दिल जो करता है इतना रोने को
इक तअल्लुक़ है तर्क होने को
शर्म आती है हाल पर अपने
कुछ भी हासिल नहीं है खोने को
शुक्र इतना है,मेरे दामन पर
दाग़ कोई नहीं है धोने को
शेर उसको नहीं सुनाऊँगी
उसने पीतल कहा है सोने को
उसको पाने का रास्ता है मगर
दिल नहीं करता जादू टोने को
@iqrambar ✍️
#ग़ज़ल
बेहतर यही है लौट जा मुझको पुकार कर
मेरी तरह तू आग का दरिया न पार कर
गुज़रे हैं अपने दिन जो मुलाक़ात के बग़ैर
वो दिन भी मेरे हिज्र में जानाँ शुमार कर
मैं उसके सामने नहीं आती हूँ इसलिये
कैसे नज़र मिलाएगा दिल से उतार कर
~इकरा अम्बर
@iqrambar
ताज़ा / تازہ
किसी के ज़िक्र से कैसा कमाल होता है
नज़र के सामने ताज़ा ख़याल होता है
तवील लगते हैं दिन इंतज़ार में, वरना
हज़ार दिन का कहाँ एक साल होता है
ज���रा सी बात थी उसने मुझे नहीं देखा
ज़रा सी बात का कितना मलाल होता है
@iqrambar
उसके लबों से मुझ पे झरे फूल बेहिसाब
बंजर ज़मीन-ए-दिल पे खिले फूल बेहिसाब।
उसकी ज़बान सख़्त है पर इसके बावजूद
उसने किताबे दिल में रखे फूल बेहिसाब।
~इकरा अम्बर
(Iqra Ambar)
@iqrambar
वो काश मुझसे पूछता क्या मेरा हाल है
वापस मैं आई हूँ तो लबों पर सवाल है
यानी मैं लौट जाऊँगी आई जहाँ से हूँ
यानी मेरे उरूज की मंज़िल ज़वाल है
देखा है आज उसको किसी ग़ैर के क़रीब
दिल है शिकस्ता मेरा, नज़र भी निढाल है
~इकरा अम्बर
@iqrambar