संजय जी, अपनी कुंठा कहीं बाहर जाकर निकालें ! १५ साल के बिहार के इस लड़के पर बार बार अटैक करने से आपको कुछ नया फुटेज जरूर मिल जाएगा लेकिन इतिहास में आपकी पहचान इसी कुंठा के रूप में रह जाएगी जहाँ आप 1५ साल के लड़के से इनसिक्युअर दिख रहे थे! उससे जलते थे!
आज के मैच में मिली करारी हार के संकेत को समझिये! और गौतम गंभीर से लेकर संजय जी को यह बात समझ लेनी चाहिए की आज आयरलैंड के स्टेडियम में लोग वैभव सूर्यवंशी को देखने आए थे!
इस लड़के पर स्पेशल फीचर करने न्यूयोर्क टाइम्स ने अपनी टीम को भेजा था! यह मुकाम १५ साल के लड़के ने अपनी प्रतिभा और बैटिंग से पाई है!
आप स्वीकार करें न करें! आप जले या कुछ हो, हकीकत स्वीकार करें,वैभव आज की तारीख में बड़ा सुपरस्टार है और जिस राजनीति के कारण भी उसे टीम से दूर रखेंगे, नुकसान क्रिकेट का होगा! वैभव ने मरते क्रिकेट को जिन्दा किया है! अब लोग फिर से क्रिकेट की ओर इस लड़के को देखने के लिए आ रहे हैं!
अगर यह बात सुनने में आप लोगों को अखरता है तो इसमें न वैभव की गलती है न हम जैसे दर्शकों की! यह गलती आपकी सोच है की बिना किसी बैकिंग,गॉड फादर के कोई इतनी कम उम्र में बिहार से आकर इतना बड़ा स्टार कैसे बन सकता है! यह आपके ईगो को ठेस पहुंचा रहा है तो इसमें आप खुद को करेक्ट कीजिये! दिल बड़ा कीजिये!
और संजय जी आप जिस "आउटसाइड नॉइज़" की बात कर रहे हैं न वही देश में क्रिकेट की आत्मा है! जिस दिन इस "आउटसाइड नॉइज़ "
ने आवाज बंद कर दी न ,घर चलना आपका बंद हो जाएगा! दूसरे खेल से जुड़े लोगों की जरा हालत देखे लें! पता चल जाएगा! आप लोगों की जो शान शौकत,पैसा दौलत है ना उसके लिए यही "आउटसाइड नॉइज़" का ही योगदान है! यह कड़वी सच्चाई है! तो भविष्य में क्रिकेट प्रेमिओं को
"आउटसाइड नॉइज़" कहने से पहले लाख बार सोचियेगा!
बहुत कुछ कहना है! लेकिन सौ बात की एक बात की अब वैभव सूर्यवंशी को न खिलाने का फैसल सिर्फ ईगो और ईर्ष्या है! लेकिन यहाँ तक जैसे इस लड़के ने बाधा पार की,आगे भी करेगा! इस तूफ़ान को कोई संजय मांजेरकर,बोर्ड या गंभीर रोक नहीं पाएगा!
क्या आपको नहीं लगता Chennai Super Kings, Mumbai Indians और Kolkata Knight Riders की तरह बेमिसाल बिहार की भी एक टीम होनी चाहिए?
बिहार की मिट्टी ने देश को बहुत से बेहतरीन क्रिकेट खिलाड़ी दिए हैं।
पटना में जन्मे ईशान किशन ने सबसे कम गेंदों में ODI double century लगाई। समस्तीपुर के वैभव सूर्यवंशी सबसे कम उम्र में IPL debut करने वाले खिलाड़ी बने। और गोपालगंज के साधारण परिवार में जन्मे साकिब हुसैन की शानदार गेंदबाजी पर आज पूरी दुनिया की नज़रें हैं।
लेकिन एक बात मुझे हमेशा खलती है कि हमारे बिहार को क्रिकेट में अब भी वह नाम और पहचान क्यों नहीं मिल पा रही जिसके हम हकदार हैं।
मेरा हमेशा से यह सपना और प्रयास रहा है कि बिहार के युवाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का पूरा मौका मिले, हमारे खिलाड़ियों को भी world class infrastructure और support बिहार में ही मिलना चाहिए। मुझे पूरा भरोसा है कि अगर हमारे बच्चों को सही प्रेरणा और सुविधाएं मिलें, तो हमारे बिहार से बनने वाली टीम दुनिया की बेस्ट टीम होगी।
और मैं इस काम में बिहार के युवाओं के साथ पूरी मज़बूती से खड़ा हूँ। बिहार की क्रिकेट टीम और यहाँ के खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए मैं अपनी तरफ से unconditional support दूंगा।
बिहार मेरे लिए सिर्फ एक राज्य नहीं, एक emotion है।
और अब वक्त आ गया है कि हमारी मिट्टी का talent मैदान पर दिखे।
"From a Washington perspective, #Pakistan is not a woman to marry, but rather a whore to use and discard. Munir is just the latest pimp. Trump’s term is ending and whoever comes next—Republican or Democrat—will likely agree on one issue: Pakistan is not to be trusted, nor will the United States feel any obligation to respect any Trump promises to Munir."
I explain in my latest @SundayGuardian commentary: https://t.co/Xdsz9jyZnc
As the son of immigrants from India, I take great pride in both my heritage and in the country that gave my family the opportunity to build a better life. My parents came to the United States legally in search of that opportunity.
My mother spent 35 years working as a public school teacher. My father worked as an engineer. They instilled in my brothers and me a deep belief in hard work, public service, and giving back to the country that welcomed them.
I am a product of that American story. I attended California’s public schools from kindergarten through medical school, became a doctor, and now have the privilege of serving our nation in Congress. That is what the American Dream looks like.
The comments shared by President Trump are offensive, ignorant, and beneath the dignity of the office he holds. They reflect a fundamental misunderstanding of who we are as a nation. America has always been strengthened by generations of immigrants who come here, work hard, and contribute to our country. They do not weaken America — they strengthen it.
America was built by people from all over the world who believed in its promise and worked tirelessly to make it better for the next generation. That’s the story of my family, and it’s the story of millions of families across our nation.
President Trump, who was born into wealth and privilege, has never had to struggle the way so many immigrant families have. He does not understand the grit, sacrifice, and determination it takes to build a life from the ground up. He does not understand public service, and he does not understand the values that make America the greatest nation in the world.
We are a nation of immigrants, and we are stronger because of it.
देश-विदेश में रहने वाले बिहार के सभी लोगों को बिहार दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। विश्व के प्रथम गणराज्य की भूमि होने के साथ-साथ, गौरवशाली साम्राज्यों और महान सांस्कृतिक-आध्यात्मिक धाराओं को जन्म देने वाली इस धरती ने विभिन्न क्षेत्रों में योगदान दे कर, भारत-भूमि को सदैव समृद्ध किया है। मुझे विश्वास है कि राज्य के निवासी अपनी असीम प्रतिभा और परिश्रम से, बिहार और पूरे देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। मैं राज्य के, तथा सभी निवासियों के, स्वर्णिम भविष्य की मंगलकामना करती हूँ।
फील प्राउड टू बी बिहारी
आज बिहार दिवस है। राजनीतिक दिवस अपनी जगह है। लेकिन लगा कि बिहार और बिहारी के रूप में आज के दिन अपनी पुरानी बात फिर रखनी चाहिए!
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बिहार न थका है न रुका है। न डरा है, न शर्मिंदा है। फील प्राउड टू बी बिहारी।
अगर किसी कन्नड़ को अपनी एसेंट के साथ किसी भाषा में बोलने में कोई दिक्क्त नहीं होती,किसी बंगाली को अपने ऐसेंट से दिक्कत नहीं होती, न तमिल न उड़िया को तो फिर कई बिहारी को क्यों? क्यों आर्टिफिशिसल अावरणओढ़ते हैं? एक परिचित बिहारी मुझसे इस कारण दिल्ली में नाराज हो गये कि उनके साथ एक खास बड़े लोग जो मेरे भी परिचित थे, के सामने बिहारीपन में बात कर दी। देशी अंदाज के साथ। उनका मानना था कि उनके सामने उनकी इमेज सॉफिस्टिकेटेड है और बिहारी लिंक से इसपर असर पड़ सकता है। यह अलग बात है कि वह खास आदमी हमसे अक्सर उनका मजाक उड़ाते हैं जबकि मैं हमेशा 24 कैरेट बिहारी बना रहा हूं,बिना किसी गिल्ट के साथ।
क्यों हम में कई बिहार के सफर के साथ खुद को नहीं जोड़ते? क्या यह हीन भावना है? यह अपराध बोध है। अपराध बोध इस बात का कि ऐसा करने वाले वही हैं जो बाद में कई कारणों से बिहार को बदनाम करने की पटकथा लिखते हैं। इसमें सैडिस्टिक मजा लेते हैं।
इनकेकारण एक चोरी की तस्वीर पूरी बिहार की तस्वीर बन जाती है। उस तस्वीर को बिहार के ही लोग 'हें हें 'कर बिहार से पूरे विश्व में फ़ैलाते हैं। उन्हें बिहार की एक तस्वीर से मजाक उड़ाने में आत्मीय ख़ुशी होती है। एक क्राइम की खबर से उन बिहारियों का सर झुक जाता है और पूरे विश्व में उस खबर के साथ लोगों को डराते हैं कि बिहार घुसने पर लोगों का गला काट दिया जाता है।
लेकिन वे खामोश रहते हैं जब एक साल में सीमा पर सबसे अधिक बिहारी अपनी जान देते हैं। एक आनंद कुमार अकेले चुपचाप सैकड़ों बच्चों को आईआईटी भेज देता है। चुपचाप पूरे देश में भाषणो से दूर पंचायत में महिलाओं को आधा आरक्षण देने वाला पहला राज्य बन जाता है। बिहार के बारे में बोलये। गलत पर गलत बोलये। लेकिन यही ताकत अपनी सफतला पर भी बाेलये। नहीं तो न घर के रहेंगे न घाट के। राजनीति कभी काम नहीं देगी। नेता,दल,सरकार आती-जाती रहेगी। घर,मिट्टी आपकी स्थायी रहेगी।
बिहार को समझिये। जानये। मैं टिपिकल रिटोरिक अशोक की मिसाल या हर साल आईएएस पैदा करने के आंकड़े नहीं बताऊंगा। मैं बिहारी की सहन क्षमता बताऊंगा।
पिछले कई सालों दशक से बिहार और बिहारी की चर्चा बिहार के बाहर मजा, जंगलराज और खराब दशा के लिए होती रही है। इसमें कोई दो राय नहीं रही कि बिहार डवलपमेंट अजेंडा से पीछे हटा। ला एंड आर्डर के इशु रहे। ऐसे समय,जब बाकी दूसरे स्टेट ने बेहतर विकास किया,बिहार पीछे रहा। एजुकेशन सिस्टम खराब हुई। बिहारी अपमार्केट स्मार्ट नहीं बने। यह सारी बात सही है। छिपाना भी नहीं चाहिए। गलत है तो गलत है।
इसी राज्य में कई ऐसी खूबी है कि अगर उसे वे देश-विदेश को बताते तो राजनीति से इतर बिहार को लोग अधिक करीब से, अधिक प्रेम से देखते। लेकिन जब खुद के लोग ही तो फिर दूसरों से इज्जत की अपेक्षा क्यों रखें।
कभी एक गरीब बिहारी की जिंदगी देखी है? बाढ़-सूखा-पलायन से जूझता गरीब न हारा न झुका। वह खुश रहा। आप चैती गीतों को सुनये। बिहार का समाज शास्ऋ दिखेगा। सदियों से बिहारी संघर्ष करते रहे हैं। बिहारी मजबूर बने। लेकिन कायर नहीं। बिहार में किसानों की आत्म हत्या की समस्या सुनी है? बिहार में लोनमाफी के लिए आंदोलन को देखा? क्या उन्हें जरूरत नहीं थी? बिहारी सालों पे अपने संघर्ष को रहमोकरम नहीं,मेहनत से जोड़ा। जिसका आप कभी-कभी बिहार के बाहर मजदूरों की भीड़ देखकर उड़ाते हैं। लेकिन उसके दूसरे पहलू को आप नहीं जानते।
बिहार में हर साल सितंबर-अक्तूबर में बडृा हिस्सा बाढ़ में डूब जाता है। घरबार-फसल डूब जाता है। लेकिन दावा करता हूं,जब भी त्योहार के मौसम में आप उन इलाकों का दौरा करें। सभी के हंसते चेहरे आपको भनक नहीं लगने नहीं देखें कि अभी पहले उन्होंने अपना सब कुछ खोया है। कितना पांव पसारना चाहिए,यह यहां के लोगों को आता है।
आज जिस एनसीआरबी के आंकड़ों से बिहार के जंगलराज की बात करते हैं,उसी एनसीआरबी के हिसाब से आप इस बात को नहीं बताते कि बिहारी आत्महत्या नहीं करते। वे टूटते कम हैं। आप बिहारी पर जोक बनाते हैं तो आपके साथ् बिहारी भी हंसता है। यह ऐसा गुण है जिसे अभी पूरे विश्व को सीखने की सख्त जरूरत है। आप जिसे डाउन मार्केट कहते रहे वही तो आर्ट आॅफ लिविंग बिहारी की है। बिना बाबा के झान वाला।
रोने की आदत नहीं रही। फिनिक्स की तरह बार-बार उभरना बिहारी की ताकत रही।
@grok
Pet ke skin ke niche left side me 3 alag alag location par alag alag size ki gaanth ho gayi hai jo 16 din pehle notice Kiya tha. Dabane par dard nahi hota haddi ke bagal me hai .
Ek jagah thora lal lag raha hai skin
Bahut dar lag raha hai yeh kis type ki gaanth ho gayi hai
As you look at the horrific pictures of the bombed Iranian school…
Pause for a minute and think..
Indian Air Force and the Army were given 2 and 7 terror targets respectively to hit on the night of May 6-7 in Op Sindoor…
Each was fully destroyed…
On the morning of May 8, the IAF carried out extensive air defence suppression using long-range kamikaze drones…
On May 9-10 the IAF targeted 14 PAF bases or radar stations/missile batteries…
Destructive evidence of almost all these strikes cane up in satellite pictures…
All strikes were carried out by precision munitions from long distances…
Not one missed aim or strayed to harm civilians… no school, no village or city, no hospitals. None…
This despite not having a fraction of the US military weapons, sensors or surveillance ability…
And in a furiously contested air space against near-peer PAF and its Chinese air defences…
Let’s give credit where due. To our armed forces in this case…
पिछले दो दशक से भी अधिक समय से आपने अपना विश्वास एवं समर्थन मेरे साथ लगातार बनाए रखा है, तथा उसी के बल पर हमने बिहार की और आप सब लोगों की पूरी निष्ठा से सेवा की है। आपके विश्वास और समर्थन की ही ताकत थी कि बिहार आज विकास और सम्मान का नया आयाम प्रस्तुत कर रहा है। इसके लिए पूर्व में भी मैंने आपके प्रति कई बार आभार व्यक्त किया है।
संसदीय जीवन शुरू करने के समय से ही मेरे मन में एक इच्छा थी कि मैं बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों के साथ संसद के भी दोनों सदनों का सदस्य बनूँ। इसी क्रम में इस बार हो रहे चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनना चाह रहा हूँ।
मैं आपको पूरी ईमानदारी से विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि आपके साथ मेरा यह संबंध भविष्य में भी बना रहेगा एवं आपके साथ मिलकर एक विकसित बिहार बनाने का संकल्प पूर्ववत कायम रहेगा। जो नई सरकार बनेगी उसको मेरा पूरा सहयोग एवं मार्गदर्शन रहेगा।