This is real institutional murder. Deva Dwivedi trapped in SCST act and he couldn’t cope with it and committed suicide.
New day new victim of Modi Act .
Another meaningful life has been lost.
#ScrapSCSTAct
नीलचट्टा स्कूल का अतिथि शिक्षक। महिला शिक्षिका पर डोरे डाल रहा था। शिकायत हुई हेडमास्टर की तो समझाया गया नीलटा नहीं माना। फिर 112 से पुलिस बुलाई गई।
और फिर जो हुआ, वो देखो।
नीलटा पुलिसकर्मी से भिड़ गया। हाथापाई करने लगा। और जब पकड़े जाने की नौबत आई, तो SC/ST मोदी एक्ट में फंसाने की धमकी देने लगा।
बस। इतना ही।
यही हथियार मोदी जी ने दिया है।
महिला को परेशान करो। प्रधानाचार्य की सुनो ही नहीं। पुलिस से हाथापाई करो। और जब सामना हो, तो SC/ST की धमकी दो।
क्योंकि अब हर गलती का बचाव एक ही है।
चीटिंग पकड़ो, तो दलित। नंबर काटो, तो दलित। महिला पर डोरे डालो, तो दलित। पुलिस से भिड़ो, तो दलित।
हर जगह एक ही कहानी। गलती करो। पकड़े जाओ। और SC/ST लगा दो।
मोदी जी ने देश को गर्त मे पंहुचा दिया 🤡
अगर लोग ट्रैफिक चालान नहीं भर रहे हैं तो उसे उनके बिजली के बिल में जोड़ दो तब तो उन्हें भरना ही पड़ेगा।
~ भारत के मुख्य न्यायाधीश का बयान🤔🤔
इनके इस बयान से किसी को कोई आपत्ति नहीं है अगर👇
> न्यायपालिका पर भी यही नियम लागू हो तो 1 साल से ज्यादा पेंडिंग केस पर हर साल ₹50,000 का जुर्माना लगाया जाय।
> जज समय पर केस का निपटारा नहीं कर रहा है तब हर महीने जज की सैलरी का कुछ हिस्सा पीड़ित परिवार को जाना चाहिए।
ये 2 शर्ते न्यायपालिका पर लागू कर दी जाय तो किसी भारतीय को किसी भी तरह का जुर्माना भरने में कोई दिक्कत नहीं होगीं
अगर सुप्रीम कोर्ट ने इन कॉकरोचों के पहले अपराध के लिए माफ नहीं किया होता तो आज प्रधानमंत्री मोदी को गाली देने की हिम्मत नहीं करते।
जब पुलिस में रिकॉर्ड नहीं होगा तो हर अपराध पहला होगा।
पर्ची से पद तो मिल जाता है लेकिन संस्कार नहीं।
मोहन यादव के आगे ये जो बुजुर्ग MLA खड़े हैं ये आठ बार के विधायक हैं
मोहन यादव जब गांव प्रधान भी नहीं बना था जब ये MP सरकार में मंत्री थे
पूरा mp क्या हिंदुस्तान थु थु कर रहा है।। पर्ची वाले संस्कार
@CMMadhyaPradesh
शायद यह पहली बार था… और अब शायद ऐसा माहौल दोबारा कभी न बने।
मैंने पहली बार सदस्यों में अपनी मांगों को लेकर मैनेजमेंट और सरकार के खिलाफ इतना गुस्सा और आक्रोश देखा था।
पहली बार देखा कि दूसरी यूनियनों और एसोसिएशनों के सदस्य भी स्ट्राइक से ठीक पहले AIBOC से जुड़ रहे थे, क्योंकि वे इस लड़ाई को अपनी लड़ाई मान रहे थे।
पहली बार देखा कि सोशल मीडिया पर बैंकर्स पूरी-पूरी रात सक्रिय रहे, एकजुट होकर कंटेंट शेयर किया और मैनेजमेंट द्वारा चलाए जा रहे प्रोपेगेंडा का मजबूती से जवाब दिया।
पहली बार देखा कि कई न्यूज़ एंकर्स भी खुलकर बैंकर्स की मांगों और संघर्ष का समर्थन कर रहे थे।
जो मोमेंटम, जोश और उत्साह इस बार बना था, उसे दोबारा देखना शायद बेहद दुर्लभ होगा।
ऐसे समय में स्ट्राइक को टालने का UFBU का फैसला बेहद निराशाजनक और गलत है।
मैं UFBU के इस फैसले का स्पष्ट रूप से विरोध करता हूँ।
इतिहास में ऐसे मौके बार-बार नहीं आते।
जब पूरा वर्ग एकजुट होकर खड़ा हो, तब पीछे हटना सवाल जरूर खड़े करता है।
🖋️ Mithilesh Singh
#shame #BlackSunday
Disappointed. Angry. Betrayed.
Member Bankers were Not Prior Informed about the Meeting, Why!!??
Someone is Cross Selling here too!!
Another historical discussion with no actual result. RIP 5 Days Banking😌😌
बैंक यूनियन्स को बैंकर्स का काटना ही था तो कम से कम सैटरडे को ही ये सब कर लेते।
संडे भी काम करा लिया और स्ट्राइक भी कैंसिल कर दी।
बेचारे सैटरडे की छुट्टी माँग रहे थे, यहाँ एक संडे एक्स्ट्रा काम करवा दिया यूनियन ने।
गजबे है
@AirrbeaOfficial कुछ तो शर्म करो😡😡😥😥
रविवार को बुलाकर, 2 जान लेकर, फिर इतनी रात को चुपके से बोल रहे, Understanding reached, नो explanation given.जो सो गए वो जब सुबह जागकर बैंक जाने की हड़बड़ी में कुछ न कुछ accident कर लेंगे उसका जिम्मेदार कौन होगा😡😡