Dhruv rathee was accusing the government of taking credit for the guy’s work, but the guy himself exposed his agenda:
“Govt ne mera kaam pehle bhi appreciate kiya hai”
नाबालिग है, इसलिए क्या कुछ भी कहने की छूट मिल जाती है?
एक नाबालिग लड़की करोड़ों हिंदुओं की आस्था से जुड़ी मां दुर्गा की तुलना बेहद आपत्तिजनक शब्दों से करे, तो क्या सिर्फ उसकी उम्र के आधार पर उस कृत्य की गंभीरता को नजरअंदाज कर दिया जाना चाहिए?
और दूसरी ओर, एक अलग नाबालिग लड़की प्रधानमंत्री की मां के लिए गाली-गलौज और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करे, तो क्या नाबालिग होने के कारण यह सब भी स्वीकार्य हो जाएगा?
राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन बच्चों और महिलाओं को राजनीतिक स्वार्थ के लिए ढाल की तरह इस्तेमाल करना बेहद चिंताजनक है।
लोग पहले अपने स्वार्थ के लिए महिलाओं का इस्तेमाल करते थे, लेकिन आज अगर कुछ राजनीतिक लोग और स्वार्थी बाप अपने राजनीतिक हित साधने के लिए नाबालिग बच्चियों को मोहरा बना रहे हैं, तो यह केवल राजनीति के गिरते स्तर का सवाल नहीं है, बल्कि हमारी नैतिकता और सामाजिक मूल्यों के पतन का भी प्रश्न है।
सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि –
एक पिता अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए अपनी नाबालिग बेटी को इस तरह इस्तेमाल करने के लिए कैसे तैयार हो सकता है?
सबकी विचारधारा अलग हो सकती है,
सरकार और प्रधानमंत्री का विरोध भी लोकतांत्रिक अधिकार है। लेकिन धार्मिक आस्था, महिलाओं, बच्चों और संवैधानिक पदों की गरिमा को राजनीतिक हथियार बनाना किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।
आखिर हमारा देश किस दिशा में जा रहा है? और हमारी राजनीतिक नैतिकता का इससे आगे कितना पतन होगा?
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Sending lots of love to the Apple community on my last day as CEO. My title changes tomorrow, but the love I have for the Apple community never will. Thank you for being a constant source of inspiration. My gratitude is endless, and I’m excited for the next chapter!
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