यह घटना 18/12/25 सुबह 8:30 की है सकरे रास्ते से 18 चक्का ट्रक निकलने को लेके कहां सुनी हो रही थी उसी बात को लेके विजय द्विवेदी बृजेश द्विवेदी विवेक द्विवेदी अंकुर द्विवेदी ने वृद्धा महिला लाल मुनि गौतम पे जान लेवा हमला किया दोनों बड़े बच्चों पे जान लेवा हमला किया बेटी को भी मर a
जम्मू के थाना आर.एस. पुरा में 32 वर्षीय दलित युवक उत्तम चंद को पुलिस द्वारा घर से ले जाने के बाद उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु का मामला बेहद दुखद,गंभीर और चिंताजनक है।
पीड़ित परिजनों से मेरी बात हुई। उनका कहना है कि 8 सितंबर की रात पुलिसकर्मी उत्तम चंद को घर से जबरन अपने साथ ले गए। परिवार ने पुलिस पोस्ट के बाहर से उसके चीखने और मारपीट से बचाने की गुहार लगाने की आवाजें सुनीं। परिजनों के अनुसार, रात करीब 2:30 बजे जब उसे गंभीर रूप से घायल अवस्था में बाहर लाया गया तो उसने अपने भाई को बताया कि पुलिसकर्मियों ने उसके साथ मारपीट की है और उसे जान से मार देने की आशंका जताई। इसके कुछ ही घंटों बाद, सुबह लगभग 5:30 बजे उसकी मृत्यु हो गई।
इस घटना के बाद भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की जम्मू जिला टीम पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रही है, लेकिन पुलिस द्वारा टीम के कार्यकर्ताओं को जबरन डिटेन कर उनकी आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है। यह बेहद निंदनीय है।
यह केवल एक परिवार का मामला नहीं, बल्कि पुलिस हिरासत में व्यक्ति की सुरक्षा और कानून के शासन से जुड़ा गंभीर सवाल है। पूरे
@CM_JnK से हमारी मांग है कि उत्तम चंद की मौत की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए, सभी दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, पीड़ित परिवार को न्याय एवं उचित मुआवजा दिया जाए तथा न्याय की मांग कर रहे भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के कार्यकर्ताओं को जबरन डिटेन न किया जाए और उन पर लाठीचार्ज न किया जाए। न्याय की मांग करने वालों को डराने या दबाने के बजाय पुलिस को अपने ऊपर लगे गंभीर आरोपों का जवाब देना चाहिए।
हमारी संवेदनाएँ पीड़ित परिवार के साथ हैं। इस दुख की घड़ी में हम उनके साथ मजबूती से खड़े हैं और न्याय की लड़ाई में हर संभव संघर्ष करेंगे।
@OmarAbdullah@India_NHRC@NCSC_GoI
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा केंद्र, नोएडा DM के खिलाफ NSA कार्रवाई का मामला
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मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय स्थित सर छोटूराम इंजीनियरिंग कॉलेज में बीटेक प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को हॉस्टल नहीं मिलने पर छात्रों और उनके परिजनों को प्रदर्शन के लिए मजबूर होना पड़ा। घंटों चले धरने के दौरान एक छात्रा बेहोश हो गई और उसे अस्पताल ले जाना पड़ा। यह बेहद गंभीर और चिंताजनक स्थिति है।बच्ची की कुशलता के लिए प्रकृति से प्रार्थना है।
हॉस्टल केवल एक इमारत नहीं, बल्कि मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों के विद्यार्थियों के लिए कम खर्च में सुरक्षित आवास प्राप्त कर शिक्षा पूरी करने का महत्वपूर्ण जरिया है। हॉस्टल की कमी के कारण विद्यार्थी महंगे किराये के कमरों और कई बार असुरक्षित एवं रहने योग्य न होने वाले मकानों में रहने को मजबूर होते हैं। दिल्ली के मोती बाग स्थित “सत्य निकेतन” में पांच मंजिला इमारत गिरने की घटना इसका दुखद प्रमाण है।
भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) विद्यार्थियों की हॉस्टल की इस मांग का पूर्ण रूप से समर्थन करती है। विश्वविद्यालय प्रशासन सभी पात्र विद्यार्थियों को तत्काल हॉस्टल उपलब्ध कराए और छात्र संख्या के अनुपात में पर्याप्त, सुरक्षित एवं किफायती आवासीय व्यवस्था सुनिश्चित करे।
विडंबना है कि जिस समय युवा सुरक्षित हॉस्टल, बेहतर शिक्षा और अपने भविष्य की मांग कर रहे हैं, उस समय बुलडोजर चलाने में व्यस्त भाजपा की सरकारों को विद्यार्थियों की इन बुनियादी जरूरतों की चिंता नहीं है।
सरकारों की प्राथमिकता युवाओं के लिए शिक्षा, रोजगार और सुरक्षित आवास होना चाहिए। छात्रों को अपने अधिकार के लिए धरने पर बैठने और एक छात्रा को बेहोश होने तक संघर्ष करने की नौबत आना व्यवस्था की गंभीर विफलता है।
पटना में 'आरक्षण बढ़ाओ
संविधान बचाओ' आंदोलन
पटना में दलित संगठन के लोग बड़ी संख्या में सड़क पर उतरे. प्रदर्शनकारियों की ओर से 'आरक्षण बढ़ाओ, संविधान बचाओ' आंदोलन किया जा रहा है.
प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए जेपी गोलंबर के पास पुलिस की ओर से बैरिकेडिंग की गई थी. लेकिन उन्होंने बैरिकेडिंग पर चढ़कर जमकर नारेबाजी की.
चिराग पासवान का बयान आ गया है उन्होंने गुंडे स्वतंत्र भारद्वाज पर कड़ा जवाब दिया और कार्यवाही का भी आश्वासन दिया है.! चिराग पासवान से यही उम्मीद थी उनके बयान का स्वागत होना चाहिए कम से कम उन्होंने जवाबदेही तो ली ।
दिल्ली में संसद मार्ग थाने पर कुछ घंटे के ही धरने का असर ये हुआ कि दिल्ली पुलिस स्वतंत्र भारद्वाज नाम के गुंडे को गिरफ्तार करने पर मजबूर हो गई.
यूपी के बुलंदशहर से उसे पकड़ा गया है .
स्वतंत्र भारद्वाज ने एक पॉडकास्ट में खुद ही कबूल किया था कि उसने नीशू आज़ाद के पिता संजय आज़ाद पर जानलेवा हमला किया था लेकिन बीजेपी नेताओं से रिश्ते की वजह से उसका कुछ नहीं बिगड़ा.
निशू और उसके पिता से इस बार पूरी बात मेरे यूट्यूब चैनल पर
“मेरा कोई कुछ बिगाड़ नहीं पाएगा!”
वाह जिल्लेइलाही, बधाई हो! जलवा तो ये आपका ही है।
अपराधी का अपराध करना जितना चिंताजनक है, उससे कहीं ज़्यादा ख़तरनाक उसका ये बेख़ौफ़ ऐलान है कि उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। सवाल सिर्फ़ ये नहीं कि अपराधी में इतनी हिम्मत कहाँ से आई। सवाल ये है कि उसे कानून, पुलिस और व्यवस्था से बेख़ौफ़ होने का इतना आत्मविश्वास आखिर दिया किसने?
आपने कैसा भारत बना दिया, जहाँ अपराधी डरता नहीं, बल्कि खुलेआम व्यवस्था को चुनौती देता है!
शर्मनाक!
23 जून को जंतर-मंतर की घटना पर पुलिस कहती है कि संजय कुमार की चोटें सामान्य थीं और खोपड़ी में दरार की बात निराधार है। लेकिन आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज के बयान में वह खुद “7 टांके”, “मरने की स्थिति” और “307 बनता था” जैसी बातें कह रहा हैं।
वह यह भी दावा कर रहा हैं कि संजय कुमार की बेटी निशु, थाने के बाहर खड़े होकर कह रही थी कि “अगर मेरे बाप को इंसाफ नहीं मिला तो हम जहर खाकर मर जाएंगे।” साथ ही उनका दावा है कि वे जेल तक नहीं गए और “कपिल मिश्रा अपने बड़े भाई हैं”, “चिराग पासवान अपने बड़े भाई हैं” तथा “सबका सपोर्ट है।"
तो सवाल है कि अगर घायल की हालत इतनी गंभीर थी और 7 टांके लगे थे, तो पुलिस की MLC में चोटें सामान्य कैसे बताई गईं? अगर धारा 307 का मामला बनता था, तो आरोपी जेल क्यों नहीं गया?
“कपिल मिश्रा के फोन के बाद छोड़ने का दावा सच है या झूठ? क्या पुलिस इसकी निष्पक्ष जांच करेगी? जब राजनीतिक संरक्षण का इतना स्पष्ट दावा सामने आ रहा है, तो पुलिस यह क्यों नहीं स्पष्ट कर रही कि इस मामले में किसी अनुचित प्रभाव या हस्तक्षेप की कोई भूमिका थी या नहीं?”
आखिर पुलिस के रिकॉर्ड और आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज के बयान में इतना बड़ा अंतर क्यों है? हमें इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और अपने पीड़ित परिवार को न्याय दिला कर रहेंगे। जय भीम, जय भारत।।
खुलेआम ये गुंडा आख़िर किसे ललकार रहा है - कानून को या पुलिस-प्रशासन को?
सरकारी संरक्षण तो है ही, लेकिन क्या पुलिस ने भी इसे गुंडागर्दी का ‘लाइसेंस’ दे रखा है?
आख़िर इतना बेख़ौफ़ होने की ताक़त इन्हें कौन दे रहा है?
लंका तो लगनी तय है! 🔥
जंतर-मंतर पर निशु आज़ाद के पिता पर हुए जानलेवा हमले के बाद, आज भीम आर्मी प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर आज़ाद खुद निशु के साथ थाने पहुंचे हैं।
अब कोई 'कृपा' काम नहीं आएगी। जब रक्षक ही मैदान में उतर चुका हो, तो जुल्म करने वाले की उल्टी गिनती शुरू हो जाती है। अब कानून का डंडा चलेगा और इंसाफ होकर रहेगा!
लखनऊ
➡️रक्षाबंधन पर पुलिसिया कार्रवाई का वीडियो वायरल
➡️बाजार में खरीदारी करने वालों की गाड़ियों में पंक्चर
➡️गाड़ियां पंक्चर करते सिपाही का वीडियो वायरल
➡️आलमबाग के चंदन नगर बाजार का है वीडियो
➡️लोगों ने वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया
➡️पुलिस गाड़ी से आए सिपाही ने गाड़ियां पंक्चर की
➡️आलमबाग थाने की चंदन नगर मार्केट का मामला
#Lucknow #Viralvideo @lkopolice@Uppolice@Igrangelucknow@AdminLKO
दहेज मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, तेज सुनवाई और नियमित निगरानी के लिए राज्यों को दिए निर्देश
दहेज से जुड़े अपराधों के प्रभावी क्रियान्वयन और मामलों के जल्द निपटारे के लिए सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और हाईकोर्ट को कई अहम निर्देश जारी किए। कोर्ट ने दहेज निषेध अधिकारियों की व्यवस्था को प्रभावी बनाने, दहेज हत्या और वैवाहिक क्रूरता से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुनने और लंबे समय से लंबित मामलों की नियमित निगरानी करने को कहा।
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3 महीने में कार्रवाई करें: हाईकोर्ट ने हाथरस पीड़िता के परिवार को दूसरी जगह बसाने में 'बेवजह रुकावट' डालने पर यूपी सरकार को फटकार लगाई
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भाजपा सत्ता ने व्यवस्था का चीरहरण कर दिया है
न्यायालयों और अधिकारियों तथा सरकार के उच्च पदों पर बैठे भाजपा नेताओं के बीच आखिर खींचतान क्यों मची हुई है?
आखिर न्यायालय के तमाम जज, आखिर प्रशासनिक सेवाओं के तमाम अधिकारी, तमाम शीर्ष पदों पर बैठे भाजपा नेता और RSS के लोग अपने मन माफिक फैसले करवाने, जमीनों के विवादों में इंट्रेस्ट लेने और विवादित मामलों में मध्यस्थता के नाम पर आउट ऑफ कोर्ट या इन द कोर्ट क्या क्या खेल खेले जा रहे हैं ये सब जनता देख रही है
शर्मनाक