पढ़नी न थी तो फिर लाई क्यूँ आज अलमारी में पड़े़-पड़े बोल उठी एक किताब मुझसे..!
#Firstnovel#Firstbook
ये किताब मैं करीब 6 महीने पहले लायी हूँ पर किसी कारणवश नहीं पढ़ पाई अब तक,सोच में हूँ पढ़ूं कि नहीं पढ़ूं..
अगर आप में से किसी ने पढ़ा है तो कुछ बता सकते हैं इसके बारे में...!
तुम्हारे प्रेम पर हो बस अधिकार मेरा
हृदय में तुम्हारे हो बस नाम मेरा
तुम चाहो जीवनपर्यंत मुझे
तुम्हारी स्मृतियों में हो बस छवि मेरी
हाँ,प्रेम में स्वार्थी बहुत हूँ मैं 🙃