बहुत बड़ा पापी था पंडित राघव चेतन, इस नीच ने पहले रावल रतन सिंह और पद्मावती के एकांत के पलो को छुपकर देखा,
जब पकड़ा गया तो रावल रतन सिंह ने इसे देश निकाला दे दिया था, यही बड़ी गलती हो गई इसको तुरंत काट देना चाहिए था, चेतन खिलजी से मिल गया और गद्दारी की,
इसकी गद्दारी की वजह से रावल रतन युद्ध हारे और रानी पद्मावती सहित 800 महिलाओं को जौहर करना पड़ा।
तुलसी की किताब रामचरितमानस जिसमे वह मस्जिद में सोता है ऐसा बताता है उसमे कौनसा समता का सिद्धांत है?
किताब में लिखा हुआ है:
"पूजहिं विप्र सकल गुण हीना।
शूद्र न पूजहुं वेद प्रवीणा॥"
अर्थात् "ब्राह्मण चाहे कितना भी गुणहीन हो, उसकी पूजा करनी चाहिए। शूद्र चाहे कितना भी वेदों में प्रवीण हो, उसकी पूजा नहीं करनी चाहिए।"
इसमें समता कहाँ है?
𝐁𝐉𝐏-𝐑𝐒𝐒 और 𝐍𝐃𝐀 घोर आरक्षण विरोधी है। इसलिए इनकी सरकार में:-
👉 देश के विश्वविद्यालयों में 𝐒𝐂-𝐒𝐓-𝐎𝐁𝐂 वर्गों के कुल 𝟏𝟎 कुलपति भी नहीं है।
👉 भारत सरकार के सचिवों में 𝐒𝐂-𝐒𝐓-𝐎𝐁𝐂 वर्गों के कुल 𝟏𝟎 सचिव भी नहीं है।
👉 उच्च न्यायालयों में 𝐒𝐂-𝐒𝐓-𝐎𝐁𝐂 वर्गों के कुल 𝟏𝟎 न्यायाधीश भी नहीं है।
इन क्षेत्रों में देश की 𝟗𝟎 नब्बे फ़ीसदी आबादी का 𝟏𝟎 प्रतिशत भी प्रतिनिधित्व नहीं है। इससे स्पष्ट है कि यह सरकार या तो यह मानती है कि 𝐒𝐂-𝐒𝐓-𝐎𝐁𝐂 वर्गों की 𝟗𝟎% आबादी के लोगों में कोई प्रतिभा और योग्यता नहीं है, अगर प्रतिभा/योग्यता है तो उन्हें अवसर क्यों नहीं दिया जा रहा?
क्या कुलपति का चयन ये लिखित परीक्षा से करते है? बाबा साहेब के संविधान में इन्हें समानता और आरक्षण का अधिकार मिला तो अब ये भाजपाई उन अवसरों को समाप्त कर रहे है। 𝐒𝐂-𝐒𝐓-𝐎𝐁𝐂 वर्गों के आरक्षित कोटे की लाखों नौकरियां रिक्त क्यों है?
दलित-पिछड़े वर्गों का वोट लेकर 𝐁𝐉𝐏-𝐑𝐒𝐒 की गोद में बैठे नीतीश कुमार, चिराग पासवान, जीतनराम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा, अनुप्रिया पटेल, राजभर, निषाद, सुदेश महतो जैसे लोग और उनकी पार्टियां वंचित वर्गों की दुश्मन है।
यह कभी न बदलने वाला चलन है, लोग जातिगत आरक्षण खत्म करना चाहते हैं, लेकिन जाति खत्म करने की बात नहीं करेंगे… ये तो तथाकथित पढ़े-लिखे लोग हैं जो आपके उपनाम से आपका सब कुछ तय कर लेते हैं… कमाल है… पुराने दौर का भारत भी ऐसा था और नए दौर का भी ऐसा ही है… No regrets, did nothing wrong, says woman seen abusing Greater Noida society guards in viral video https://t.co/210A49rFKS
सारे मानवाधिकार के मूल्यों को कुचल दिया , पांडे sp ने और यूपी पुलिस के अधिकारियों ने
अभी कोई बहुजन CM होता तो मीडिया छाती पीटकर एजेंडा बना रही होती , और कही बहुजन अधिकारी होता तो सारे मनुवादी मानसिकता के पत्रकार की पत्रकारिता जागृत हो गई होती
लेकिन अफसोस बहुजन सोया है यहां बहुजनो और अल्पसंख्यक के अधिकार को कुचला जाता रहेगा
कुछ नहीं होगा, दैनिक भास्कर ने शानदार रिपोर्टिंग की है
आखिर IPS अविनाश पांडे पर कब कार्रवाई होगी, जिस दारोगा ने इस तरह हरकत की उसके खिलाफ कब कार्रवाई होगी , आखिर कब सस्पेंशन होगा
एक बार यूपी पुलिस के पूर्व डीजीपी ने बातचीत के दौरान सही कहा था कि जेलों के अधिकतर जुल्म और कैदी ओबीसी sc st अल्पसंख्यक है
सभी हिंदुओं से पूछना है कि वेदों, मनुस्मृति और रामचरितमानस में समता का कौन-सा सिद्धांत लिखा है, जिसके आधार पर अपने को शंकराचार्य कहने वाला व्यक्ति यह कह रहा है कि समस्या वर्ण व्यवस्था, जाति व्यवस्था और रामचरितमानस में नहीं है, बल्कि समस्या संविधान में है?
11वीं में पढ़ने वाली बच्ची वर्कशॉप से लौट रही थी। आधी रात को वह बस में बैठी।
बस 47 किलोमीटर चली और बस में उस बच्ची के साथ बलात्कार हुआ। बस में पर्दे लगे हुए थे और पूरे 47 किलोमीटर में एक बार भी बस की जाँच नहीं हुई!
अमित शाह की दिल्ली पुलिस बच्चियों पर लाठी चलाना जानती है, लेकिन उनकी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी किसकी है?
47 किलोमीटर बस चली। बच्ची के साथ बलात्कार हुआ। उसे कश्मीरी गेट पर सड़क किनारे फेंक दिया गया और मीडिया में हर जगह चुप्पी है!
क्या अमित शाह का ऑर्डर लेने के लिए ही बैठी रहती है दिल्ली पुलिस? आम जनता के प्रति, देश की बेटियों के प्रति कोई जवाबदेही है?
Caste Census is important to identify not only backwardness but also inter-se backwardness to optimize reservations.
There is a urgent need for conducting caste survey in Tamilnadu.
मोहित जाटव व दिग्विजय भाटी को जिस प्रकार मेरठ पुलिस ने थाने में बुलाकर बर्बरता की है व ललिता गौतम के लिए न्याय माँगने के आन्दोलन के दौरान रवि गौतम के खिलाफ बर्बरता की है वह बेहद शर्मनाक व चिंतनीय है, यह वर्ण-व्यवस्था तथा जातिवाद का जीता जागता उदाहरण है, ऐसा प्रतीत होता है मानो उत्तर प्रदेश में कानून का नहीं बल्कि पुलिसिया राज चल रहा हो !
कौन हैं श्याम लाल यादव, श्याम लाल यादव भारत के टॉप इन्वेस्टिगेटिव पत्रकार में से एक है , इनकी किताब RTI से पत्रकारिता अपने आप में एक बड़ी खोजी रिपोर्ट का संकलन है , इन्हें भारतीय खोजी पत्रकारिता का गॉड फादर कहना गलत नहीं होगा
इनकी रिपोर्ट ने किस तरह अमिताभ बच्चन , ऐश्वर्या रॉय, अरुणाचल के सीएम, यूपी stf के चीफ अमिताभ यश , जयंत सिन्हा इत्यादि की पोल खोल दी थी, लिंक कमेंट बॉक्स में है स्टोरी का
ये गोदी मीडिया के स्टूडियो में बैठकर teleprompter पढ़ने वाले पत्रकार नहीं है इन्हें इंडियन मीडिया इंडस्ट्री और भारत के बड़े सुलझे पत्रकारों में गिनती होती है , बस अफ़सोस की बात यह है कि ये कैमरा पर बैठकर ये गमछे पहनकर बातों को घुमाना इन्हें आता नहीं, सोचिए इन्होंने एक रिपोर्ट को करने के लिए लाखों पन्ने को पढ़कर और RTI के जरिए अपनी पत्रकारिता को धारदार बनाया
आरक्षण का विरोध करने वालों के पास जब तर्क कम पड़ जाते हैं, तो अक्सर वे सवाल उठाने वाले व्यक्ति पर सवाल उठाने लगते हैं
श्याम लाल यादव The Indian Express के वरिष्ठ investigative journalist हैं। उनकी पहचान ऐसी पत्रकारिता से बनी है जिसमें आरोपों से ज्यादा महत्व RTI, सरकारी दस्तावेजों, leaked records और financial documents का होता है
उनकी चर्चित पड़तालों में अयोध्या की जमीन, Supreme Court judges की assets disclosure, Panama Papers और Paradise Papers जैसी investigations शामिल हैं।
अयोध्या की जमीन से लेकर Supreme Court तक
1. राम मंदिर पर Supreme Court के फैसले के बाद अयोध्या में जमीन की कीमत और महत्व तेजी से बढ़ा। Indian Express की उनकी रिपोर्टिंग ने यह पड़ताल की कि किस तरह कुछ अधिकारियों, नेताओं और उनसे जुड़े परिवारों ने अयोध्या में जमीन खरीदी और इन transactions में क्या असामान्यताएं थीं। जमीन के records और registry documents के आधार पर की गई इस रिपोर्टिंग ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में सवाल खड़े किए।
2. 18 सितंबर 2024 की उनकी रिपोर्ट ने Supreme Court की transparency पर भी गंभीर सवाल उठाया। उस समय 33 serving judges में से 27 ने अपनी personal assets CJI के office में जमा की थीं, लेकिन उनकी संपत्तियों का विवरण सार्वजनिक रूप से Supreme Court की वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं था। सवाल सीधा था—जब assets declaration लिया जा रहा है, तो उसे public domain में क्यों नहीं रखा जाता?
3. Panama Papers: offshore दुनिया का भारतीय connection
Panama Papers में Mossack Fonseca के करीब 11.5 million leaked documents थे। Indian Express ने इनमें भारतीय connections की जांच की और Amitabh Bachchan, Aishwarya Rai Bachchan, K. P. Singh, Vinod Adani, Iqbal Mirchi, Shishir Bajoria और Anurag Kejriwal जैसे चर्चित नामों से जुड़े offshore records की पड़ताल की।
लेकिन असली कहानी सिर्फ नामों की सूची नहीं थी। Documents को corporate records, addresses और financial information से cross-check किया गया। बाद की RTI-based investigation में सामने आया कि Indian tax authorities ने Panama Papers के बाद ₹20,078 करोड़ के undeclared assets identify किए थे। 46 prosecutions और 83 searches/surveys की जानकारी भी सामने आई।
4.Paradise Papers: offshore system कितना बड़ा है?
2017 के Paradise Papers में करीब 13.4 million documents थे। Indian Express ने लगभग 10 महीने की investigation में 714 भारतीयों के links की पड़ताल की।
सबसे उल्लेखनीय findings में Sun Group से जुड़ी 118 offshore entities शामिल थीं। Investigation ने यह भी दिखाया कि offshore finance केवल businessmen की कहानी नहीं है। इसके पीछे law firms, accountants, banks और corporate service providers का पूरा professional ecosystem काम करता है।
इन structures का इस्तेमाल tax planning, assets रखने, aircraft/yachts, real estate, offshore accounts और corporate restructuring जैसे उद्देश्यों के लिए किया जाता था। इनमें से offshore investment अपने-आप में अपराध नहीं है; सवाल disclosure, legality और वास्तविक beneficial ownership का है।
इनकी सारी ख़बरों राम मंदिर, पनामा पेपर्स पैराडाइस पेपर्स का लिंक कमेंट बॉक्स में है
आप भारत के तमाम भ्रष्टाचार की परत खोलती किताब Journalism through RTI को ऑर्डर करके पढ़ सकते है , पत्रकारिता के नए बच्चों को ये किताब जरूर पढ़ना चाहिए
लिंक –
https://t.co/rys73M6Dqv
@RTIExpress@ICFJ@AnilYadavmedia1@IndianExpress@saurabhtop@meenakotwal
आज के युवा सिर्फ रोजगार नहीं , बल्कि समान अवसर और सम्मान के साथ आगे बढ़ना का अधिकार चाहते हैं।
हमारी जिम्मेदारी है कि हर वर्ग के युवा को आगे बढ़ने का अवसर मिले
: @iChiragPaswan
A Dalit PhD scholar, Anagha Shashi, and her mother have been protesting at Kerala’s Thunchath Ezhuthachan Malayalam University since August 14, 2026.
August 31 marks the 18th consecutive day of their protest. They allege caste and gender discrimination, harassment, being forced to undertake non-academic work, and being denied proper opportunities to pursue their research. #DalitLivesMatter