अडानी महाघोटाले में संयुक्त संसदीय समिति (JPC) जांच की मांग हिंडेनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट में किए गए खुलासों से कहीं अधिक आगे तक है। अडानी ग्रुप से जुड़ी अनियमितताएं और ग़लत कार्य राजनीतिक अर्थव्यवस्था के हर पहलु से जुड़े हुए हैं। हमारी 100 सवालों की HAHK (हम अडानी के हैं कौन) सीरीज में हमने इन्हें हाईलाइट किया था। इस महाघोटाले की कुछ मुख्य बातें एवं इससे जुड़े तथ्य:
* एयरपोर्ट्स, पोर्ट्स, सीमेंट और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अडानी का एकाधिकार सुनिश्चित करने के लिए भारत की जांच एजेंसियों का दुरुपयोग।
* भारत की प्रतिष्ठा को ताक पर रखकर पड़ोस में अडानी एंटरप्राइजेज की ज़रूरतों के लिए भारत की विदेश नीति के हितों के साथ समझौता करना।
* इजरायल के साथ भारत के रणनीतिक संबंधों को एक ही कंपनी, अडानी को सौंप देना।
* कोयला और बिजली उपकरणों की ओवर-इनवॉइसिंग, जिसने न केवल मनी-लॉन्ड्रिंग और बेतहाशा मुनाफे को बढ़ावा दिया है, बल्कि आम लोगों के बिजली के बिलों में भी वृद्धि की गई है।
* अडानी ग्रुप को सार्वजनिक संपत्तियों पर अनियमित रूप से लीज का एक्स्टेंशन।
* सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, विशेष रूप से SBI द्वारा प्रमुख प्रोजेक्ट को ऋण प्रदान करने में अप्रत्याशित पक्षपात दिखाना। इसमें मुंद्रा में अडानी कॉपर प्लांट, नवी मुंबई में एयरपोर्ट और यूपी एक्सप्रेसवे परियोजना शामिल है।
ऊपर जितने भी मामले हैं उनमें से किसी का भी संदर्भ हिंडेनबर्ग के आरोपों में नहीं हैं। उसके आरोप कैपिटल मार्केट से संबंधित मामलों तक ही सीमित हैं - स्टॉक हेरफेर, अकाउंटिंग धोखाधड़ी और विनियामक एजेंसियों में हितों का टकराव। हिंडेनबर्ग के खुलासे तो सिर्फ़ हिमशैल के सिरे जैसा है - छोटा सा हिस्सा दिखा है।
मोदानी महाघोटाले की पूरी तरह से जांच और खुलासा सिर्फ एक JPC ही कर सकती है।
कोलकाता में जूनियर डॉक्टर के साथ हुई रेप और मर्डर की वीभत्स घटना से पूरा देश स्तब्ध है। उसके साथ हुए क्रूर और अमानवीय कृत्य की परत दर परत जिस तरह खुल कर सामने आ रही है, उससे डॉक्टर्स कम्युनिटी और महिलाओं के बीच असुरक्षा का माहौल है।
पीड़िता को न्याय दिलाने की जगह आरोपियों को बचाने की कोशिश अस्पताल और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
इस घटना ने सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अगर मेडिकल कॉलेज जैसी जगह पर डॉक्टर्स सेफ नहीं हैं तो किस भरोसे अभिभावक अपनी बेटियों को पढ़ने बाहर भेजें? निर्भया केस के बाद बने कठोर क़ानून भी ऐसे अपराधों को रोक पाने में असफल क्यों हैं?
हाथरस से उन्नाव, और कठुआ से लेकर कोलकाता तक महिलाओं के खिलाफ लगातार बढ़ती घटनाओं पर हर दल, हर वर्ग को मिलकर गंभीर विचार-विमर्श कर ठोस उपाय करने होंगे।
मैं इस असहनीय कष्ट में पीड़िता के परिवार के साथ खड़ा हूँ। उन्हें हर हाल में न्याय मिले और दोषियों को ऐसी सज़ा मिले जो समाज में एक नजीर की तरह प्रस्तुत की जाए।
जैसे कोलकाता मामले पर बोला है वैसे ही जब किसी भाजपा शासित प्रदेश में कोई घटना होती है वहाँ भी बोलने की औक़ात रखा करो
ख़ैर आवाज़ उठाने के लिए शुक्रिया 🙏
शर्मनाक ‼️
राहुल गांधी 233 सांसदों का नेतृत्व करने वाले विपक्ष के नेता और भारतीयों की आवाज हैं!
उन्हें आज लाल किले पर वस्तुतः सभी के पीछे दूसरी अंतिम पंक्ति में सीट दी गई।
बीजेपी को याद रखना चाहिए कि यह सरकार एक दिन चली जाएगी और राहुल गांधी भारत के PM के रूप में बैठेंगे🔥
कांग्रेस का बयान 👇
स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी को 5वीं पंक्ति में बैठाया गया। विपक्ष के नेता का दर्जा कैबिनेट मंत्री के बराबर होता है।बाकी सभी मंत्री पहली पंक्ति में बैठे थे।यह बेशर्मी भरा व्यवहार है।राहुल गांधी सत्ता के सामने सच बोलकर उन्हें असहज कर देते हैं, लोगों के मुद्दों पर उन्हें कठघरे में खड़ा कर देते हैं।
Buch’s statement promised a “commitment to complete transparency”.
Given this, will she publicly release the full list of consulting clients and details of the engagements, both through the offshore Singaporean consulting firm, the Indian consulting firm and any other entity she or her husband may have an interest in?
Finally, will the SEBI Chairperson commit to a full, transparent and public investigation into these issues?
https://t.co/tNM0eSmk3O
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Buch said her husband used the consulting entities starting in 2019 to transact with unnamed “prominent clients in the Indian industry”.
Do these include clients SEBI is tasked with regulating?
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