करीब 25 साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कानपुर में गोपी कृष्ण पांडेय के घर रुके थे. इसी दौरान दोनों ने साथ में 'गदर' फिल्म देखी थी. वक्त बदला, अब उसी गोपी कृष्ण पांडेय को बीजेपी ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है. दिलचस्प बात यह है कि उन्हें अपनी उम्मीदवारी की खबर पार्टी से नहीं, आज तक पर अपना नाम और फोटो देखकर मिली.
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जग्गा का मंदिर और भव्य होता जाता...फिर जग्गा की भूख बढ़ती गई...अब रात में जग्गा अपने साथियों संग वेश बदलकर गांव वालों को लूटता...सुबह फिर साधु का वेश धर प्रवचन करता और लूट के माल से कुछ हिस्सा गांव वालों में बांट देता....गांव वाले जयकारे लगाते ....बस इतनी सी तो कहानी है....
जग्गा डाकू साधु वेश धर गांव में आया, गांव वालों को प्रवचन दिया..बोला मेरा मंदिर बनाओ तुमको फल मिलेगा..झांसे में आए गांव वालों ने मंदिर बना दिया...जग्गा डाकू ने गांव वालों से उन्हीं के पेड़ से फल तुड़वाए...आधे अपने साथियों को बांट देता आधे गांव वालों को दे देता...गांव वाले खुश ...
राजा को चमड़े के जूते पहनने का शौक था...राजा अपने कारिंदों से रोज़ जनता में किसी की खाल खिंचवाता और जूते बनाकर पहनता...खाल के साथ जो चर्बी निकल आती उस से दीये जलवाए जाते थे......
मेरी सरकार आयी तो UPI-सूपिआई बंद कर चमड़े से सिक्के चलाउंगा। चमड़े जनता के ही होंगे। जो अपनी जितनी चमड़ी उतरवा सकेगा, उसके पास उतने सिक्के होंगे।
तथास्तु
कथित विकास के नाम पर अंधाधुन काटे जा रहे जंगल, हरे पेड़ों पर चलती कुल्हाड़ियां, नदियों का सीना चीर रहीं मशीनों से हो रहे अवैध खनन और गली - मोहल्लों से लेकर नदियों पर होने वाले अतिक्रमण पर मुंह में दही जमाकर बैठे या भागीदार बने लोग आपदा, त्रासदियों पर शोक भरे प्रवचन करते हैं....
विडंबना यह है कि, रोटी के लिए मालिक बदल लेने वाली इस भ्रष्ट और मक्कार जमात को हमारे वर्तमान और भविष्य को प्रभावित करने वाले निर्णय लेने का अधिकार मिला है.....
चंद सिक्कों के लिए ईमान बेचकर पाला बदल लेने वाली जमात समस्या नहीं है....समस्या यह है कि जनता ने इसे सहजता से स्वीकार कर लिया है...लोगों को इससे फर्क पड़ना बंद हो गया है...सुबह किसी को कोस रहा शख्स दल बदल शाम होते - होते उसी के तलवे चाट लेने पर ज़रा शर्म महसूस नहीं करता....
ब्याह पीछे पति के टिंडे खाने में आनाकानी करने पर पत्नी दूसरी सब्जी नहीं बनाती, बल्कि उसी टिंडे की सब्जी में नमक - मिर्च तेज़ करने लगती है...चार दिन भूखा रहने के बाद आखिरकार पति वही पुरानी टिंडे की सब्जी मुंह से मांग कर खाने लगता है....+1
स्वयं को सर्वज्ञाता, सर्वज्ञानी, सर्वशक्तिमान और सर्वस्व समझ बैठने वाला व्यक्ति अपनी बुद्धि और विवेक खो बैठता है....ऐसे व्यक्ति अंतत विनाशकारी ही सिद्ध होते हैं.....
आत्ममुग्धता केवल इसमें डूबे व्यक्ति के लिए ही घातक नहीं है...यह प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष जुड़े प्रत्येक व्यक्ति, व्यवस्थाओं और कार्यों को प्रभावित करती है...उस पर यदि आत्ममुग्ध व्यक्ति अज्ञानी ( जो कि वह होता ही है ) हो तो यह और भी नुकसानदेह साबित होती है...