रिलायंस जियो ने शुरुआत में देशभर में लोगों को फ्री वॉयस कॉल और अनलिमिटेड 4G इंटरनेट देकर लुभाया। उस समय इसे “डिजिटल क्रांति” कहा गया, लेकिन असल में यह एक योजनाबद्ध जाल था।
जब हर हाथ में Jio सिम पहुँच गई और बाकी टेलीकॉम कंपनियाँ टिक नहीं सकीं, तब धीरे-धीरे असली खेल शुरू हुआ।
पहले ₹149 का प्लान ₹249 हुआ, फिर ₹349, अब ₹899 तक पहुँच गया। हर साल दाम बढ़ रहे हैं, पर नेटवर्क और स्पीड वहीं के वहीं हैं।
TRAI और सरकार दोनों चुप हैं — क्या ये मिलीभगत नहीं?
लोगों को ऐसी डिजिटल लत लगा दी गई है कि अब बिना इंटरनेट कोई काम नहीं चलता।
अब उपभोक्ता के पास विकल्प नहीं, मजबूरी है।
डेटा पैक जबरन बेचे जा रहे हैं, वॉयस-ओनली रिचार्ज खत्म कर दिए गए।
गरीब और मध्यम वर्ग रोज़ाना लुट रहा है, और ये कॉर्पोरेट कंपनियाँ अरबों का मुनाफ़ा कमा रही हैं।
यह “डिजिटल इंडिया” नहीं, “कॉर्पोरेट इंडिया” है — जहाँ जनता ग्राहक नहीं, शिकार बन चुकी है।
Jio AirFiber की घटिया सेवा – उपभोक्ताओं के साथ खुला धोखा
मैं जयपुर ज़िले के एक ग्रामीण क्षेत्र का उपभोक्ता हूँ।
एक वर्ष पहले गाँव में इंटरनेट की समस्या के कारण मजबूरी में Jio AirFiber का कनेक्शन लिया।
हर महीने ₹706 का भुगतान नियमित रूप से कर रहा हूँ।
शुरुआत के कुछ महीने ठीक रहे, लेकिन पिछले कई महीनों से हालात बदतर हो चुके हैं।
अब तो दिन में 5-7 घंटे तक ‘No Internet’ दिखाता है।
मैंने कई बार शिकायत की, हर बार बस यह कहा गया कि “टीम काम कर रही है”
अब समय आ गया है कि Jio जैसी कंपनियों की पोल खुले, हम ग्रामीण उपभोक्ता कोई भिखारी नहीं हैं - हम भी अपने अधिकारों के लिए खड़े होंगे।
ज्यादा से ज्यादा रिट्वीट करें और अपना विरोध दर्ज कराये। ✊
@JioCare@reliancejio #ambani
क्या आप जानते हैं कि भारत में बने ज़्यादातर TVs का 80% हिस्सा चीन से आता है?
‘मेक इन इंडिया’ के नाम पर हम सिर्फ असेंबली कर रहे हैं - असली मैन्युफैक्चरिंग नहीं। iPhone से लेकर TV तक - पुर्ज़े विदेश से आते हैं, हम बस जोड़ते हैं।
छोटे उद्यमी निर्माण करना चाहते हैं, लेकिन न नीति है, न सपोर्ट। उल्टा, भारी टैक्स और चुने हुए कॉरपोरेट्स का एकाधिकार - जिसने देश के उद्योग को जकड़ रखा है।
जब तक भारत उत्पादन में आत्मनिर्भर नहीं बनता, रोज़गार, विकास और "Make in India" की बातें सिर्फ भाषण रहेंगी।
ज़मीनी बदलाव चाहिए ताकि भारत असेंबली लाइन से निकलकर असली मैन्युफैक्चरिंग पावर बने और चीन को बराबरी की टक्कर दे सके।
बिहार की इस छोटी गरीब बच्ची से पत्रकार ने पूछा कि सरकार से क्या कहना चाहती हो,
बच्ची ने कहा कि,
हमारे स्कूल में एक कमरा बनवा दो,
बारिश और धूप में बहुत दिक्क़त होता है,
गीली ज़मीन पर और धूप में बैठना पड़ता है,
निश्चित ही इस बच्ची के पास पक्का घर भी नहीं होगा,
लेकिन उसने स्कूल के लिए छत मांगी,
जिस देश में बच्चों को स्कूल जैसी बुनियादी चीजें भी उपलब्ध नहीं,
उस देश की पांच ट्रिलियन इकॉनमी मेरे गाँव वाले घोड़े पर,
PNR No 2338310371
तेजस एक्सप्रेस में मिला खाना बेहद घटिया था। रोटी पापड़ जैसी सख्त, पनीर बासी और दाल की जगह सिर्फ़ पानी परोसा गया।
क्या यही है रेलवे की “वर्ल्ड क्लास” सेवा? यात्रियों की सेहत से खिलवाड़ बंद हो!
माननीय @AshwiniVaishnaw जी, कृपया संज्ञान लें।
@RailMinIndia