विश्व विख्यात श्री सोनम वांगचुक जी से फोन पर बात करके उनके स्वास्थ्य के बारे में जाना और उनसे अनशन तोड़ने की अपील की। उनके सत्याग्रह को हमारा खुला समर्थन है।
हमारा मानना है कि वो जनहित में इस आग्रह पर विचार करें। देश की संपूर्ण युवा शक्ति, उनके अभिभावकों, परिवार और परिजनों की आकांक्षा भी यही है क्योंकि उनके नैतिक बल की देश को बहुत आवश्यकता है अतः वो पूरी दुनिया से आ रहे निवेदनों को स्वीकार करते हुए अपना अनशन तोड़े दें, फिर कुछ दिनों का स्वास्थ्य लाभ लें और नई ऊर्जा का संचय करके पुनः नये आंदोलन में जुट जाएं। उनसे सविनय आग्रह है कि वो ‘नकारात्मक, भ्रष्ट, बेईमान, लोकतंत्र विरोधी सांप्रदायिक भाजपा’ के विरुध्द हो रहे आंदोलनों को पूरे देश में विस्तारित कर जन-एकजुटता की अखंड कड़ी बनें।
नीट की परीक्षा के घोटाले के बाद मंदिर में चोरी के महापाप का भंडाफोड़ भी एक गहरा दिव्य-संकेत है। डॉक्टर को धरती पर भगवान के रूप में ही देखा जाता है। हम सब तो मंदिर और मेडिकल दोनों के गहरे संबंध में विश्वास करते हैं। धर्म के मनोबल का और चिकित्सा का मनोवैज्ञानिक संबंध भी होता है।
जिस तरह संपूर्ण विश्व का मीडिया श्री सोनम वांगचुक जी के लिए चिंतित दिखाई दे रहा है, उसका एक दूसरा पक्ष ये भी है कि इससे भाजपा राज में दुनिया भर में हमारे देश की डेमोक्रेटिक इमेज बुरी तरह खंडित हो रही है।
हम श्री सोनम वांगचुक जी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हैं।
@Wangchuk66
नई फ़िल्म “श्री रामभूमि” की शूटिंग का आज अयोध्या में पहला दिन है! श्री राममंदिर में जाकर रामलला से आशीर्वाद लिया! अपने, अपने परिवार/दोस्तों के लिए, फ़िल्म के लिए और आप सबके लिए भी! सुखद अनुभूति हुई! देश विदेश से आए हज़ारो राम भक्तों के साथ “जय श्री राम” की पुकार लगाई! 🕉🙏😍 #ShriRambhoomi #JaiShriRam @zeestudiosofficial
मंच पर विधायक पूजा पाल भावुक हुईं
उन्होंने कहा-
मेरे घर में कोई पुरुष नहीं... पैसे नहीं... अखिलेश यादव ने कहा था हम माफिया से दूर हैं...
जब अतीक अहमद मरे तो सब सपा के लोग छाती पीट-पीट कर रोए...
काजू भुने प्लेट में, पकवान निवास में,
उतरा है समाजवाद, अपने नेताओ ख़ास में !
बातें गरीबों की, पर महफ़िल रही विलास में ,
यही तो फर्क दिखता है नारे और इतिहास में!
चुनावी हिंदू!
जब रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई, तब निमंत्रण ठुकरा दिया।
अब चुनाव नजदीक हैं, तो अयोध्या और रामलला याद आने लगे।
पांच साल तुष्टिकरण की राजनीति और चुनाव आते ही मंदिर की राजनीति-यही है "चुनावी हिंदू" की असली पहचान।
एक घटना की आड़ में अयोध्या में पूरे हिंदू समाज को बदनाम करने के लिए रोज़ मीडिया को लेकर बैठ जाते है अखिलेश यादव।
ये वही नेता है जो आज तक अयोध्या में राम मंदिर में दर्शन करने नहीं गए है।
जो इतना सम्मान नहीं करते, उन पर हम हिंदू विश्वास कर ले- असंभव।