After being stuck at Jalalpur outer for over 30 mins, Deoghar-Patna MEMU (63209) has finally started moving. The train is currently running 1 hour 22 minutes late. Pathetic service. @RailMinIndia@RailwaySeva@ECRlyHJP@AshwiniVaishnaw
@RailMinIndia@AshwiniVaishnaw Deoghar-Patna EMU (6:50 AM) runs late daily. Today, it reached the platform after 7:00 AM and departed at 7:38 AM. Passengers are facing severe daily delays. Please look into this and ensure punctuality. #IndianRailways#Deoghar
@khuchrep छठ जब मन हो जाए तब अचानक शुरू नहीं किया जा सकता। हर साल इसका मुहूर्त नहीं बनता, इस साल संयोग है। छठ करने से पहले कुछ साल कष्टी यानी तैयारी करनी पड़ती है। जो लोग पानी में हाथ जोड़कर खड़े रहते हैं, वे उसी कष्टी साधना में रहते हैं।
@kaankit मैं अपने सामाजिक अध्ययन से इतना तो कह ही सकता हूं, जो सब ये भाई बंधु करते आ रहें ये होना ही था। बिना बकवास किए इनका न्याय पूर्ण नहीं होता। मैं इन बकवाधीश से कोई सहानभूति नहीं रखता, हां मैं उस मन की पीड़ा से जरूर समझता सकता हूं जो 70-72 साल वकील हैं। आप घृणा के पत्र हैं।
@kaankit भगत सिंह ने बम (जो सिर्फ आवाज करता) फोड़ा था संसद में, क्यों? ये अपने धर्म (Duty) भूल के दूसरों को भी काम रोक के बैठ जाते हैं। कितना केस पेंडिंग है? क्या कर रहें उसका? जनता में आके रोते हैं, बाकी फाइलों पे चढ़ बैठते हैं। बाकी जज हमेशा इनके भाई बंधु ही बनते हैं, कैसे?
@kaankit सम्मान भीख नहीं, कमाना पड़ता है; अगर मेरे सम्मान की फ़िक्र नहीं, तो मैं क्यों करूं? ‘जले नोट’ केस दबे, भाई‑बंधु बचें, और उन्हीं के लिए ‘जस्टिस’ बुलवाया जाए—तो ये बकवाधीश है, न्यायाधीश नहीं। अगर भगवान सम्मान नहीं करोगे तो होगा ही! प्रशंसा तो नहीं, हां निंदा भी नहीं।
@ssrajputINC@HMOIndia@CPDelhi जस्टिस साहब जब जो मुंह में आए बोल दें, जले नोट वाले मामले में जाँच रोकी दें और उन्हीं महानुभाव के लिए ‘जस्टिस’ बोलने को मजबूर किया जाए, तो ऐसे उद्गार स्वाभाविक हैं। मैं @ajeetbharti के साथ हूं। अपमान से कब किसी को सम्मान मिला है? ये घटना भगवान विष्णु की चेतावानी है। बाकी जाने राम
@ajeetbharti पद की गरिमा है, पर कब तक? बड़ी शक्ति के साथ बड़ी ज़िम्मेदारी भी होती है—अगर ये बात भूल गए हैं, तो समय ज़रूर याद दिलाएगा। इतिहास कहता है, ये वक्त सिर्फ़ चेतावनी का है। भविष्य उनके निर्णयों और समय के गर्भ में छिपा है।
@ajeetbharti यह न्यायपालिका के आत्ममंथन का समय है — चाहे अपने आचरण को सुधार ले या समय स्वयं न्याय कर देग��। ये संस्था जो "अपनो से हैं, धन और सत्ता के लिए" की नीति बना बैठी हैं। यह सबके लिए अहितकर है। घटना की प्रशंसा नहीं, पर निंदा भी केवल दबी जुबान में कर सकता हूं।