इंसान कर्म करने मे तो
अपनी मनमानी कर सकता हैं
मगर फल भोगने मे नही
अनुभव की भट्टी मे
जो तपते हैं,
दुनिया के बाजार मे बस
वही सिक्के चलते हैं।
अच्छे जरूर बने
पर साबित करने की
कोशिश ना करें
क्योंकि जो इंसान
सही होता हैं,
वो सही साबित करने मे
अपना समय व्यर्थ नहीं करता
राजा झुके, झुके मुगल-अंग्रेज, झुका गगन सारा।
सारे जहां के शीश झुके, झुका ना कभी सूरज हमारा।।
कुशल प्रशासक, अजेय योद्धा महाराजा सूरजमल जी की जयंती पर उन्हें कोटिश: नमन। आपकी वीरता, शौर्य एवं पराक्रम की वीर गाथाएं युगों-युगों तक अमर रहेंगी।
इंसान कर्म करने मे तो
अपनी मनमानी कर सकता हैं
मगर फल भोगने मे नही
अनुभव की भट्टी मे
जो तपते हैं,
दुनिया के बाजार मे बस
वही सिक्के चलते हैं।
अच्छे जरूर बने
पर साबित करने की
कोशिश ना करें
क्योंकि जो इंसान
सही होता हैं,
वो सही साबित करने मे
अपना समय व्यर्थ नहीं करता