मैंने चारबाग से लखनऊ एयरपोर्ट तक एक ऑटो बुक किया, ऑटो चालक का नाम था-अंकित तिवारी।
मैंने उससे हालचाल पूछा और कर ली अपनी सवारी।
अमौसी के पास जाम में फँसे थे तभी ऑटो की हल्की सी खरोंच से एक कार का पेंट उतर गया।
कार वाला बाहर निकला, अंकित को ऑटो से खींचकर तीन-चार थप्पड़ जड़ दिए।
वह चुप रहा, अपराध-बोध से सिर झुकाए फिर अपनी सीट पर आ बैठा।
कार जब आगे निकली उसके पीछे लिखा था-"मोहित यादव।"
मैं देर तक सोचती रही-इन दोनों में पिछड़ा कौन था?
SC/ST एक्ट का दुरुपयोग बंद होना चाहिए…..
इस एक्ट के कारण पूरे देश में 80% आबादी प्रताड़ित है। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। अब पत्रकारों पर भी SC/ST एक्ट लगाया जाने लगा?
SC/ST एक्ट के जितने भी केस होते हैं, जिनमें से 92 परसेंट फेक साबित होते हैं, उन केसों का 81 से 84 परसेंट हिस्सा OBC समाज के लोगों पर दर्ज होता है। यादवों पर, जाटों पर, गुर्जरों पर, कुर्मियों पर, कुशवाहा पर, ये सभी लोग OBC हैं। तो भाई, आप लोग इनके द्वारा सबसे ज्यादा पीसे जा रहे हो। इसमें आपको आगे आना चाहिए, और इसके साथ ही OBC समाज के हर उस व्यक्ति को आगे आना चाहिए जिसे लगता है कि इस तरह के एक्ट से समाज विभाजित हो रहा है।
आप खुद को केवल 'यादव' तक सीमित कर लेते हैं, लेकिन यादव भाई, मैं जानता हूँ कि यादव समाज सबसे धार्मिक समुदायों (one of the most religious clans) में से एक है, बिहार में भी और यूपी में भी। अक्टूबर 2024 में डासना में जब जुबैर के ट्वीट के बाद दस हजार की भीड़ पहुँच गई थी, तब यादव भी वहाँ डटकर खड़े थे, वही मंदिर को बचा रहे थे। तो भाई, आप भी इसमें आगे आओ। आप लोग इस एक्ट के तहत सबसे अधिक टारगेट होते हैं। आखिर इसे चाहता कौन है? कौन कहता है ये सब करने के लिए?
कहीं एक जगह ऐसा होता होगा कि आप किसी को घोड़ी चढ़ने से रोक रहे होंगे, लेकिन उसे सौ बार इस तरह से दिखाया जाता है जैसे कि हर यादव, हर OBC उन्हें घोड़ी पर चढ़ने नहीं दे रहा।
जबकि ऐसा तो है नहीं। तो जब अपवादों (exceptions) को उदाहरण बनाकर आपके पूरे जाति समूह को, आपकी पूरी जाति को अपमानित किया जाता है, तो यह आपके लिए भी उचित सलाह है कि आप आगे आइए। क्या जातिवाद आपके खिलाफ नहीं होता है? 'OBC Atrocity Act' क्यों नहीं होना चाहिए? 'सवर्ण Atrocity Act' क्यों नहीं? क्या यादवों को 'गँवार' और इस तरह के अन्य आक्षेप नहीं सहने पड़ते हैं? आखिर ऐसी कौन सी जाति है जिसके ऊपर जातिवादी टिप्पणी नहीं होती है?
जब ब्राह्मणों को नहीं छोड़ा जा रहा है, उन्हें 'ब्राह्मणवादी', 'भिखमंगा', 'मनुवादी' और पता नहीं क्या-क्या बोला जाता है, और वो सब के सब नेगेटिव इंटेंट (negative intent) के साथ बोले जाते हैं। फिर आप क्यों अपने आपको इससे अलग रखकर चल रहे हो? OBC समाज should be the first in line.
भाई, ये जो भी जातिवाद के उदाहरण रखते हैं, उन्हें देखने की जरुरत है। और आपका कटऑफ भी अब जनरल के बराबर ही आ रहा है, तो आपके लिए तो वैसे भी आरक्षण का उतना अधिक मतलब रह नहीं गया है। तो चाहे आरक्षण की बात हो या SC/ST Atrocity Act की, या फिर अभी आपको लग रहा होगा कि 'चलो भाई, UGC में हम तो बचे हुए हैं', लेकिन यदि कोई SC/ST आपसे बदला लेना चाहे, तो वह आपका भी जीवन खराब कर सकता है। You are not protected from the SC/ST Act. या जो UGC regulations 2026 हैं, उनमें भी आपको कोई प्रोटेक्शन नहीं है।
आपके पास सिर्फ इतनी प्रोटेक्शन है कि यदि आप पर कोई जातिवादी टिप्पणी करेगा तो आप भी काउंटर कर सकते हैं; काउंटर ही नहीं, आप भी जाकर शिकायत कर सकते हैं। But as such, यदि कोई SC/ST आप पर झूठा आरोप लगा दे, तो आप भी फँस जाओगे।
इस बात को समझो and come into this; oppose these shitty regulations and these acts, जो समाज को विभाजित करने में लगे हुए हैं। And leftists are having a bloody field day. They are laughing and having a great time at our expense. इस बात को समझिए और साथ आइए।
वाह @BJP4India सरकार! ये नए पैंतरे तिलचट्टों के लिए तो नहीं आज़माए थे! उनको तो दामाद बनाए घूम रहे थे! आज हमारे लिए बैरिकेड्स? याद रखना @DelhiPolice सारे बैरिकेड्स धरे रह जाएँगे, ये दोगलापन त्यागो, लोगों को स्टेज तक पहुँचने दो। मैं भी आ रहा हूँ!
Dear @narendramodi, it is a pleasure to meet again so soon.
Since we have concluded the mother of all trade deals, we have been moving fast to deliver on our commitments.
We will sign the Free Trade Agreement by the end of the year.
And accelerate work on an investment agreement.
We will also step up security & defence cooperation.
And join forces for better connectivity by advancing IMEC, the India–Middle East–Europe Corridor.
@narendramodi Congratulations on becoming the longest serving prime minister elected in India’s history, and thank you for supporting innovation that enriches people’s lives!
कोचिंग माफिया वाले मास्टर और 'सर' लोगों को नैतिकता के दंभ नहीं भरने चाहिए। चाहे ख़ान हो या अभिनय, इनके वीडियो में ज्ञान कम और परफॉरमेंस अधिक होता है। मैथ्स पढ़ाने वाले जब कोविड वैक्सीन के कारण लोगों को हार्ट अटैक होने की बकवास करते हैं और स्मार्ट बोर्ड के सामने नाचने लगते हैं, तो वो टीचिंग नहीं होती।
ख़ान, ओझा, स्कोडा, लहसुन सब के सब को देखा हुआ है, सबका मॉडल पता है। ये लोग बच्चों के पक्ष में नहीं होते, ये केवल उस पक्ष में खड़े हो कर अपना पक्ष प्रबल कर रहे होते हैं। ख़ान ने कहा था कि ये मीडिया वाले पुतिन का इंटरव्यू करेंगे? उसका इंटरव्यू किसी BPSC या UPSC की तैयारी करने वाले को करना चाहिए!
कितनी बकचोदी वाली बात है ये! UPSC या BPSC वाले (अधिकांशतः) केवल रट्टू तोते होते हैं और वो जब सेलेक्ट हो कर जाते हैं तो कहते हैं कि परीक्षा तो ऑफलाइन होती है, कोई हैक कैसे कर लेगा वेबसाइट!
UPSC में जाने वाले भारत के टॉप ब्रेन नहीं होते, वो घूसखोरी के सबसे बड़े प्रतिमान होते हैं। उनमें से कुछ अपवाद हैं जो देश को किसी तरह चला रहे हैं, इसलिए उन्हें जो भी उदाहरण बना रहा है, उसे ना देश की समझ है, ना प्रतिभा की।
कोचिंग माफिया एक माफिया है, जो बच्चों की असफलता पर थ्राइव करते हैं। असफलता का भार कभी कोचिंग पर नहीं होता, वह सदैव ही तंत्र पर होता है। मैंने दिव्यकीर्ति की बकवास भी सुनी हुई है और मुखर्जीनगर में 16 वर्ष रह कर यह जानता हूँ कि कोचिंग वालों को स्वयं ना भाषा का ज्ञान है, ना विषय का। तंत्र भी बेकार है, पर तुम दूध के धुले नहीं हो।
परंतु हाँ, इसमें भी कई अपवाद होंगे जैसे कि मीडिया में भी कई अपवाद हैं जो अच्छे हैं। पर हाँ, यदि मीडिया बिकी हुई है (जो कि वास्तव में है), तब भी बच्चों के नाम पर नैतिकता की बात करने वाले ये अधिकांश यूट्यूब टीचर स्वयं अनैतिक हैं।
टीचर शब्द आते ही हमारे मन में सम्मान की भावना जागृत हो जाती है। लेकिन इन महानुभाव का पहनावा और हरकते देखकर आपको कहीं से लग रहा है ये शिक्षक हैं।
@anjanaomkashyap मैडम आप सही हो।
In defense of Indian 🇮🇳 democracy!
During Prime Minister Narendra Modi most successful visit to Norway a minor incident happened. A Norwegian journalist demanded that the prime minister starts holding press conferences. She claimed that Indian democracy is in bad shape.
May be its time to pause? May be its time to be a bit curious to the world’s largest democracy?
Two weeks ago five Indian states and territories held elections. The turn out in the battlefield state of West Bengal was 94%. In the last local election in Norway it was 62%, in many European local elections turn out is below 50%. Can voting in massive numbers be a signal Indians trust their democratic process?
In the same election BJP won big in Assam and West Bengal. It lost even bigger in Kerala and Tamil Nadu. Can this diversity be a signal that Indian democracy is reflecting the will of the people?
The journalist referred to a democracy ranking putting India at 157 in the world, behind many dictatorships and deeply troubled states. When a ranking is so obviously contrary to common sense, why not ask critical questions to those making the ranking rather than demand that leaders shall comment on nonsense? I recommend Salvatore Babones book “Dharma democracy”. The book debunks convincingly the flawed methodology of these rankings.
It was referred to a ranking claiming it’s very dangerous to be a journalist in India. Reality is that it is more dangerous to be journalist in the US and far more dangerous in the vast majority of other nations in the world.
Let’s be real. India is not perfect. Of course there are incidents. India has a population the size of North America, South America and Europe combined. But India is much more peaceful than Europe or the Americas. That’s remarkable - given the ethnic, language and religious diversity of India and the many development challenges.
Unless we consider democracy a form of government only suited for some very small, peaceful and homogeneous Western European nations, may be we should commend Indian democracy?
India is the only major former UK colony which became and has remained a democracy. Its sometimes claimed that the Brits taught India democracy. If that was the case why isn’t Myanmar or Pakistan or the Gulf kingdoms democracies??? Reality is that Indian democracy is both homegrown and extraordinary successful.