है और वो ही अनंत भी है। उसी एक को जानने की इच्छा जिससे अनंत को जाना जा सके। उसी अनंत को जानने की इच्छा जिससे उस एक को जाना जा सके। एक को जानकर अनंत को जाने की इच्छा और अनंत को जानकर उस एक को जानने की इच्छा। यह एक अविनाशी इच्छा सतत क्रियाशील है। यह लगातार बनी हुई है।
इस इच्छा के पूर्ण होने के कई असफल प्रयास भी हुए हैं। परंतु इस इच्छा के पूर्ण होने के रास्ते लगातार बदलते रहे। एक समय था जब घर - परिवार - परिवेश में ही सब कुछ जानने का प्रयास किया। उत्तर मिला जाओ बाहर निकलो, समझने का प्रयास करो सृष्टि को। घर की चाहर दिवारी से बाहर गांव भैलवारा के खेत की मेड़ों तक देखा तो उत्पाद दिखा। कृषि उत्पाद, जैविक उत्पाद, कारखानों के उत्पाद जैसा कुछ बनते हुए दिखा। पर वो भी बदल रहा था। गांव भैलवारा से जनपद ललितपुर की गलियों से निकलते हुए विद्यालय में पहुंचे तो लगा अध्ययन से सब जान जायेंगे। विद्यालय में पहले गणित को समझा तो फिर भूगोल समझ आई। भूगोल समझी तो भौतिकी दिखी। फिर भूगोल से भौतिकी की भेंट हुई तो इस हमारे गोले पर होने वाली प्रक्रियाएं समझी। एक प्रक्रिया समझीं तो समझ आया अभी ऐसी अनंत प्रक्रियाएं और समझनी हैं। जल समझा तो अग्नि समझ आई। अग्नि जलाई तो वायु ने उसको बुझा दिया। धरती ने धारण किया तो भार समझ आया। भार जैसे ही समझे तो लगा जैसे कुछ हल्के हुए। सत्य की ओर कुछ कुछ समझ आ रहा है। परंतु भार बदल गया। अगले ही दिन कुछ और था। जैसे पंचभूतों की विशेषता थी। वो लगातार शरीर में आ रहे थे और जा रहे थे। जल, प्रथ्वी, अग्नि , वायु और आकाश सभी पंचभूत बाहर वातावरण में भी थे और अंदर शरीर में भी थे। भार बदला, कुछ अधिक भारी हुए तो मैट्रिक इंटर सामने थी। चुम्बक और विद्युत समझते समझते विद्युत गति से यह काल निकल गया। विद्यालय पूरा हुआ तो पता चला विद्यालय की कक्षाओं के पार महाविद्यालय के आकाश में हर प्रश्न का उत्तर अवश्य मिलेगा।
फिर एक समय आया तब आभास हुआ जैसे अध्ययन से सब जानना संभव नहीं है। कुछ यात्रा से जानना होगा। देश दुनिया संसार को जानना है तो विचरण करो, विहार करो। कुछ वर्ष यह भी प्रयास किया। फिर भी इस जगत का अति अल्प प्रतिशत भी नहीं जान पाए। पुनः मार्ग परिवर्तन हुआ। जो भी मार्ग मिल रहा था उस पर अति अल्प ही ज्ञान पा रहे थे। धीरे धीरे समझ आया कि ये वो रास्ता नहीं हो सकता है जिससे सब कुछ जाना जा सके। अध्ययन और यात्रा की सीमा दिखने लगी। दोनों अल्प दृष्टि वाले हैं।
Fair and simple... our leader don't give a shit ...
I don't care if someone makes a cartoon over this or not but the culprits should be dead by now.. this is nothing less than #nirbhaya
Yahan twarit nyaay nahi to kam se kam 2024 me Mera vote to nahi
#nojusticenovote
Few questions out of curiosity to medical fraternity
*If there an increase in heart attacks in last 2 years ?
*Any ongoing fact finding study being done on it in world ?
*Is it related to covid or covid vaccine?
#heartattack@aiims_newdelhi@theskindoctor13 @dr_veeprakash
This might sound clichéd, but being able to make a meaningful difference in an individual's life is an incredible gift that healthcare professionals have. This is under-appreciated by most of us in the medical and paramedical fields. #Gratitude#LivesTouched
Great opportunity for formal training in patient navigation at one of the best cancer centres in the world @TataMemorial
One-year Post Graduate Diploma in patient navigation in oncology
Online link for application at https://t.co/YgGZOcH6dx
my cousin lost his battle with cancer... It's almost 10 years that @TataMemorial did best surgery. But this time even after the help of @TataMemorial he lost his battle finally.
Thanks to the doctor and nursing staff you gave us those 10 wonderful years..
@cspramesh sir🙏