ये नेहरूजी इसका पीछा क्यों नहीं छोड़ते😂😂
शक्ल देखो घोचेंद्र की...
(वीडियो में कहे गए शब्दों का हिंदी अनुवाद
"यही सर्वोच्च राजकीय सम्मान भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को भी प्रदान किया गया था। उन्हें भी उनके योगदान और भारत-इंडोनेशिया के संबंधों में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका के सम्मान में यह अलंकरण दिया गया था।")
ईर्ष्यालु की सबसे बड़ी त्रासदी यह होती है कि जिससे वह ईर्ष्या करता है, वही उसे हर जगह दिखाई पड़ता है।
आज इंडोनेशिया की संसद में नरेंद्र मोदी ने पूरे सम्मान के साथ बीजू पटनायक का नाम लिया।
अच्छी बात है।
बहुत अच्छी बात है।
लेकिन इतिहास ने उसी क्षण एक और सवाल भी पूछ लिया...
क्या केवल बीजू पटनायक ही थे?
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1947...
भारत अभी-अभी आज़ाद हुआ था।
अपना घर भी पूरी तरह संभल नहीं पाया था।
देश विभाजन के घावों से लहूलुहान था।
लाखों शरणार्थी सड़कों पर थे।
अर्थव्यवस्था कमजोर थी।
लेकिन उसी समय, हज़ारों किलोमीटर दूर इंडोनेशिया भी डच साम्राज्यवाद से अपनी आज़ादी के लिए लड़ रहा था।
उस समय भारत ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया।
"हम केवल अपनी आज़ादी का जश्न नहीं मनाएँगे...
हम हर गुलाम राष्ट्र की आज़ादी के साथ खड़े होंगे।"
यह पंडित जवाहरलाल नेहरू की विदेश नीति का मूल दर्शन था।
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जब दुनिया की कई बड़ी शक्तियाँ चुप थीं...
भारत बोला।
जब कई देशों ने अपने व्यापारिक हित देखे...
भारत ने नैतिकता देखी।
भारत ने डच जहाज़ों और विमानों के बहिष्कार का समर्थन किया।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इंडोनेशिया की स्वतंत्रता का पक्ष लिया।
1949 में एशियाई देशों को एकजुट कर डच उपनिवेशवाद पर नैतिक और कूटनीतिक दबाव बनाया।
यही वह भारत था...
जो केवल अपने लिए नहीं...
दूसरों की स्वतंत्रता के लिए भी लड़ता था।
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और इसी दौर में सामने आते हैं...
बीजू पटनायक।
एक साहसी पायलट।
जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर इंडोनेशिया के नेताओं को सुरक्षित निकालने का साहसिक अभियान पूरा किया।
इंडोनेशिया ने उनका ऋण कभी नहीं भुलाया।
उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक से सम्मानित किया।
और यह सम्मान बिल्कुल उचित था।
क्योंकि वीरता का कोई विकल्प नहीं होता।
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लेकिन ज़रा सोचिए...
यदि बीजू पटनायक उस मिशन के वीर नायक थे...
तो वह मिशन किस भारत की सोच से जन्मा था?
किस नेतृत्व ने तय किया था कि एक नया आज़ाद भारत किसी दूसरे देश की आज़ादी के लिए भी जोखिम उठाएगा?
उस प्रश्न का उत्तर है...
जवाहरलाल नेहरू।
एक ने कॉकपिट से इतिहास लिखा...
दूसरे ने विश्व मंच से।
एक ने विमान उड़ाया...
दूसरे ने भारत की नैतिक प्रतिष्ठा।
इतिहास दोनों का है।
किसी एक का नहीं।
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यही बात हमें बेचैन करती है।
आज जब किसी विरोधी दल के नेता का नाम लिया जाता है तो उसकी प्रशंसा होती है...
लेकिन उसी कहानी के सबसे बड़े पात्रों में से एक का नाम धीरे-धीरे गायब कर दिया जाता है।
क्या यह संयोग है?
या फिर इतिहास को सुविधानुसार संपादित करने की आदत?
इतिहास कोई फ़िल्म नहीं...
जहाँ पसंद न आने वाले पात्र का दृश्य काट दिया जाए।
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आज वही लोग भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा की बात करते हैं...
लेकिन यह बताने से बचते हैं कि स्वतंत्र भारत की वह प्रतिष्ठा रातों-रात नहीं बनी थी।
उसे बनाने में वर्षों लगे।
उसमें स्वतंत्रता आंदोलन का नैतिक बल था।
नेहरू की गुटनिरपेक्ष सोच थी।
एशियाई एकजुटता का सपना था।
उपनिवेशवाद के खिलाफ स्पष्ट आवाज़ थी।
और उस विचार को ज़मीन पर उतारने वाले साहसी लोग थे...
जिनमें बीजू पटनायक भी शामिल थे।
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इसलिए आज बीजू पटनायक का सम्मान कीजिए...
ज़रूर कीजिए।
लेकिन उसी साँस में नेहरू को भी याद कीजिए।
क्योंकि इतिहास में किसी एक की रोशनी बढ़ाने के लिए दूसरे का दीपक बुझाने की ज़रूरत नहीं होती।
महान राष्ट्र अपने नायकों को जोड़ते हैं...
तोड़ते नहीं।
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याद रखिए...
राष्ट्रवाद का अर्थ केवल अपने पसंदीदा नामों का जयघोष नहीं होता।
राष्ट्रवाद का अर्थ है...
सत्य को उसके पूरे स्वरूप में स्वीकार करना।
बीजू पटनायक की वीरता भी भारत की है।
नेहरू की दूरदृष्टि भी भारत की है।
और भारत...
किसी एक विचारधारा की जागीर नहीं।
वह उन सभी लोगों की साझी विरासत है जिन्होंने अपने साहस, अपने विचार और अपने त्याग से दुनिया में उसका सिर ऊँचा किया।
इतिहास को पूरा पढ़िए...
क्योंकि अधूरा इतिहास केवल अज्ञान नहीं पैदा करता...
वह आने वाली पीढ़ियों से उनका सच भी छीन लेता है।
वैसे तुम्हारे द्वारा नेहरू जी का नाम एडिट कर देने से कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि नेहरू जी ने जिनका साथ दिया, वो आज भी उन्हें याद करते हैं।
देख लो वीडियो
#VijayShukla
नानबायोलोजिकल ड्रामेबाजी में पक्का है
अनपढ़ पब्लिक को समझे - बोक्का है
हरेक बार उम्मीद है उसको
ताली - थाली - झाल की
जय ढोंगी घड़ियाल की
झूठे आँसू पर मत जाना
वो है शातिर , बड़ा सयाना
तुम अबकी सीधे तन जाना हो
नाइजेल फराज ब्रिटेन की संघी पार्टी रिफॉर्म यूके के नेता हैं। उन्होंने मंदिर या चर्च में तो डाका नहीं डाला मगर उपहार और पैसे वगैरा लिए हैं।
लेकिन ब्रिटेन के नेता कम से कम इतनी नैतिकता तो रखते हैं कि पकड़े गए तो स्वीकार कर लिया और इस्तीफ़ा भी दे दिया। उन्होंने भी इस्तीफ़ा दे दिया है।
जय ढोंगी घड़ियाल की
रंग - बिरंगे सपने फेंके
असल में वो दिखलाता ठेंगे
छील रहा है खाल अभीतक
पिछले पैंसठ साल की
जय ढोंगी घड़ियाल की
दाढ़ी में तिनका ही तिनका
मन फेरे सत्ता की मनका
सारी तैयारी है जारी
बस अगले जयमाल की
जय ढोंगी घड़ियाल की
जय ढोंगी घड़ियाल की
तरह तरह की नौटंकी
करता है बड़े कमाल की
एक आँख से आँसू टपके
और दूजे में लाइट चमके
घाघ ब्रेन बस सोच में डूबा
दूर के कौड़ी - तेली के चाल की
जय ढोंगी घड़ियाल की
भीतर दाँत हैं चोखे-चोखे
फिर से मत खा जाना धोखे
भाषण में लेता है भाई
फिरकी बड़े कमाल की
जय ढोंगी घड़ियाल की
तरह तरह की नौटंकी
करता है बड़े कमाल की
एक आँख से आँसू टपके
और दूजे में लाइट चमके
घाघ ब्रेन बस सोच में डूबा
दूर के कौड़ी - तेली के चाल की
जय ढोंगी घड़ियाल की
भीतर दाँत हैं चोखे-चोखे
फिर से मत खा जाना धोखे
भाषण में लेता है भाई
फिरकी बड़े कमाल की
अंधेर नगरी का न्याय
अच्छा ये भगवान का मंदिर लूट रहे थे? मैं बहुत दुखी हूं। आहत हो गया हूं। किसी को बख्शा नहीं जाएगा...
ऐसा करो कि इनको हटा दो और अपने ही गिरोह के किसी दूसरे आदमी को बैठा दो। जनता का गुस्सा थम जाएगा, माल आना फिर शुरू हो जाएगा।
व्यवस्था नहीं बदलनी है। परदेदारी नहीं खत्म करनी है। अपने लोगों को बाहर नहीं करना है। राम मंदिर अयोध्या के संतों को नहीं सौंपना है। उस पर अपना ही कब्जा होगा।
नोट : सारा उपक्रम कब्जा और लूट का था। वही हुआ और सुनिश्चित किया जा रहा है कि आगे भी वही होगा।
In Tehran, an Iranian walked up to me and repeated Netanyahu's claim that he had the support of 1.4 billion Indians. He was visibly upset to see an Indian.
It took me several minutes to convince him that Netanyahu's claim should not be mistaken for the voice of India's people. I told him countless Indians stand with the people of Iran and are overjoyed that Iran has won this war.
Never underestimate the Zionist propaganda.
बदरीनाथ में भी चढ़ावा चोरी
• मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी का पर्सनल सेक्रेटरी प्रमोद नौटियाल चढ़ावे की चोरी कर रहा था
• प्रमोद को सस्पेंड करने के बाद उसके खिलाफ FIR भी दर्ज हुई है
• प्रमोद बहुत तेजी से मंदिर समिति में आगे बढ़ा था
शाबास मोहन भाई!
30 साल लड़े, 550 हेक्टेयर जमीन खोई, 178 गांव खोये, 7700 करोड़ का मुआवजा खोया, और गुजराती ठगों से क्या पाया? उल्टे जनता के टैक्स का 550 करोड़ हमें देना पड़ेगा?
वाह रे मेरे मिट्टी के शेर!
चिरांध की हंसी तो देखो.. 💩
मप्र की इज्जत बढ़ा दी.
🤦😭😭😭
राम मंदिर ट्रस्ट का कोषाध्यक्ष कहता है कि मैं कोषाध्यक्ष जरूर था लेकिन मुझे कोष पर कोई अधिकार ही नहीं था। मुझे कुछ मालूम ही नहीं था। मैं कोई फैसला कर ही नहीं सकता था।
फिर आज वही व्यक्ति ट्रस्ट के दो सदस्यों के इस्तीफे की जानकारी किस हैसियत से दे रहा है? वह ट्रस्ट की बैठक के बारे में सूचना कैसे दे रहा है?
जिसको कल तक अपने पद पर ही अधिकार नहीं था, वह आज पूरे ट्रस्ट का प्रवक्ता कैसे बन गया?
कदम-कदम पर झूठ, छल, धोखा, चोरी और निकृष्टता...! भगवान के प्रति आस्था तो छोड़िए, इन लोगों में न्यूनतम नैतिकता और मानवता भी नहीं बची है। ये दिन भर झूठ और फ़रेब का व्यापार करते हैं।
👹 चोरी हुई राम की
राम की या
राम के नाम की
या राम के अस्तित्व की
फिर राम के विश्वास की
सामान की या ईमान की
चोरी तो हुई
राम के धाम की
रामायण पढ़ने, सुनने वाले
क्या राम भक्त नहीं थे
रावण ने राम की ❓