ACP मनस्वी वशिष्ठ के लिए एक के बाद एक नई मुसीबतें खड़ी हो रही हैं।
दिल्ली पुलिस HQ के बाहर विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत सस्पेंशन तो हुआ ही, अब कानूनी शिकंजा भी कसता जा रहा है।
मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव साम्ब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ के सामने वकीलों ने ACP द्वारा आपत्तिजनक बयानबाजी (AK-47 व काले कोट के गुंडे) का मुद्दा उठाया।
कोर्ट ने स्वतः संज्ञान न लेते हुए वकीलों से औपचारिक याचिका दायर करने को कहा है और त्वरित सुनवाई का आश्वासन दिया है।
साफ है कि याचिका दायर होते ही हाईकोर्ट इस मामले पर बड़ा और सख्त रुख अपना सकता है।
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वकीलों से पंगा... मतलब अपन��� ही पैर पर खुद बुलडोजर चलाना!
साहब को लगा था रोड पर ड्रामा करके हीरो बन जाएँगे, अब घर पर बैठकर 'सावधान इंडिया' देखें! 🤐⚖️
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अगर कानून की रक्षा करने वाली पुलिस ही सड़क पर उतर आए, तो देश का कानून क्या कहता है?
1. कानून क्या कहता है?
संविधान का अनुच्��ेद 33 (Article 33): संसद को यह अधिकार देता है कि वह पुलिस, सेना और सुरक्षा बलों के 'मौलिक अधिकारों' (जैसे- बोलने की आजादी, संघ बनाने का अधिकार) को नियंत्रित या खत्म कर सके ताकि अनुशासन बना रहे।
Police-Forces (Restriction of Rights) Act, 1966: इस कानून की धारा 3 के अनुसार, कोई भी पुलिसकर्मी बिना सरकार की पूर्व अनुमति के:
किसी ट्रेड यूनियन या राजनीतिक संगठन से नहीं जुड़ सकता।
किसी भी राजनीतिक/गैर-राजनीतिक प्रदर्शन या हड़ताल में ��िस्सा नहीं ले सकता।
मीडिया से सीधे शिकायत दर्ज या अपनी बात सार्वजनिक नहीं कर सकता।
2. सुप्रीम कोर्ट के बड़े फैसले (Supreme Court Verdicts)
T.K. Rangarajan vs. Govt of TN (2003): सुप्रीम कोर्ट ��े साफ कहा कि सरकारी कर्मचारियों को हड़ताल (Strike) करने का कोई मौलिक या कानूनी अधिकार नहीं है। हड़ताल से पूरा समाज प्रभावित होता है।
Delhi Police Non-Gazetted Karmchari Sangh vs. UOI (1986): कोर्ट ने 'Police Forces Act, 1966' को संवैधानिक ठहराया और माना कि पुलिस बल में अनुशासन और सार्वजनिक व्यवस्था (Public Order) बनाए रखने के लिए अधिकारों पर रोक लगाना पूरी तरह जायज है।
3. विरोध करने पर क्या परिणाम होंगे?
जेल और जुर्माना (Criminal Action): Act की धारा 4 के तहत 2 साल त��� की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
नौकरी से बर्खास्तगी (Dismissal): अनुशासनहीनता के आरोप में सीधे नौकरी से निकाला (Terminate) जा सकता है।
विभागीय कार्रवाई (Departmental Inquiry): पेंशन रुकना, डिमोशन और भविष्य में सरकारी सेवाओं पर आजीवन बैन।
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योगी जी कहते हैं जो भी प्रोटेस्ट में शामिल होगा उसे सरकारी नौकरी नहीं दी जाएगी और ना ही CHARACTER CERTIFICATE बनने दिया जाएगा,
लेकिन अगर कोई बलात्कारी, हत्यारा, चोर, धर्म के नाम पर लड़ाने वाला होगा उसे प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, सांसद, विधायक, राज्यपाल जरूर बनाया जाएगा !!
श्री जम्भेश्वरराय नमः 🙏✨
प्रकृति, पर्यावरण और जीव रक्षा को अपना परम धर्म मानने वाले बिश्नोई समाज एवं सभी श्रद्धालुओं को बिश्नोई धर्म के 542वें स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं!
आइ��, गुरु जाम्भोजी के बताए 29 नियमों का पालन करते हुए प्रकृति और जीवों के संरक्षण का संकल्प लें।
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